रिपोर्ट - कमलेश कुमार
कुसम्ही बाजार, गोरखपुर। भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माने जाने वाला सावन मास 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान भोलेनाथ की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से भक्तों को सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
ज्योतिषाचार्य पं. श्रीधर दास पांडेय के अनुसार सावन में राशि के अनुरूप शिवलिंग का अभिषेक और पूजन करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए राशि अनुसार अलग-अलग पूजन विधि और सामग्री का सुझाव दिया है।
मेष राशि के जातक लाल चंदन व केसर मिश्रित जल से अभिषेक कर 'ॐ भौमेश्वराय नमः' का जाप करें। वृषभ राशि वाले दूध, दही और सफेद चंदन से पूजन कर श्वेतार्क के फूल चढ़ाएं। मिथुन राशि के लोग गन्ने के रस या हरे मूंग के जल से अभिषेक कर बेलपत्र अर्पित करें। कर्क राशि वालों के लिए कच्चे दूध, गंगाजल और अक्षत से अभिषेक शुभ माना गया है। सिंह राशि के जातक गुड़ मिश्रित जल से अभिषेक कर लाल पुष्प चढ़ाएं।
कन्या राशि वाले भांग, धतूरा और गन्ने के रस से पूजन करें। तुला राशि के जातक इत्र, गाय के घी और शक्कर का प्रयोग करें। वृश्चिक राशि वाले पंचामृत से अभिषेक कर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। धनु राशि के लोग हल्दी या केसर मिश्रित दूध से अभिषेक कर पीले फूल अर्पित करें। मकर राशि वालों को काले तिल मिश्रित जल से अभिषेक और शमी पत्र अर्पित करने की सलाह दी गई है। कुंभ राशि के जातक नारियल पानी अथवा गंगाजल में काले तिल मिलाकर अभिषेक करें, जबकि मीन राशि वाले केसर व पीले चंदन से भगवान शिव का श्रृंगार कर बेसन की मिठाई का भोग लगा सकते हैं।
ज्योतिषाचार्य ने कहा कि सावन का हर दिन शिव आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालुओं को नियमित रूप से शिव नाम का जाप, बेलपत्र अर्पण, रुद्राभिषेक और सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी विशेष ग्रह दोष या व्यक्तिगत समस्या के लिए जन्मकुंडली के आधार पर उचित ज्योतिषीय मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
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