अब केन्द्र सरकार के अन्तिम चरण में देश के संत भी इनसे निराश हो गये - डाॅ0 मसूद अहमद - तहकीकात न्यूज़

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Saturday, 13 October 2018

अब केन्द्र सरकार के अन्तिम चरण में देश के संत भी इनसे निराश हो गये - डाॅ0 मसूद अहमद

चीफ रिपोटर up -चन्द्र मोहन तिवारी 


राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ0 मसूद अहमद ने कहा कि वर्ष 2014 में गंगा की सफाई के अभियान का ढिंढोरा पीटने वाले भाजपा के स्टार प्रचारक और देष के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कागजों पर करोडों रूपये का बजट गंगा मैया के नाम पर खर्च करा दिया






परन्तु देष का दुर्भाग्य है कि अविरल गंगा की मांग के साथ एक सौ ग्यारह दिन अनषन पर लगातार बैठने वाले स्वामी सानंद महाराज ने अपने प्राणों का बलिदान भी कर दिया परन्तु देष के प्रधानमंत्री ने ऐसे महान संत से लगातार अनषन पर रहने के बावजूद अनुरोध करके अनषन तुडवाने का प्रयास भी नहीं किया।

डाॅ0 अहमद ने कहा कि डबल इंजन की सरकार की मांग करने वाले लोगों को देश की जनता ने भरपूर समर्थन देकर केन्द्र के साथ ही उ0प्र0 और उत्तराखण्ड में सरकारे बनाकर डबल इंजन की मांग पूरी की परन्तु न ही इन प्रदेशो के मुख्यमंत्रियों ने भी स्वामी सानंद महाराज की चिंता की और भाजपा के किसी नेता ने। ज्ञातव्य है कि संतो का सहारा लेकर ही भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आयी और संतोे का ही अपमान हुआ। 
 
उ0प्र0 में भी स्वामी परमहंस का अयोध्या में अनषन करना भी  प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री को राश नहीं आया उनकी मांग थी कि प्रधानमंत्री आकर उनसे बात करें लेकिन देश के प्रधानमंत्री के पास बिना बुलाये पाकिस्तान जाने का समय निकल आता है परन्तु अयोध्या आकर एक संत की बात सुनने का समय नहीं है। उस संत को रात में पुलिस द्वारा उठाकर डेढ सौ किलोमीटर लखनऊ लाकर पी0जी0आई0 में भर्ती करा दिया जाता है। यह संतों का अपमान नहीं तो क्या है?
 
 
रालोद प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि देश  की जनता भारतीय जनता पार्टी के जुमलों से आकर्षित हो गयी थी परन्तु देष की आम जनता के साथ साथ किसान नौजवान और बेरोजगार लगातार अपने को ठगा महसूस करते रहे और अब केन्द्र सरकार के अन्तिम चरण में देश के संत भी इनसे निराश हो गये। वास्तव में कहा जा सकता है कि सत्ता के लोभियों का आमजन जीवन के साथ साथ संतो से भी कोई वास्ता नहीं है। रामन्दिर और गंगा सफाई का वादा भी झूठा निकला और ये लोग जनता के वफादार न होकर धोखेबाज निकले।

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