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Wednesday, 10 October 2018

कानपुर-इस विश्वविद्यालय को दी नई पहचान -जानिए प्रो कटियार की अविस्मरणीय कार्य

ब्यूरो कानपुर - रवि गुप्ता 




कानपुर - छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के 4 बार वीसी पद पर रहे पूर्व कुलपति पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित प्रोफेसर डॉ सर्वज्ञ सिंह कटियार अब हमारे बीच नही है लेकिन इस विश्वविद्यालय की कायाकल्प और उनके सराहनीय योगदानों को कभी भुलाया नही जा सकता और उनके द्वारा दी गयी सीख को आज तक यह विश्वविद्यालय पालन करता चला आ रहा है।



आपको बता दें कि 21 दिन पहले अपने स्वरूप नगर आवास पर अपना अकेलापन और बीमारी को बर्दाश्त न कर पाने पर उन्होंने सुसाइड का प्रयास किया था जिसके बाद उन्हें रीजेंसी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां जांच में जहर खाने की बात सामने आई थी और सोमवार देर रात उन्होंने ज़िंदगी को अलविदा कह दिया।

केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में देखना चाहते थे इस विवि को

40 साल से इस यूनिवर्सिटी में कार्यरत हरी राम गुप्ता जो कि अब रिटायर्ड हो चुके है और अभी भी वह विश्वविद्यालय में उनकी जरूरतों को याद किया जाता है और वह अपनी सेवा देने के लिए हमेशा तैयार रहते है। उन्होंने बतौर पूर्व वीसी एसएस कटियार कटियार जी के पीआरओ की भूमिका में काम किया।  डॉक्टर हरि राम गुप्ता ने बताया कि वे इस संस्थान में सन 1974 से यहां है डॉक्टर कटियार ने अपने कार्यकाल में हमारे 30 बार इंटरव्यू लिए उन्होंने हमारी क्षमता को पहचाना और जनसंपर्क अधिकारी के पद पर मनोनीत कर दिया। डॉक्टर कटियार के सहयोग से आम लोगों व छात्रो की समस्याओं से निपटने का काम किया है जिसकी कंप्यूटर से लिस्टिंग कर उनका समाधान भी किया पूरे दिन में उनके अनुशासन के चलते 90 प्रतिशत समस्याये हल हो जाती थी।



ऑनलाइन समस्याये का निराकरण करने की शुरुआत भी डॉक्टर कटियार ने की। उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर से आने के बाद उन्होंने 1994 में इस यूनिवर्सिटी को बतौर वीसी जॉइन किया डॉक्टर कटियार का स्वाभाव अंदर से नम्र था लेकिन वे एक एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में वह सख्त भी थे पॉजिटिव अप्रोच रखने वालो के लिए बहुत ही सहयोगी स्वभाव के थे इस विश्वविद्यालय को बहुत आगे और कुछ अलग देखना चाहते थे। अक्सर वह विदेशों में रिसर्च किया करते थे वहाँ के संस्थानों में काम किया, वहां की कार्यशैली को देखा खास बात यह कि हर चीज़ की मॉनिटरिंग खुद ही करते थे उनका सपना था कि कानपुर विश्वविद्यालय को विश्व स्तर के पटल पर देखना जिसके लिए उन्होंने बहुत प्रयास किये थे।लेकिन कुछ राजनीतिक समस्याओं के चलते वह कार्य अधूरा रह गया। संस्थान को बेहतर बनाने का उनके अंदर जुनून सा था यहां भी केम्पस में लेट नाइट रुकते थे और काम करते थे देर रात भी आकर वह बिल्डिंग के स्ट्रक्चर के बारे में बताते थे।



उनकी सोच थी कि यूनिवर्सिटी को आईआईटी की तरह बनाया जाए। बड़ी सोच लेकर वह रिसर्च के लिए साल में वह 3 महीने अक्सर विदेश में ही रहते थे वह वहां भी बड़ी बड़ी पोजिशन में रहे। 4 बार के कार्यकाल में वे वीसी रहे इस यूनिवर्सिटी को बहुत ऊंचाइयों तक ले जाने का जो जुनून था वह कहीं न कहीं उन्हें अखरा उनके मन मे यह बात हमेशा रही कि एकेडमिक फेकल्टी जैसी वह चाहते थे वह यहां नही आ सकी और स्कॉलर प्लेसमेंट बेहतर करना चाहते थे ये दोनों बाते थी जो उनके मन मे थीं। जब डॉक्टर कटियार जी यूनिवर्सिटी की कमान संभाली थी तब यह यूनिवर्सिटी 2 करोड़ के घाटे में चलती थी लेकिन उन्होंने जिस तरह से यहां अपने सख्त फैसले और अनुशासन के बल पर कार्य किये यह उसी का नतीजा था कि उनके पास कार्य करने की ऐसी क्षमता थी कि जब वह यहां से गए उस वक्त इस यूनिवर्सिटी के पास 500 करोड़ का फंड था जो अपने आप मे बड़ी उपलब्धि थी उनका जुनून था कि इस विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में देखने का उनकी सेवाओ से प्रभावित होकर तत्कालीन सरकार ने उन्हें उच्च शिक्षा परिषद का चेयरमैन भी बनाया और उत्तर प्रदेश की यूनिवर्सिटियो के लिए काम भी किया।

