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Monday, 1 October 2018

फर्रुखाबाद-खेत की मिट्टी खनन माफियाओं के हाथ बेचनी पड़ सकती महंगी। जानिए क्यों




रिपोर्ट -पुनीत मिश्रा 

जिले में सदर एसडीएम ईशांत प्रताप सिंह जो कि अंडर ट्रेंनिग पर है।लेकिन उनको चार्ज एसडीएम का चार्ज मिला हुआ है।पूरे प्रदेश में अभी तक किसी जिले में इस प्रकार की कार्यवाही देखने को नही मिली है जिसकी शुरुआत उन्होंने फर्रुखाबाद से कर दी है।

सपा सरकार से लेकर भाजपा सरकार में भी अवैध खनन माफियाओं का ही राज दिखाई दे रहा है खनन अधिकारी आमदनी के चलते खनन माफियाओं से मिलकर मानक के विरुद्ध खनन करा रहे है।जिस कारण जिन खेतो में तीन फुट की गहराई तक खनन होना चाहिए था वहां पर पांच से आठ फुट तक मिट्टी खनन की गई है।जिसमे वरसात ले समय पानी भरने से कई लोगो की मौते भी हो चुकी है।उसको देखते हुए उन्होंने खेत की मिट्टी खनन माफियाओं को बेचने वाले खेत मालिको के खिलाफ 133 सीआरपीसी के तहत उनको नोटिस देकर कार्यवाही की जाएगी।

जिसमे नियम है की जो खेत मालिक मिट्टी का मानक के विपरीत खनन करायेगा वह उसमे मिट्टी भरबाकर बराबर करायेगा उसके साथ खनन के दौरान खराब हुए मार्ग की मरम्मत करवाएगा।यदि ऐसा खेत मालिक नही करता है तो उस खेत मालिक के ऊपर धारा 188 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कराकर कार्यवाही कराई जायेगी।एसडीएम ने बताया अभी तक तीन खेत मालिको को चिन्हित किया गया है उनके खिलाफ 1 33 की कार्यवाही की जा चुकी है सदर क्षेत्र में जहां जहां पर खनन हो रहा है उसकी चेकिंग कराई जा रही है।यदि मानक के अनुरूप नही मिला तो उनके खिलाफ भी कार्यवाही की जायेगी।यह कार्यवाही इसलिए कि जा रही है जिससे जब खनन माफियाओं के द्वारा खनन के लिए खेत लेंगे तो खेत मालिक खनन के समय वही पर मौजूद रहकर खनन करायेगा जिससे अधिक खनन नही हो सकेगा।


 मिट्टी खनन के मानक -मिट्टी खनन केवल एक घन मीटर होना चाहिए।खनन कराने से पहले परमिशन लेने के लिए जिस खेत मे खनन होगा उसके आस पास के खेत मालिको की सहमति जरूरी होती है।यदि पड़ोसी खेत मालिक सहमति पत्र नही देते है तो उस खेत मे खनन नही कराया जा सकता है।उनकी सहमति इसलिए जरूरी होती है।क्योंकि खनन से आस पास के खेतों में कोई नुकसान न हो सके।लेकिन जिले में विना सहमति के खनन अधिकारी परमिशन देते जा रहे है।देखना यह होगा कि एसडीएम की इस कार्यवाही से खनन माफियाओ पर कितना असर पड़ता है।

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