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Monday, 7 May 2018

बस्ती -सारे मानकों को तार- तार कर संचालन कर रहे हैं मुडबरा, बसडिला भट्ठा के संचालक


यहां की चिमनी से निकलने वाले काले जहरीले धुएं गांव को लोग को कई तरह के संक्रमित बिमरियो का न्योता दे रही है
 लखनऊ-पीसी चौधरी ब्यूरो चीफ

पर्यावरण, प्रदूषण, वन ,स्वास्थ्य के सर्टिफिकेशन साथ श्रमिकों के बच्चों को मूलभूत सुबिधाओं सहित श्रमिकों के लिए स्वच्छ पेय जल ,फस्ट एड बॉक्स ,छाया ,चिकित्सा ,आवास तय वेतन एवं  ईंट भट्ठों के श्रमिकों को श्रम विभाग द्वारा पंजीकरण होना अनिवार्य है लेकिन बस्ती जनपद के अधिकांश ईंट भट्ठों पर ऐसी कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं है जिसमे संचालक द्वारा सीधा -सीधा सरकार और न्यायालय के आदेशों की धज्जियाँ उडाया जा रहा है।


तहकीकात न्यूज़  द्वारा बस्ती जनपद के कुछ ईंट  भट्टों पर श्रमिकों को मिलने  वाली सुबिधाओं की समीक्षा की गई तो वंहा पर श्रमिकों और उनके बच्चों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे वे समाज की मूलधारा में आने के लिए  पलने -बढ़ने वाली सुबिधा प्राप्त करें ।

भानपुर तहसील क्षेत्र के कर्मा  पाठक स्थिति खान ईंट मार्का भट्ठे , मुडबरा में चौधरी भट्ठा SNCH मार्का ,बसदीला में CBF ईट  मार्का, है पर श्रमिकों के लिए कोई बुनियादी सुबिधायें नही हैं जिसकी वजह से श्रमिक


नंगे पैर द्वारा कड़ी मेहनत  करते हुए दिखाई दे रहे है


पर भट्ठा मालिकों का इस से क्या लेना देना उनकी तो अच्छी खासी कमाई भट्टे से आ रही है

अगर जल्द श्रमिक विभाग व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसको गंभीरता से नहीं लिया तो गांव में कुपोषण के लक्ष्ण और तमाम  गंभीर बीमारियां  ग्रसित हो सकती है 

श्रमिकों को खाना पकाने के लिए गैस ,स्टोव या लकड़ी के ईंधन की व्यवस्था होना जरुरी है लेकिन ईंट भट्ठे पर एक श्रमिक आग के गुम्बद पर बैठकर खाना पका रहा है। जो खतरे से खाली नहीं है। यह व्यक्ति जंहा पर बैठा हुआ है उसके चारो तरफ आग का जखीरा है।

श्रमिकों के लिए नहाने -धोने बर्तन साफ करने की सही व्यवस्था न होने से एक बदबूदार स्थान पर दो श्रमिक बर्तन साफ कर रहे हैं ,जबकि श्रमिकों के लिए स्वच्छ पेय जल के साथ खाने पीने रहने की स्वस्थ व्यवस्था होना जरुरी है। इतना ही नहीं यह मनुष्य की नैतिक जिम्मेदारी है कि  वह उन श्रमिकों को उचित सुबिधा दिलाये जिसके बदौलत वो धन्ना सेठ बनकर घूमते  हैं।


इन बच्चों की तस्वीर देखने के बाद इनकी लाचारी और बेबशी साफ -साफ दिखाई दे रही है मासूम सा चेहरा लिए बच्चे ईंट के खेप पर बैठ कर  अपनी बदहाल जिंदगी पर शायद बदलाव के लिए कुछ  आस लगाए हुए हैं। ये तस्वीर मुड़वरा स्थिति चौधरी ब्रिक फिल्ड की है। इन बच्चों के पास न तो सामाजिक जीवन का ज्ञान है और न ही किताबी ज्ञान आखिर देश के भविष्य से खिलवाड़ करने का अधिकार किसने दिया है।



आबादी क्षेत्र के आस -पास चल रहे ईट भट्टे के चलते वहां की हवा खराब हो रही है। जिसका दुष्प्रभाव लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्र के पास चल रहे ईंट भट्टों से निकलने वाला धुआं और कार्बन युक्त गैस हवा के साथ ही क्षेत्र में फैल जाती है, जिससे इस क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य व सेहत को नुकसान हो रहा है। बसडीला, छनवतिया ,रेंगी, मुडबरा, स्थिति जनता ईंट भट्ठा से महज  कुछ दूरी पर स्थिति है जिसका पूरा दुष्परिणाम गांवो में रहने वाले के ऊपर पड़ रहा है ,


देखा जाये तो ईंट का इस्तेमाल मुख्य रूप से मकान बनाने के काम में आता है। वो लोग जो दूसरे लोगों को रहने के लिए मकान बनाने के लिए ईंट बनाते हैं उनके खुद के पास रहने के लिए मकान नहीं है जबकि नियमों के अनुसार श्रमिकों को आवास दिलाना संचालक की पूर्ण जिम्मेदारी है। लेकिन ये तो ठंडी ,गर्मी बरसात के मौसम,में बस एक टप्पर -छप्पर के मकान में जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं।



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