उपेन्द्र कुमार पांडेय
आजमगढ़। शहर कोतवाली के ठीक पास सोनोग्राफी सेंटर के बाहर स्थित एक प्राचीन पीपल का पेड़ 33,000 वोल्ट के हाई-टेंशन बिजली के तार की चपेट में आ गया। दो दिनों से लगातार सुलग रहे इस पेड़ की मोटी डाली मंगलवार को अचानक बीच सड़क पर आ गिरी। इस दौरान वहां से गुजर रही एक कार पेड़ के भारी-भरकम तने की चपेट में आकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हालांकि, कार में सवार चार लोग इस भीषण हादसे में बाल-बाल बच गए।
बिजली के तार से लगी थी आग
स्थानीय निवासियों के अनुसार, 33,000 वोल्ट की हाई-टेंशन लाइन के संपर्क में आने से पेड़ में आग लग गई थी। खतरे को देखते हुए सोमवार दोपहर कुछ समय के लिए इलाके की बिजली आपूर्ति बंद की गई थी। स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना तत्काल फायर ब्रिगेड और वन विभाग को दी थी, लेकिन आरोप है कि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे पेड़ दो दिनों तक लगातार सुलगता रहा।
मंगलवार को जब दमकल विभाग की टीम मौके पर आग बुझाने पहुंची, उसी दौरान पेड़ का एक बड़ा तना टूटकर अचानक सड़क पर आ गिरा। इसी दौरान हेमंत कुमार यादव अपनी बहन के इलाज के लिए परिवार के साथ कार से वहां से गुजर रहे थे और वाहन हादसे का शिकार हो गया।
कार चालक हेमंत कुमार यादव ने दमकल विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि खतरा स्पष्ट होने के बावजूद प्रशासन ने न तो रास्ते को ब्लॉक किया और न ही कोई बैरिकेडिंग की। यदि समय रहते यातायात रोक दिया जाता तो यह हादसा टल सकता था। कार में चार से अधिक लोग सवार थे, जिनकी जान किस्मत से बच गई, लेकिन वाहन पूरी तरह नष्ट हो गया।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग और दमकल की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष जताया। लोगों का कहना है कि यदि पहली सूचना पर ही पेड़ की डालियों की छंटाई कर दी जाती या सुरक्षा घेरा बना दिया जाता, तो यह दुर्घटना न होती।
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। दमकल टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया और सड़क से मलबा हटाकर यातायात बहाल किया। हालांकि, घटना के दौरान पूरी तरह आवागमन बंद न होने से सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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