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Wednesday, 1 September 2021

चौरी चौरा के राजधानी गांव में 2600 वर्ष के पुराने मृदभांड के अवशेषों की हुई खोज

कृपा शंकर चौधरी

चौरी चौरा के राजधानी गांव में 2600 वर्ष के पुराने मृदभांड के अवशेषों की हुई खोज 

गोरखपुर। समाजवादी पार्टी के नेता काली शंकर ने अपने शोध को आगे बढ़ाते हुए एक अन्य मंजिल प्राप्त किया। कालीशंकर द्वारा बताया गया कि अपने शोध के दौरान राजधानी गांव का दौरा किया जैसा कि पूर्व में हमारी मांग पर ब्रह्मपुर ब्लॉक के गौरसयरा गांव में पुरातत्व विभाग ने 2000 साल पुराना स्तूप और तेरहवीं शताब्दी की मूर्तियों की तस्दीक किया था.

उन्होंने कहा किअपने शोध के दौरान आज हमने  राजधानी गांव में जाकर अपने अध्ययन के मुताबिक लोगों से बुजुर्गों से स्तूप व अन्य पुरातत्विक महत्व के स्थलों के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहा था उसी दौरान राजधानी में लोगों द्वारा बताया गया कि यहां बहुत बड़ा स्तूप था परंतु चकबंदी के बाद लोगों ने ध्वस्त कर दिया और यहां के प्राचीन ईंटों को उठा ले गए उसके पश्चात हमने उस क्षेत्र में जगह जगह निरीक्षण करना शुरू किया. निरीक्षण के दौरान हमने देखा की एक तालाब की मिट्टी निकली हुई है जिसमें अपने अध्ययन व अनुभव के आधार पर हमने मिट्टी के बर्तन के टुकड़े व लंबे व चौड़े ईट को देख कर पहचान लिया किए मौर्यकालीन मृदभांड के टुकड़े हो सकते हैं. जिस पर हमने तत्काल ही पुरातत्व विभाग से संपर्क साधा.
दरअसल यह मृदभांड के टुकड़े मध्यकालीन, कुषाण कालीन से 2600 वर्ष पुराने हैं जो यह मौर्य काल युगीन होने का भी स्पष्ट संकेत देते हैं इसकी तस्दीक करने हेतु जब क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी श्री नरसिंह त्यागी को फोटो भेज कर पूछा तब पुरातत्व अधिकारी ने मुझे फोन कर और व्हाट्सएप पर बधाई देते हुए लिखकर बताया बिल्कुल ही यह मध्यकालीन कुषाण कालीन से लेकर 2600 वर्ष तक पुराने है जो मौर्यकालीन भी हो सकते हैं.

कालीशंकर द्वारा सरकार से मांग किया गया कि तत्काल ही क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर खुदाई किया जाए और चौरी चौरा के अति प्राचीन इतिहास को विश्व के सामने रखा जाए तथा इस क्षेत्र को पर्यटन के रूप में विकसित करने की कार्य योजना भी तैयार की जाए.

दरअसल कालीशंकर यह बतलनाय चाहते हैं कि यही राजधानी का क्षेत्र ही पिपली वन हुआ करता था. आज भी यहां सैकड़ों वर्ष पुराने पीपल के वृक्ष बहुतायत में मिलते हैं मोरों की संख्या यहां बहुतायत में हैं. यह क्षेत्र मौर्य का बहुत ही महत्वपूर्ण इतिहास समेटे हुए है शायद चंद्रगुप्त मौर्य यही पैदा हुए थे और यही राजधानी उनकी महत्वपूर्ण स्थल रही होगी यह वृहद शोध का विषय है जिस पर हम लगातार काम कर रहे हैं.

निरीक्षण व शोध के दौरान उनके साथ साथ एडवोकेट रंजीत,आकाश यादव, गुलशन निषाद,रुदल निषाद, गोलू यादव, अवधेश निषाद, विशाल यादव, इंद्रासन निषाद, दीपक प्रजापति, रामलखन निषाद, अमरजीत निषाद, जयराम प्रजापति, वीरू निषाद आदि ने उपस्थित होकर सहयोग किया.


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