कानपुर-14 सौ वर्ष पुराना है यह मंदिर माता दिन में बदलती है तीन बार अपना रूप - तहकीकात न्यूज़

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Sunday, 14 October 2018

कानपुर-14 सौ वर्ष पुराना है यह मंदिर माता दिन में बदलती है तीन बार अपना रूप



ब्यूरो कानपुर-रवि गुप्ता 

14 सौ वर्ष पुराना है यह मंदिर माता दिन में बदलती है तीन बार अपना रूप ,माता के स्वरूप को बदलते देख भक्तो की होती है मनोकामना पूरी


कानपुर शहर के बीचों बीच बना यह प्राचीन मन्दिरनका इतिहास काफी पुराना है नवरात्रि में जहाँ शहर भर के मन्दिरो में नवरात्रि की धूम मची हुई है वही माता के इस मंदिर में नौ दुर्गा में लगता है भक्तो का तांता ।इस मंदिर की मान्यता है कि जंगली देवी मंदिर  राजा भोज के समय का है।मंदिर में माता दिन में तीन बार रूप बदलती है

माता के होंगे तीन रूपो के दर्शन

कानपुर के किदवई नगर चौराहे के निकट ही बना यह प्राचीन कालीन जंगली देवी मंदिर में यूं तो इस मंदिर में बारों मास भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन नवरात्रों में खास तौर पर दूर दूर से  माता की भक्ति में भक्त खिंचे चले आते हैं इस मन्दिर की मान्यता यह है कि यहां पर जो भी भक्त ईंट रखकर अपनी मुराद की अर्जी लगाता है उसकी अर्जी मां कबूल कर उसे धन्य धान्य से फलीभूत करती हैं। और मुराद पूरी होने के बाद भक्त अपनी ईंट को घर पर स्थापित करता है। इस मन्दिर के कर्ताधर्ता और प्रबन्धक डी पी बाजपेई की माने तो 17 मार्च 1925 को यहां से कुछ दूरी पर बाकरगंज में मो बकर के घर खुदाई के दौरान एक ताम्रपत्र मिला था जिस पर विक्रम संवत 893 अंकित था पुरातत्व विभाग ने उसे लखनऊ संग्राहलय भेज दिया जानकारों की माने तो  यह मन्दिर राजा भोज के समय का लगभग 1400 साल पुराना है उस वक्त यहां घनघोर जंगल और तालाब हुआ करता था। ऐसा हमारे बुजुर्ग बताते थे कि यहां एक नीम का पेड़ था उस वृक्ष के खोह में वही पर यह मैया विराजमान थीं यहां साधु संत तपस्या करते थे ।  उस समय घने जंगल और जंगली जानवरों की वजह से यहां लोग जाने में डरते थे तभी से इस मन्दिर का नाम जंगली देवी मंदिर पड़ गया। 1979 में यह नीम का वृक्ष गिरा यहां के श्रद्धालु भक्त ने इसका निर्माण किया और तबसे यह ट्रस्ट कार्य कर रहा है। इस मन्दिर में भक्त पत्थर लगाने आते है हमारे पास जगह नही बचती की पत्थर लगा सके। ईंट की ऐसी मान्यता है कि यहां भक्त जो मकान बनवाते है उसकी पहली ईंट यहां रखते है भक्तों का ऐसा मानना है कि ऐसा करने से हमारा भवन का निर्माण सकुशल और बड़े पैमाने पर होता है। यहां पर मैया तीन रूप बदलती है श्रद्धा भाव से मैया को देखिए आपको वह तीन रूप दिखाई देंगे ऐसा मानना है की मैया यदि भक्तों को वह तीन रूप बदलते हुए अगर संकेत दे जिसका अर्थ यह है कि उसकी मनोकामना पूरी होने वाली है। उन्होंने बताया कि यह कोई स्थापित नही की गई बहुत प्राचीन मूर्ति है बताया जाता है कि सीता मैया जब बिठूर में थी तब यहां वे लव कुश को लेकर आती थीं यहां देश के कोने कोने से माता के दर्शन के लिए आते है और माता उनकी मनोकामना जरूर पूरी होती है यहां बराबर अखंड ज्योति जल रही है।

माता की कृपा है हम पर

माता के दर्शन के लिए आई नीलम शुक्ला ने बताया कि माता के दर्शन से हमारे पति को पैरालिसिस था वह माता की कृपा से एक दम ठीक हो गए।मन्दिर के सदस्य रमेश तिवारी ने बताया की बचपन से मां के साथ यहां आ रहे है और माता की ऐसी कृपा है कि इस मन्दिर ने लड़का लड़की को शादी के लिए दिखाया जाता है  जिसमें माता उनकी मनोकामना जरूर पुरी करती है।

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