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Friday, 21 August 2020

Million rupees had been gone in dustbin UTTAR PARDESH

कृपा शंकर चौधरी

 उत्तर प्रदेश में करोड़ों रुपए चलें गये कचरे के ढेर में

स्वच्छ भारत अभियान के तहत केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार प्रतिवर्ष बजट का एक भारी हिस्सा इस योजना के तहत ख़र्च करती है । किन्तु जमीनी स्तर पर योजना में व्यय धन कचरे के ढेर में चलें जाते हैं और करोड़ों रुपए बरबाद होने जैसा दिखता है। जिम्मेदार इसपर भी तर्क देते हैं कि बहुसंख्यक आबादी में इस तरह की योजनाएं एक शोध की भांति है जिसमें 10% भी परिणाम आते हैं तो वह बहुत अधिक है।


दरअसल बात स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांव गांव में कूड़ेदान लगाने की है। योजनान्तर्गत संबंधित अधिकारियों एवं ग्राम प्रधान को कूड़ेदान लगाने को कहा गया और  लगभग उत्तर प्रदेश में इसका अनुसरण भी किया गया जिसके अंतर्गत करोड़ों रुपए खर्च हुए। अब इस योजना से लगे कूड़ेदान की पड़ताल की जाए तो लगभग सभी कूड़ेदान नदारद मिलेंगे,जो है भी वह कूड़े के ढेर बन चुके हैं।
बताते चलें जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में 59163 ग्रामसभा है और लगभग प्रत्येक ग्रामसभा में कम-से-कम 10 जोड़ी कूड़ेदान लगाए गए। बताया गया की एक जोड़ी कूड़ेदान लगाने में अनुमानतः 5000 रुपए व्यय हुए जिससे पूरे प्रदेश में देखा जाएं तो लगभग 295815000 रूपए खर्च हुए। मात्र एक मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर की बात करें तो 19 ब्लाक के अंतर्गत 1354 ग्रामसभा आती है जिसके अंतर्गत लगभग 6770000 रुपए खर्च हुए होंगे। उक्त आंकड़े ज्यादे भी हो सकते हैं।

 कूड़ेदान लगाने में कमीसन बाजी का संदेह

जानकारों का माने तो कूड़ेदान लगाने में कमीसन का धंधा भी खूब फला-फूला जिससे घटिया सामग्री लगाकर सरकारी पैसे का बंदरबांट किया गया। कहीं ग्राम प्रधान तो कहीं सेक्रेटरी तो कहीं जिले स्तर पर इस कार्य की सेटिंग की गई ।
इस कार्य को अंजाम देकर कुछ लोग मालामाल हो गये जिसका नतीजा है कि अल्प समय में ही सभी कूड़ेदान धाराशाई होकर गायब हो गये।

कुछ जवाबदेही जनता की भी

गांव गांव कूड़ेदान लगाने पर सरकार की खूब तारीफ की गई कार्य भी तारीफ योग्य था। किन्तु कूड़ेदान का प्रयोग न जानने वाले जनमानस को यह मात्र खेल जैसा लगा और समुचित रखरखाव के अभाव में करोड़ों रुपए कूड़े में तब्दील हो गया। तहकीकात करने पर पता चला कि ग्रामीणों को कूड़ेदान के उपयोग की समुचित जानकारी नहीं दी गई इसके अलावा सफाई कर्मचारियों ने अपने जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया जिसके कारण भी कूड़ेदान बर्बाद हो गया। 

बताते चलें कि स्वच्छता अभियान के तहत सरकार द्वारा हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। प्रत्येक वर्ष एक ग्रामसभा में 20-30 लाख रुपए दिए जाते हैं और स्वच्छता पर ज्यादा खर्च का दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार विज्ञापन में करोड़ों रुपए खर्च करती है इसके बावजूद योजना के क्रियान्वित करने वाले धरातल पर उतारने में सफल नहीं हो पाते हैं।

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