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Thursday, 8 February 2018

बस्ती - आईएएस अधिकारी ने बदल दिया सिस्टम '' अवकाश ''को किया ''छुट्टी''

विश्वपति वर्मा ;

ज समाज  के अंतिम पंक्ति में जीवन यापन कर रहे लोग जंहा अधिकारियों -कर्मचारियों के तानाशाही रवैये के कारण  उनसे बोलने और उनके सामने अपनी बात कहने में  हिचकते हैं वंही देश में ऐसे भी लोग हैं जो सरकारी सेवा में रहते हुए आम आदमी के प्रति अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से  निभाने  में ही सामाजिक सेवा समझते हैं। ऐसे ही 27 वर्षीय एक युवा अधिकारी का नाम बस्ती के भानपुर में चर्चा का विषय है ,जो आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए एक नियति तिथि में समस्या पर समाधान लाने के लिए  प्रयत्नशील रहते हैं। उस युवा अधिकारी का नाम है अमनदीप डुली। 



2015 बैच के आईएस अमनदीप  डुली वर्तमान समय में बस्ती जनपद के भानपुर तहसील में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट /एसडीएम के पद पर हैं।  यंहा पर इनकी पहली पोस्टिंग है जो  07 अक्टूबर 2017 को हुई थी। अपने पहले दिन के तैनाती में जब ये भानपुर कार्यालय पंहुचे तब इन्हे गांव के लोगों ने कुछ समस्याएं सुनाई थी जिसे सुनकर ये तुरंत मौके की स्थिति को जानने के लिए बरगदवा पंहुच गए। और वंहा पर ईर्ष्या की भावना के चलते कुछ लोगों द्वारा बाधित की गई नाली से पानी निकासी की समस्या को आपसी सहमति से वंही पर रफा दफा कर दिए। 
                                                         लेख और फोटो में भिन्नता हो सकती है 
उसके बाद से लोगों की समस्याओं को सुनना और उसपर समाधान के रास्ते  निकालने  के लिए युवा अधिकारी ने गांव में जाने का सिलसिला ही बना दिया। और अब तक  दर्जन भर   गांव में पंहुच कर लोगों को उनके दायित्यों एवं कर्तव्यों प्रति जागरूक करने के साथ ,गांव की उन सभी समस्याओं का समाधान मौके पर ही कराते हैं जो वंहा सम्भव रहता है।


सल्टौआ ब्लॉक के रमवापुर निवासी ने एसडीएम से शिकायत की थी कि गांव में सफाई कर्मी नहीं आते जिसकी वजह से सार्वजनिक स्थान पर काफी गंदगी रहती है ,यह सुनने के बाद अगले दिन अमनदीप सीधा ब्लॉक मुख्यालय पंहुच गए और 5 सफाई कर्मचारियों को अपनी गाड़ी में बैठा कर गांव में साफ -सफाई करने के लिए छोड़ आये। 


फरियादी को अपने गाड़ी से छोड़ते हैं घर 

सुनने में थोड़ा दिलचस्प होगा कि एक जिम्मेदार अधिकारी के पास इतना समय कहां हैं कि वह फरियादियों को उनके घर तक छोड़ने जायेगा ,लेकिन यह कोई अचंभव की बात नहीं है ,अमनदीप डुली ऐसे बुजुर्ग व्यक्तियों को जो काफी दूर से पैदल चल कर अपनी समस्या के समाधान के लिए तहसील आते हैं ,अगर उन्हें लगता है कि व्यक्ति हालात का मारा है एवं जिम्मेदार लोगों से उपेक्षित तो  ऐसे बुजुर्ग व्यक्ति को गाड़ी में आगे बैठा देते हैं और उनके साथ  मौके पर  जाकर समस्या को देखते हैं। 

रविवार को नहीं लेते  छुट्टी 

वैसे तो आज कल अधिकारियों -कर्मचारियों में काम के प्रति इतनी कामचोरी आ गई है कि वे  कार्यालयों में लंबित  काम को भी समय से नहीं करते हैं। लेकिन यंहा पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने तो पूरा सिस्टम ही बदल दिया है ,अमूमन सरकार के तरफ से रविवार को छुट्टी अधिकांश जगहों पर होती है जिसमे तहसील भी शामिल है। लेकिन यंहा पर  ये युवा अधिकारी छुट्टी नहीं लेते बल्कि रविवार के दिन किसी गांव में जाकर चौपाल लगाने का कार्यक्रम तय कर देते हैं। 

इलाके में बढ़ती लोकप्रियता 

आम जनमानष में नम्रता से पेश आने की वजह से अमनदीप इस समय क्षेत्र के लोगों में काफी लोकप्रिय हो  रहे हैं ,कई लोगों से बात -चीत के दौरान यह पता चला कि  लोग इस अधिकारी से काफी संतुष्ट रहते हैं ,लोग बताते हैं की किसी भी समस्या को ये बहुत ही गंभीरता से सुनते हैं। बतातें चलें कि अमनदीप आंध्रप्रदेश के गोदावरी जिले के रहने वाले हैं   उनके  पिता  डीएल रत्नम  भी 1987 बैच के आईपीएस हैं वें वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मानवाधिकार आयोग में डीजी के पद पर कार्यरत हैं। 

5 comments:

  1. Wow what a commitment sir Ji. Interested to know who is your role model.

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  2. Nice to see such person. Continue same motives bro

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  3. Real proud of such honest, hardworking and dedicated officers. I'm a upsc aspirant myself, it's really inspirational to read about such young officers doing exemplary work. May God bless you and your family abundantly.

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  4. इस प्रकार के अधिकारियों का जनता दिल से स्वागत करती है। साथ ही ईमानदारी से काम करने के कारण लोग दिल से दुआ देतें हैं।

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