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Thursday, 31 May 2018

ग्राउंड रिपोर्ट - क्या दिल्ली के विशेष भवन में चल रही है मोदी सरकार की 103 योजनाएं ?


बेटी बचाओ -बेटी पढ़ाओ ,जनधन ,आधार ,डिजिटल इंडिया ,मेक इन इंडिया ,गांव में बिजली , नमामि गंगे ,खुशहाल किसान ,भ्र्ष्टाचार ,कौशल विकास ,स्वच्क्ष भारत ,आदर्श ग्राम जैसे 103  महत्वाकांक्षी योजनाएं मोदी सरकार द्वारा लागू किया गया लेकिन धरातल पर पंहुचने के बाद सरकार की योजनाओं से लोग उपेक्षित दिखाई देते हैं। जब देश की जनता से सीधी बात की जाती है तब ऐसा लगता है कि सत्ताधारी पार्टी की सभी योजनायें केवल दिल्ली के एक विशेष भवन में चल रही है.

विश्वपति वर्मा 

जंहा एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में रोजगार के अवसर,भ्रष्टाचार का  खात्मा, गांव और शहरों का विकास ,एवं डिजिटल इंडिया की बात कर रहे हैं वंही देश की बहुसंख्यक आबादी के पास ऐसी कोई योजना की पंहुच नहीं है। वे कल भी उपेक्षित थे और आज भी हैं । 

प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार जब नरेंद्र मोदी लालकिले के प्राचीर से भाषण दे रहे थे तब आदर्श ग्राम सभा को बनाने का ख्याल उनके जेहन में आया था उसके  बाद से जनप्रतिनिधियों के साथ जिले के आलाधिकारियों ने  गांव के समग्र एवं समेकित विकास के उद्देश्य से गांव को गोद लेना शुरू किया तब देश के लोगों के मन में एक जिज्ञासा ने जन्म लिया था कि चलो देर ही सही लेकिन आजादी के  वर्षों बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों को भी मूलभूत सुविधाएं शिक्षा, चिकित्सा, सड़क, आवास एवं रोजगार की सुविधाएं मिलने लगेंगी  लेकिन 1462  कार्यदिवस बीत जाने के बाद भी एक भी गांव आदर्श ग्रामसभा नहीं बन पाया बल्कि पहले से भी ज्यादा खराब स्थिति उन गांवों की हो चुकी हैं।

टीम तहकीकात ने देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा गोद लिए गए गांव लखनऊ के बेंती गांव में  आदर्श ग्राम पंचायत की समीक्षा करने पंहुचे तब ऐसा लगा कि सरकार की योजनाएं केवल सरकारी कागजों और नेताओं के मंच पर चल रही है ,बेंती गांव को गोद लेने के चार साल बाद भी गांव में सरकार की बहुचर्चित शौचालय योजना से भी लोग वंचित हैं।

 डिजिटल इंडिया बनाने की बात जब देश में शुरू हुई तो बौद्धिक सम्पदा के लोग कुछ ज्यादा ही खुश दिखाई दे रहे थे क्योंकि डिजिटल इंडिया में बहुत सारे कांसेप्ट छिपे हुए थे उदहारण स्वरूप ऑनलाइन बैठ कर अधिकारीयों से संबाद करना ,बदहाल व्यवस्था को साझा कर उस पर समाधान लाना ,घर बैठे भुगतान करना ,देश के बजट का इस्तेमाल कहां हो रहा है उसे जानना एवं बहुत कुछ ,लेकिन आज डिजिटल इंडिया  का जंहा कोई मतलब अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों में नहीं है वंही कोयला घोटाले के समकक्ष देश के पैंसे  नुकसान होता दिखाई दे रहा है।

जब किसान शब्द क नाम आता है तब देश के उन किसानों का ख्याल आता है जो  दिनभर कड़ी मेहनत करने के बाद अपने फसल से लागत  मूल्य भी नहीं पाते खुद नरेंद्र मोदी ने एक भाषण के दौरान कहा  था की देश के किसानों का वर्ष 2019 तक आय दोगुना होगा लेकिन मध्यप्रदेश में किसान गोलियों से मारे जा रहे हैं ,तमिलनाडु के किसान मूत्र पी रहे हैं ,महाराष्ट्र में  आत्महत्या कर रहे हैं ,उत्तर प्रदेश के किसान अपने फसलों बेंच कर भुगतान नहीं पा रहे हैं बुंदेलखंड में खेती करने वाले  किसान भुखमरी के कगार पर हैं आखिर किसके अच्छे दिन हैं ? कब बहुरेंगे किसानों के दिन।