आज उनके न होने पर हम सभी दुखी भी हैं सीनियर सिटीजन लोगो को अकेलापन हमेशा अखरता है यही शायद उन्होंने महसूस किया ऐसा नही होना चाहिए था। जितने भी कुलपति आये अब तक उनमें डॉक्टर कटियार का सर्वश्रेष्ठ योगदान था।

उच्च शिक्षा में सुधार के जनक रहे प्रो कटियार

डॉक्टर आरसी कटियार ने बताया कि उनका प्रो एसएस कटियार जी के वित्तीय दृष्टिकोण से  विश्वविद्यालय स्थापना में उनके सराहनीय योगदान रहे। जब कमान संभाली थी उस वक्त विवि में वित्तीय परेशानियां और कॉलेज का शैक्षणिक स्तर न के बराबर था ।उनकी दूरदर्शी नीतिय्यो के चलते वित्तीय नीति विवि को सुधर सकी। यहां उन्होंने 2300 स्व वित्तपोषित पाठ्यक्रम प्रारंभ शुरू, प्रवेश परीक्षाओं का आरंभ किया जहाँ पहले केवल प्रशासनिक भवन हुआ करता था




लेकिन उनकी नीतियों के चलते इस यूनिवर्सिटी की कायाकल्प हो गयी यहां कई शैक्षणिक संस्थान बने और उसमें भवन निर्मित हुए। जब कटियार जी ने विवि की कमान संभाली कक्षाओं की स्थिति और कोर्स की स्थित और न ही लैब्स थी जिसके बाद अपने कड़े फैसलों और अनुशासन के लिए जाने जाने वाले डॉक्टर कटियार ने विवि परिसर को सही मायने में विश्वविद्यालय बना दिया। उन्होंने यहां 50 से ज्यादा शैक्षणिक पाठ्यक्रमो का संचालन शुरू करवाया। इस विवि इंफ्रास्ट्रक्चर जो भी देखता है उसे विदेशी विश्वविद्यालयों जैसा प्रांगण लगता है। डॉक्टर कटियार को उच्च शिक्षा में सुधार के लिए भी जाना जाता रहा है डॉक्टर कटियार के अनुशासन और सख्त फैसलों से उन्होंने न केवल विश्वविद्यालय की छवि बदली बल्कि नए पाठ्यक्रम शुरू कर उच्चशिक्षा का स्तर और उठा दिया और आज यह विवि किसी नाम का मोहताज नही है देश भर में इस विवि छवि और अनुशासन पूरी तरह से बेहतर हो गया है। हम सभी उनके निधन से हतप्रभ है उनके किये गए कार्यो को यूनिवर्सिटी हमेशा फॉलो करेगा और जो वर्तमान कुलपति है डॉक्टर नीलिमा गुप्ता जी वह भी इस यूनिवर्सिटी के लिए अहम रोल अदा करेंगी।

मिली है ये उपब्धियाँ

कानपुर विश्वविद्यालय में बतौर कुलपति कार्यकाल 4 बार का रहा जिसमें 17 -9-1994 से 16-9-1994 को पहला,14-4-2000 से 25-7 -2003 को दूसरा,25-7-2003 से 25-7-2006 को तीसरा और 26-7-2006 से 30-8-2007 तक चौथा कार्यकाल शामिल है।
2003 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे कलाम ने उन्हें पद्मश्री प्रदान किया और उन्हें 2009 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के द्वारा उन्हें पद्म भूषण से नवाजा गया। द वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेज, न्यूयार्क एकेडमी ऑफ साइंसेज के फेलो रहे।टोक्यो यूनिवर्सिटी के विजिटिंग प्रोफेसर रहे। 1995 में प्रो बीएन घोष मेमोरियल अवार्ड मिला।।2001 में सोका अवार्ड, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अवार्ड ,विज्ञान गौरव अवार्ड ,आरसी मेहरोत्रा लाइफ़ टाइम अचीवमेंट अवार्ड भी से भी उन्हें नवाजा गया।

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