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Thursday, 12 April 2018

क्या ब्रिटिश सरकार से कमजोर है ,भारतीय शासकों की शक्तियां



विश्वपति वर्मा।

सरकार विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अनेक कार्य करती है जैसे शिक्षा का संचालन, यातायात का प्रबंध, अपराधों पर नियंत्रण ,जनस्वास्थ्य की व्यवस्था, पीने के पानी की पूर्ति आदि। इन कार्यों को करने के लिए विभिन्न संगठनों का निर्माण सरकार द्वारा किया जाता है उदाहरणार्थ शिक्षा के लिए विद्यालय तथा महाविद्यालय खोले जाते हैं ,न्याय के लिए न्यायालय स्थापित किये जाते हैं, जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए चिकित्सालय खोले जाते हैं ,ऐसे ही व्यवस्थाएं मतदाता के हित में एवं मतदाता के परिवार के लिए सरकार द्वारा दी जाती है ।

आजाद भारत में जो व्यवस्थाएं मिल रही हैं इनमें से अधिकतर सुबिधायें अंग्रेजी हुकूमत में भी मिल रही थी ,यह दिलचस्प बात है कि जब देश गुलामी के जंजीरों में बंधा हुआ था तब ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीय नागरिकों को अच्छी सड़के ,शिक्षा ,पुल, एवं निर्माण किये गए अन्य भवन अब से बेहतर बनाकर समर्पित किया जाता था।

आज जब हमारे खुद के इंजीनियर एवं टेक्नोलॉजी है तब हमारे देश मे सड़कों,पुलों एवं भवनों का भविष्य ज्यादा नही है ।आज जब हमारे पास चिकित्सा के क्षेत्र में खर्च करने के लिए पर्याप्त मात्रा में धन है तब बहुसंख्यक आबादी उचित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दर -दर की ठोकरें खा रही है।ऐसे ही जब वेरोजगारों की बढ़ती संख्या और रोजगार स्थापित करने के साधन हैं तब देश मे भारी मात्रा में सामान विदेश से आयात हो रहे हैं ,ऐसी ही तमाम विसंगतियों का सामना देश के नागरिक कर रहे हैं।

अतः सरकार को इस बात पर गंभीर होने की जरूरत है कि देश के नागरिकों को पहले प्रथमिकताएँ तय करते हुए शिक्षा ,चिकित्सा एवं रोजगार की व्यवस्था कराये एवं जिस भी मद में जितना पैंसा व्यय हो रहा है कार्यदायी संस्था से यह सुनिश्चित कराया जाए कि इसकी न्यूनतम आयु क्या होगी ,अगर यह सब कर पाने में सरकार फेल है तो यह निश्चित माना जाए कि या तो भारतीय शासकों के पास निर्णय लेने की शक्तियां नही है ।या फिर सत्ताधारी वर्ग द्वारा देश के नागरिकों को यही मूलभूत सुविधाओं के नाम पर गुमराह किया जा रहा है । जिसका परिणाम होगा कि आम आदमी के हक अधिकार को छीन कर  सत्ताधारी वर्ग अपने बेटे-बेटियों के भविष्य का सुगम निर्माण करते रहेंगे।

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