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Monday, 2 April 2018

प्रिंट और टीवी पत्रकारों को मिलेगा पत्रकार कल्याण योजना का लाभ

  पीसी चौधरी 

   (लखनऊ )
ब्यूरो चीफ तहकीकात न्यूज़ ; 

भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा देश के पत्रकारों के लिए एक वेलफेयर स्कीम जारी की है। जिसके तहत पीआइबी और राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त यानी की जो पत्रकार एक्रेडीटेशन कार्ड धारक है या जिसके पास यह कार्ड नहीं है और लगातार पांच साल पत्रकार के रूप में काम कर रहा हो उसे ५ लाख तक की सहायता मिलेंगी। किसी पत्रकार के निधन पर भारत सरकार ५ लाख की राशी उसके परिवार को देंगी। किसी एक्सीडेंट की घटना में २ लाख तक का मेडिकल खर्चा सरकार देंगी।

केंद्र के सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा २८ मार्च २०१८ से यह कल्याण स्कीम लागू हो गई है। मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा यह स्कीम घोषित की गई है। जिसके तहत प्रिंट और टीवी के पत्रकारों को शामिल किया गया है। कोई बड़ी बीमारी जैसे की कैंसर, किडनी, हार्ट अटैक, लकवा मार जाना, बायपास सर्जरी, ओपन हार्ट सर्जरी, एंजियोप्लास्टी, ब्रेन हेमरेज के वक्त सरकार ३ लाख तक की सहायता प्रदान करेंगी। हालांकि, यह चिकित्सा उन परिस्थितियों में उपलब्ध नहीं होगी जहां पत्रकार सीजीएचएस या कोई बीमा या विभागीय स्वास्थ्य योजना के लाभार्थी है। हालांकि, यह प्रावधान केवल 65 साल तक के पत्रकारों के लिए मान्य है और इसके अलावा स्थायी विकलांगता जिसमें पत्रकार अपना जीवन निर्वाह करने में अक्षम है ऐसे मामले में 5 लाख या इससे ज्यादा की सहायता का भी प्रावधान किया गया है । जिसके पास एक्रेडीटेशन कार्ड नहीं है ऐसे पत्रकारों के मामले में, पांच साल के लिए काम करने वाले पत्रकार को एक लाख की सीमा में मदद मिल सकती है।

सहायता की राशी मंजूर करने के लिए कमेटी का गठन किया गया है जिसमें टीवी जर्नलिस्ट, फ्रीलांस जर्नालिस्ट, न्यूज़ एजंसी, फोटो जर्नालिस्ट और प्रिन्ट मीडिया माध्यम से एक-एक पत्रकार को लिया गया है। यह कमेटी हर तीन महीने में आई हुई अर्जी पर राशि तय करेंगी। सरकार ने यह भी जाहिर किया है की जो मान्यता प्राप्त पत्रकार नहीं है फिर भी यदि मंत्रालय को लगे की सहायता देना उचित है तो उसे भी सहाय मिलेंगी। आज के दौर में जब पत्रकारिता पर खतरा बढ़ गया है और कई पत्रकारों की हत्या के मामले सामने आये है तब ऐसे में यह कल्याण स्कीम पत्रकारों के लिए वरदान साबित होंगी।

इस योजना के अंतर्गत यह बात भी स्पष्ट रूप से घोषित कि गई है कि वित्तीय सहायता पत्रकारों का हक नहीं है। अगर सहायता की राशि से समिति के सदस्य संतुष्ट हो और उचित योग्यता या सहायता प्रदान करने के लिए आवश्यक होगी उसी को इस योजना के तहत आवंटित किया जाएगा और किसी भी कारण के बिना किसी भी आवेदन को स्वीकार या अस्वीकार करने का समिति को अधिकार है। समिति यह सोच सकती है कि किसी विशेष मामले में या असाधारण मामले में, यह उच्च-स्तरीय सहायता की सिफारिश कर सकता है। निर्णय सूचना और प्रसारण मंत्री द्वारा लिया जाएगा।


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