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Friday, 12 June 2020

वाराणसी : अब जनपद में आयुष्मान योजना के तहत भी होगा कोरोना के मरीजों का इलाज

कैलाश सिंह विकास


अब जनपद में आयुष्मान योजना के तहत भी होगा कोरोना के मरीजों का इलाज


        वाराणसी:  जिलाधिकारी एवं जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष कौशल राज शर्मा ने कहा कि कोविड-19 संक्रमण से लड़ने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार लगातार कार्य कर रही है। इसी दिशा में सरकार ने कोरोना के मरीज जो कि आयुष्मान योजना के लाभार्थी हैं को उचित दर पर इलाज मिले इसके लिए उपचार की दरों की घोषणा कर दी है। 
         जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के कार्डधारक कोरोना मरीजों के उपचार के लिए शासन स्तर से दरों का निर्धारण कर दिया है जो इस प्रकार हैं। जनरल वार्ड (आइसोलेशन) में भर्ती संक्रमित व्यक्तियों पर प्रति शैया प्रति दिन 1800 रुपये, हाईडिपेन्सी यूनिट (आइसोलेशन) में भर्ती संक्रमित व्यक्तियों पर प्रतिदिन 2700 रुपये, आई0सी0यू0 (वेन्टीलेटर रहित) में भर्ती संक्रमित व्यक्तियों पर प्रतिदिन 3600 रुपये एवं आई0सी0यू0 (वेन्टीलेटर सहित) में भर्ती संक्रमित व्यक्तियों पर प्रतिदिन 4500 रुपये उपचार पर खर्च करने का प्रावधान किया गया है।जिलाधिकारी ने कहा कि इस संबंध में राज्य स्तर से विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए गए हैं जिसमें उपचार की प्रक्रिया एवं विस्तृत मानक निर्धारित किए गए हैं। इस योजना के तहत ऐसे सूचीबद्ध चिकित्सालय जो कोविड-19 चिकित्सालय के रूप में चिन्हित हैं उनके द्वारा निर्धारित मानक एवं प्रक्रिया का पूर्णतया पालन करते हुये इस योजना के लाभार्थी मरीजों का  इलाज किया जाएगा। सूचीबद्ध एवं कोविड-19 के अंतर्गत इलाज के लिए चिन्हित चिकित्सालय अपने यहाँ भर्ती मरीजों में इस योजना के लाभार्थी मरीजों का उपचार योजना के तहत करें। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0वी0बी0सिंह ने बताया कि जिले के तीन राजकीय चिकित्सालयों पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय, सर सुंदर लाल चिकित्सालय बीएचयू एवं ईएसआईसी हॉस्पिटल को कोविड-19 समर्पित चिकित्सालय घोषित किया गया है। आयुष्मान योजना के अन्तर्गत उन्ही का उपचार किया जा सकता है जो गोल्डन कार्डधारक हैं। यदि योजना अन्तर्गत चिन्हित लाभार्थी का गोल्डन कार्ड नहीं बना है तो आरोग्य मित्र के माध्यम से सम्बन्धित महिला/पुरुष का गोल्डन कार्ड बनवाकर का उपचार कराना सुनिश्चित किया जाए। कोविड-19 के संक्रमण के चलते वर्तमान में योजनान्तर्गत उपचार प्रदान करने हेतु टीएमएस में बायो-मैट्रिक की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।

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