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Wednesday, 13 May 2020

प्रधानमंत्री के संबोधन को अखिलेश यादव ने बताया निर्रथक

लखनऊ ब्यूरो

प्रधानमंत्री के संबोधन को अखिलेश यादव ने बताया निर्रथक

     समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री  अखिलेश यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री का कल का सम्बोधन न निरर्थक निबन्ध था अपितु वह गुमराह करने वाला भी रहा। विपदा के मारे लाखों मजबूर लोगों के भावी जीवन के प्रबंधन का उसमें कोई संवेदनशील संकेत नहीं मिला। कोरोना संकट से निबटने के नाम पर अब बढ़ती घूसखोरी की शिकायतें स्वयं भाजपा विधायक-सांसद करने लगे हैं। मजदूर और गरीब के समक्ष रोजी-रोटी का संकट गहराता जा रहा है। भाजपा सरकारें सिर्फ आंकड़ों की जुगलबंदी करती रहती है। यह मजबूर वर्ग के साथ धोखा है।
     पहले 15 लाख का जुमला अब 20 लाख करोड़ का झूठा दावा। अबकी बार लगभग 133 करोड़ लोगों को 133 गुना बड़ी मार। इस पर कोई कैसे एतबार कर सकता है? अब लोग यह नहीं पूछ रहे हैं कि 20 लाख करोड़ में कितने जीरो होते है बल्कि ये पूछ रहे हैं कि उसमें कितनी गोल-गोल गोली होती है।
सन् 2022 तक सबको घर देने का वादा करने वाली सत्ताधारी आज बेघर भटकते भूखे प्यासे लोगों को एक वक्त की रोटी तक नहीं दे पा रहे हैं। इतिहास गवाह रहा है, सड़कों पर उतरी जनता ने सर्वशक्तिमान होने का दम्भ-भ्रम रखने वाले एक-से-एक बड़ों को पैदल कर दिया है।
     अमीरों को हवाई जहाज भेजकर एयरलिफ्ट कराने वाली सरकार जमीन पर गाड़ियों के नीचे कुचले जा रहे मजदूरों की जिंदगी के प्रति लापरवाह है। कब तक ये अपनी गरीबी की कीमत बेमौत मर कर चुकाते रहेंगे। भाजपा विधायक फोन पर, महापौर पत्र लिखकर अपनी नाकारा राज्य सरकार को अपनी व्यथा सुना रहे हैं। उनकी शिकायत है कि सरकार के तले भ्रष्टाचार जारी है।
     ये सच है कि बुनियाद कभी दिखती नहीं पर ऐसा भी नहीं कि उसे देखना भी नहीं चाहिए। जिन गरीबों के भरोसे की नींव पर आज सत्ता का इतना बड़ा महल खड़ा हुआ है, ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद, संकट के समय में भी उन गरीबों की अनदेखी करना अमानवीय है। बात लोकल की करना और काम कारपोरेट समाज के लिए करना, यह दोहरा चरित्र भाजपा का हमेशा से रहा है। यह ‘सबका विश्वास‘ के नारे के साथ विश्वासघात है।

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