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Wednesday, 11 April 2018

देखो! देश का अंधा कानून!


 हेमेन्द्र क्षीरसागर, बालाघाट

20 बरसों से Skill India में जुटी हुई कौशल विकास व उघमिता मंत्रालय भारत सरकार से वित्त पोषित, प्रदेश तकनीकी शिक्षा विभाग के माध्यम से शासकीय पोलीटेक्निक कालेजों द्वारा संचालित महत्वकांक्षी सीडीटीपी योजना के कर्मचारी अनुदान के अभाव में सालों-साल वेतन से मोहताज रहते है। अगर मिल भी जाए तो राज्य सरकारों की नानुकर से भेजा गया पैसा प्रदेश के वित्त विभाग के रोढे से कोषालयों के बेहिसाब नियमों की भेट चढकर वापस सरकारों की तिजोरी की शोभा बन जाता है।दुष्परिणाम योजना चालु-बंद होने लगती है।

 बावजूद जिम्मेदार दरियाये घोडे बेचकर सोये रहते है। हुकमरानों का तालिबानी फरमान है कि योजना के लिए कोषालयों के दर से ही संस्था को अनुदान राशि मिलेंगी सीधे संस्था के खाते में नहीं। वहीं अंधे कानून की आड में मध्यप्रदेश के विधायकों को वेतन की सोगात स्वंम के खाते में सीधे मिलेंगी। इन्होंने भी यह हंसकर स्वीकार कर लिया हां ! करेंगे क्यों नहीं कामगारों की फ्रिक जो नहीं है। ऐसा हालिया प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष सीतारमन शर्मा के साथ संयुक्त बैठक में सभी दलों के नेताओं ने एक मतेन फैसला लिया गया।

 बताये कारणों में विधायकों को वेतन के वास्ते कई दिनों तक चक्कर लगाना पडता है। निजात पाने के इरादे से यह कदम उठाया गया है। काश! योजना के खैवनहारों के मुफिद कोई कवायद हो जाती तो सोने सुहागा हो जाता। और हुनर को शिखर की ओर जाने से कोई नहीं रोक सकता। जबकि होना यह चाहिए था की इन्हें सदा कोषालयों से ही भुगतान मिलता रहे ताकि यह भी देखते और भोगते रहे  की तुगलकी आदेशों का दंश  और अंधा कानून की सजा होती क्यां है?

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