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Wednesday, 12 September 2018

कानपुर-चाहते कुत्ते की आत्मा की शन्ति के पेश की समाज में मिशाल ,कुत्ते का अंतिम संस्कार दी सच्ची श्रद्धांजलि



रवि तहकीकात न्यूज़ 

 कानपुर में एक युवक ने एक ऐसी मिशाल पेश की है।जो आज तक किसी ने नहीं किया है। अभी तक आप ने केवल इंसानो की मृत्यु के पश्चांत उनका अंतिम संस्कार सूना और देखा होगा। लेकिन कानपुर के एक परिवार ने अपने पालतू कुत्ते के ख़त्म होने के बाद उसका अंतिम संस्कार पूरे हिंन्दू धर्म के अनुसार ही किया। उनका कहना है.पालतू पशुओं को लोग पालते है और यह कहते है की यह हमारे परिवार का सदस्य है लेकिन जब उनकी मौत हो जाती है तो उसे केवल एक जानवर की तरह ही लेते है और बोर में भरकर किसी कूड़े के ढेर में फेक आते है।जबकि अगर  हमारे परिवार में किसी सदस्य की मौत हो जाती है तो हम उसे शव का बाकायदा अंतिम संस्कार करते है जिससे उसकी आत्मा को शांति मिल सके। जिसके चलते हम लोगो ने अपने पालतू पशु का  अंतिम संस्कार और तेरहवीं संस्कार हिन्दू रीतिरिवाज के अनुसार एक मनुष्य की तरह किया है जिससे उसकी आत्मा को शांति मिल सके।

आर्य नगर निवासी डॉक्टर हिमांशु मिश्रा ने अपने पालतू कुत्ता (ब्रूज़ो) को 12 साल पहले लेकर आये थे तब से अपने साथ रख कर उसको परिवार के सदस्य की तरह ही पाला। और उसके देहांत के बाद उसका क्रियाकर्म बिल्कुल मनुष्य की भांति हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार किया क्योंकि वह उनके लिए जानवर नही बल्कि उनके घर का एक  सदस्य भी था। 

डॉक्टर हिमांशु मिश्रा जो खुद शिवराजपुर में चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात है उन्होंने बताया कि 12 वर्ष पहले अपने एक दोस्त के यहां से जर्मन शेफर्ड के बच्चे ब्रूज़ो को तब लाये थे जब वह मजह दो दिन का था। और उसका नाम ब्रूजो  उसे एक बच्चे की तरह ही पाला था।और अपने साथ   ही उसे सुलाते थे वह  हमारी एक आवाज़ पर तुरंत दौड़ पड़ता था। हमने उसे एक परिवार का सदस्य ही  माना था उसे खाने में शाकाहारी भोजन ही देते थे। और  मांसाहारी खाना उसे कभी नहीं खिलाया।  ब्रूज़ो को खाने में सबसे ज्यादा पनीर,बिस्कुट,केला ,बर्फी पसंद थी । हमारे हंसते खेलते परिवार के बीच से ब्रूज़ो अचानक बीती 31 अगस्त को  हमें छोड़ कर इस दुनिया से चला गया जिसका परिवार में बहुत गहरा सदमा लगा है। ब्रूज़ो हमारा परिवार का ही एक हिस्सा था जिस तरह से परिवार के बीच से कोई सदस्य दुनिया छोड़ कर जाता है और उसका क्रियाकर्म का संस्कार हिन्दू रीतिरिवाज के साथ किया जाता है। ठीक वैसे ही इंसान और जीव में हमने कोई फर्क नहीं समझते हुए हमने उसे एक परिवार के सदस्य की तरह ही विदा किया। हमने हिंदू रीतिरिवाज के अनुसार विधिविधान से ब्रूज़ो का भैरव घाट में अंतिम संस्कार किया। और विधिविधान से उसका आज तेरहवें दिन उसकी तेरहवीं संस्कार भी किया।  आज घर पर ब्रूज़ो की आत्मा की शांति के लिए घर पर 13 ब्राह्मणों को भोजन करवाया और भैरव घाट पर ब्रूज़ो की आत्मा की शांति के लिए पंडित द्वारा पूजन किया गया और ब्रूज़ो को श्रद्धांजलि दी गयी है उन्होंने समाज को एक सन्देश भी दिया है। 

 पंडित संजीव मिश्रा ने बताया कि स्वान (कुत्ता) भैरव बाबा की सवारी है इसलिए यहाँ पर डॉक्टर हिमांशु जी ने अपने पालतू जीव को पुष्पांजलि और श्रद्धांजली दी है। उन्होंने अपने कुत्ते की आत्मा की शांति के लिए उसका पुरे विधिविधान के साथ में अंतिम संस्कार कराया था और आज उसकी तेहरवी के दिन 13 पंडितो को भोजन कराकर उन्हें दान भी दिया है यह एक अच्छी पहल भी है समाज के लिए इससे समाज में एक नया सन्देश भी जाएगा क्योकि अभी तक लोग अपने पालतू जानवरो के ख़त्म होने पर उसे कूड़े के ढेर में फेक आते थे जिससे उनकी आत्माये भटकती रहती थी लेकिन इस तरह से उनकी आत्मा को शांति और मोक्ष मिलेगा।

1 comment:

  1. Everyone should have same thinking...not only Dogs but all the animals deserve this treatment.... They give 100% on us... They protect us, stay loyal till there last breath n after there death what many people do is throw them... I believe that every body should be treat with respect and love even after death.... I also have ky dog from last 14 years so I can understand that this is great loss... Everyone should do what you did...May his soul Rest in peace...

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