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Saturday, 19 September 2020

बिजली निगमो के निजीकरण का टेंडर हुआ तो हड़ताल पर चले जाएंगे बिजलीकर्मी

कैलाश सिंह विकास वाराणसी
*प्रकाशनार्थ* 

 
 बिजली निगमो के निजीकरण का टेंडर हुआ तो हड़ताल पर चले जाएंगे बिजलीकर्मी

 कारपोरेशन में नियुक्त कंसल्टेंट के तार पहले से ही निजी कंपनियों से जुड़े है और यह एक बड़े घोटाले की साजिश है।

 वाराणसी18सितम्बर । विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रबन्ध निदेशक कार्यालय भिखारीपुर पर निजीकरण के खिलाफ आज सत्रहवें   दिन भी वाराणसी के समस्त बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं ने प्रबन्ध निदेशक कार्यालय भिखारीपुर पर  किया जोरदार  विरोध प्रदर्शन किया ।

   आज की विरोध सभा में वक्ताओं ने कहा कि विगत 6 माह से देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया कोविड -19 के वैश्विक महामारी से व्यापक चुनौतियों के दौर से गुजर रही है। लोगों के जीवन को आसान बनाये रखने के लिए बिजली विभाग के अभियंता व सभी बिजली कर्मी अपने जान की परवाह किए बिना अनवरत काम कर रहे है और निजी संस्थाएं बिल्कुल हाथ पर हाथ रखे घरों में तमाशा देख रही हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा ने महामारी के दौर में बिजली कर्मियों द्वारा निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाये रखने की बार बार प्रशंसा की लेकिन 18 अगस्त को प्रमुख सचिव (ऊर्जा) एवं चेयरमैन उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ हुई बातचीत में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के प्रस्ताव से बिजली कर्मियों को भारी निराशा हुई है और उनमे आक्रोश व्याप्त हुआ। बिजली कर्मी ऊर्जा निगमों के सबसे प्रमुख स्टेक होल्डर हैं ऐसे में बिजली कर्मियों को विश्वास में लिए बिना नौकरशाहों के प्रस्ताव पर निजीकरण करना सर्वथा गलत और टकराव बढ़ाने वाला कदम होगा। इससे न सिर्फ बिजली के कर्मियों की सेवा शर्तें प्रभावित होंगी बल्कि बिजली की कीमतों में भारी इजाफा होने से आम उपभोक्ताओं को भारी आर्थिक बोझ भी झेलना होगा। जिन भी प्रदेशों-जगहों पर बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौपा गया है वहां निजीकरण व्यवस्था पूरी तरह से असफल रही है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष  समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि निजीकरण के नाम पर बड़ा घोटाला करने हेतु शक्ति भवन में बड़े पैमाने पर कन्सल्टैंट नियुक्त किये गए हैं।प्रबंधन द्वारा नियुक्त इन कन्सल्टैंट्स के तार बिजली आपूर्ति करने वाली निजी कंपनियों से पहले से ही जुड़े हुए हैं और बिजलीकर्मी जानते है कि निजीकरण की प्रक्रिया  एक बडे घोटाले की साजिश है, शक्ति भवन में बिजली के अत्यंत अनुभवी विशेषज्ञों के होते हुए कन्सल्टेंट रखे जाने का घोटाले के अलावा और कोई औचित्य ही नहीं हो सकता।
  वक्ताओ ने यह स्प्ष्ट शब्दो मे कहा कि यदि पूर्वांचल की विधुत व्यवस्था को निजी हाथों में देने का यदि टेंडर होता है तो बिना किसी नोटिस के प्रदेश के समस्त बिजलीकर्मी हड़ताल पर चले जायेंगे और इसकी सारी जिम्मेदारी प्रबन्धन की होगी।

   सभा को सर्वश्री ई0 चंद्रेशखर चौरसिया, ई0 सुनील कुमार,आर0के0 वाही, मायाशंकर तिवारी, ए0के0 श्रीवास्तव,ई0 संजय भारती, गुलाब प्रजापति,राजेन्द्र सिंह,ई0 जगदीश पटेल , अंकुर पाण्डेय,सोहनलाल,जिउतलाल, रमन श्रीवास्तव,वीरेंद्र सिंह, रमाशंकर पाल,मदनलाल,अमितानंद त्रिपाठी, संतोष कुमार,अभिषेक शुक्ला,आदि पदाधिकारियो ने संबोधित किया।

  

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