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Friday, 16 February 2018

लखनऊ - गरीबों का जीवन स्तर उठाने एवं आर्थिक उन्नयन कार्यक्रम पर लगा विराम

विश्वपति वर्मा;

जब देश में रोजगार को लेकर सत्ताधारी एवं विपक्षी पार्टियों से लेकर बेरोजगारों में जबरदस्त बंहस चल रहा है तो हमने सोचा कि  क्यों न मेहनतकश मजदूर -कारीगरों को मिलने वाले काम का तहकीकात किया जाये ,हम बस्ती जिले के एक व्यस्त चौराहे पर जब पंहुचे तो कटरा के नाम से पहचाने जाने वाले चौराहे पर हमे भीड़ का एक बड़ा हिस्सा हाथ में फावड़ा ,चुनाई  एवं घरों में प्लास्टर करने वाले संसाधन  के साथ बैठे दिखाई दिए।


 जिले के कटरा स्थिति चौराहे  पर रोज डेली सुबह के वक्त में हथियार लेकर सैकड़ो की संख्या में भीड़ एकत्रित हो जाती है। यह भीड़ किसी से लड़ाई करने नहीं आती ,भीड़ के लोग धरना प्रदर्शन के लिए नहीं आते न ही किसी मूर्ति का दर्शन करने आते हैं सैकड़ो की संख्या में यह भीड़ कटरा चौराहे पर इस लिए दिखाई पड़ती है ताकि उन्हें  दिहाड़ी के मजदूरी पर दिन भर का काम मिल जाये। इसके लिए कार्य के दौरान प्रयोग में आने वाली आवश्यक वस्तुओं को ये  साथ में लेकर आते हैं। 

इस भीड़ के हिस्से में शामिल कुछ मजदूरों से जब बात हुई तब हमें यह लगा कि  गरीबों का जीवन स्तर उठाने एवं आर्थिक उन्नयन कार्यक्रम पर बस्ती जिले में  विराम लग गया है,जिसकी वजह से मजदूर और कारीगर वर्ग के एक बड़े तबके को जीविका चलाने के लिये काफी समस्याओं से जूझना पड़  रहा है। 

रामू ,नरसिंह एवं प्रवीण  से बात हुई तो उन्होंने बताया कि मनरेगा से गांव में रोजगार देने की बात केवल हवा -हवाई है इन लोगों ने बताया कि  पिछले वर्ष मनरेगा में किये गए कार्य का भुगतान नहीं मिला वंही अब गांव में इस योजंना के तहत कोई कार्य नहीं हो रहा है जिसके वजह से हम लोग इस उम्मीद से यंहा बैठे हैं कि कोई आएगा और कहेगा कि हमारे यंहा काम पर चलना है। चुनाई का काम करने वाले गुडडू ने बताया कि हम सुबह सात बजे यंहा आ जाते हैं ताकि निर्माण कार्य कराने वाले लोगों से मुलाकात हो सके ,गुडडू ने बताया कि इस तरहं से  प्रतिदिन रोजगार तो नहीं मिलता लेकिन अपने इस कार्य को छोड़कर जाये तो कंहा जाएँ।

इमरान ,राकेश ,राजू और महमूद से बात हुई तो इन लोगों ने बताया कि इस समय काम के लाले पड़े हुए हैं जिसकी वजह से घर की माली हालत काफी खराब चल रही है ,इन लोगों ने बताया कि  लोग कहते हैं कि  वो लोग भुखमरी के शिकार हैं जो मेहनत करना नहीं चाहते। लेकिन यह महज लोगों के मन में उपजने वाली नकरात्मक विचार है। इनलोगों ने बताया कि  हम लोग सुबह सात बजे से आकर यंहा बैठते हैं लेकिन जब 11 बजे तक काम लेने के लिए कोई नहीं दिखाई देता तो हम लोग मुह लटका कर घर चले जाते हैं।

मजदूरी करने वाले जगजीवन ने बताया कि  श्रम विभाग में हम मजदूरों के लिए कई सारे योजनाओं की बात होती है ,लेकिन यंहा पर रजिस्ट्रेशन कराने  के लिए 300 से 400  रूपये तक लोग मांगते हैं ,जगजीवन ने बताया की मजदूर वर्ग को सुबिधा देने के नाम पर सरकार  और विभाग महज ढोल पीट रही है ,जगजीवन का कहना है कि हम लोग काम न मिलने की वजह से 100 रूपये की दिहाड़ी पर भी काम कर लेते हैं ताकि बच्चों के खाने के लिए शाम को चावल का पैंसा मिल जाये।


यंहा पर मौजूद कारीगर एवं मजदूर वर्ग की समस्याओं को सुनकर ऐसे लगता है कि  पिछले 18 वर्षों के अंदर की बात कर ली जाये तो न सरकारों ने रोजगार के साधन उपलब्ध कराने  के लिए ठोस कदम उठाये हैं और न ही मजदूर वर्ग को उचित सुबिधा -सुरक्षा दिलाने के लिए कभी गंभीरता दिखाई  है ,मनरेगा योजना के तहत गांव में रोजगार उपलब्ध कराने  की बात केवल ऊंट के मुँह में जीरा वाली  कहावत चरितार्थ करती है।

अतः  सरकार  को इस बात पर गंभीरता से विचार करने की जरुरत है कि वर्तमान में संचालित शिक्षा को रोजगार परक बनाया जाये ,रोजगार परक  शिक्षा का विस्तार हो ,ग्रामीण क्षेत्र में बिजली और यातायात की पर्याप्त व्यवस्था हो,कृषि द्वारा आय बढ़ाने  के लिए प्रत्येक जिले से प्रगतिशील किसान को ब्राजील ,अमेरिका एवं डेनमार्क जैसे अन्य देशों में वंहा की कृषि व्यवस्था को समझने के लिए  भेजा जाये,प्रदेश भर में खाली पड़े लाखों की संख्या में तालाबों में सरकारी समिति एवं मत्स्य विभाग के देख रेख और खर्चे से मछली पालन का काम शुरू हो ,प्रत्येक तालाब में दो या दो से अधिक लोगों का चयन हो जो समिति का खर्चा देने के बाद लाभांश के हिस्सेदारी में शामिल हों। प्रत्येक जिले में वंहा के  स्थानीय वातावरण एवं कच्चे माल  की उपलब्धता को देखते हुए अलग -अलग प्रकार से रोजगार उपलब्ध कराने  के लिए संसाधनों की स्थापना हो।कौशल विकास उपयोगी एवं कारगर हो। एवं मनरेगा के अंतर्गत मजदूर किसानों को शामिल किया जाये तथा मनरेगा के निर्धारित मजदूरी मूल्य पर या उससे ज्यादा जो 300 सौ रूपये तक हो पर पेड़ लगाने ,सड़क को साफ -सुथरा रखने ,सरकारी कार्यालयों के अगल बगल फूल -पौधा लगाने ,स्कूलों में साफ -सफाई करने ,गांव में बच्चों की चौपाल लगा कर उपयोगी जानकारिया देने जागरूकता फैलाने सहित जिस काम के योग्य जो हो उसे उसी प्रकार से काम दिया जाये ऐसे ही अन्य कार्यों को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर प्रदान किये जाएँ ,यह सिद्धांत महज लोगों को रोजगार  ही प्रदान नहीं करेगा बल्कि समग्र एवं समेकित विकास के मॉडल में सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के बदहाल नज़ारे भी बदलते नजर आएंगे। 


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