गंगा सफाई के नाम पर बनाई गई नमामि गंगे योजना पर जंहा लगभग 60 हजार करोड़ रूपये को खर्च करने का लक्ष्य पूरा होने वाला है वंही उसके बाद से नदियों में और भी प्रदूषण बढ़ चुका है स्वच्क्षता मिशन के नाम पर चलाई जा रही अभियान भी केवल फोटो शेसन तक ही सीमित हो चुका है जब सरकार के पास इन कुव्यवस्थाओं से निपटने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है तब वह देश के नागरिकों को सम्बोधित करके सफाई योजना  को सफल बनाने की बात कर रही  हैं ,नागरिकों का योगदान होना चाहिए लेकिन इसके लिए रिसाइकिल की व्यवस्था ,कूड़े को ठिकाने लगाने के लिए सड़क और नदियों  के अलावां वैकल्पिक व्यवस्था ,पालीथीन पर नियंत्रण ,कूड़ा अधिनियम बनाने की जरुरत पहले है।

रोजगार उपलब्ध कराने की बात जंहा मोदी सरकार में हो रही थी तो ठीक उसका उल्टा होता दिखाई दे रहा है पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के मुकाबले जंहा साढ़े तीन साल में नौकरियों में कमी आई है तो वंही एक करोड़ से अधिक लोग प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष रूप से बेरोजगार होने के मुहाने पर खड़े हैं इसी तरहं मोदी सरकार की सभी लोकलुभावन योजनाएं केवल कागजों एवं वेवसाइटों की शोभा बढ़ा रही हैं।

 भारत एक युवा देश है जंहा किसी भी प्रकार के निर्माण या विध्वंश को चुटकियों में किया जा सकता है लेकिन उसके बावजूद भी देश का 60% युवा अपने आप को ठगा महसूस कर रही  है उत्तर प्रदेश,बिहार  के बहुतायात युवा तेजी से दूसरे राज्यों की ओर रोजगार के खातिर पलायन कर रहे हैं तो वंही पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों साथ सभी राज्यों से विदेश जाने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है लेकिन 4 साल  बीत जाने के बावजूद अभी  तक देश  के किसी कोने में रोजगार के किसी भी साधन को स्थापित करने की सूचना नहीं मिली है जंहा पर 1000 की संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध हो आखिर मोदी सरकार को इस विषय पर तो गंभीर होने की आवश्यकता होनी चाहिए।

 श्री मोदी किस तरहं से देश को विश्वगुरु बनाने के होड़ में लगे हैं क्या उन्हें नहीं मालूम किसी देश का विकास शिक्षा के विकास के बिना  संभव नहीं है? देश में शिक्षा संस्थानों द्वारा एक से लेकर इंटर तक के अंकपत्र को सोने के भाव बेंचा जा रहा है ,कम पढ़े लिखे लोग भी संस्थानों के काले कारतूतों के चलते हाईस्कूल और इंटर मीडिएट की परीक्षा आसानी से पास कर के होनहार लोगों की जिंदगियां बरबाद कर रहे हैं वंही परिषदीय विद्यालयों की गुणवक्ता में लगातार गिरावट आ रही है। देश के लोगों में नई शिक्षा नीति आने की जो उम्मीद थी मोदी सरकार उसे 4 साल में भी लागू नहीं कर पाई है।

ऐसे ही वर्तमान सरकार द्वारा प्रायोजित वे सभी मूलभूत आवश्यकताओं और मुद्दे फेल है जो आज के दौर में बहुसंख्यक आबादी  जरुरत है बालपुष्टाहार, मनरेगा ,मिडडेमील,स्वछ पेय जल ,राशन की कालाबाजारी से लेकर सड़क एवं भवन निर्माण में जो गोलमाल पूर्ववर्ती सरकारों ने किया है सटीक वही काम इस नई सरकार में भी हो रहा हैं इन सब विसंगतियों पर सरकार को गंभीर होने की आवश्यकता है वरना देश के विकास के लिए केवल योजनाओं की गिनती गिना देना ही पर्याप्त नही है उसके लिए कड़ी निगरानी की आवश्यकता होगी सरकारी मशीनरियों पर नियंत्रण करना होगा योजनाओं पर ऑनलाइन विचार /फीडबैक मांगनी होगी नहीं तो पूर्व की घोटालों की भांति मोदी सरकार में भी वह दानव जन्म ले चुका होगा जो अब तक देश झेलता आ रहा है।

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