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Tuesday, 2 October 2018

गांधी जी की हत्या रहस्य इस पर रिसर्च और जांच होनी चाहिए- पूर्व प्रो ए के वर्मा

ब्यूरो कानपुर -रवि गुप्ता

कानपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर दयानन्द गर्ल्स पीजी कालेज में विशिष्ट वक्तव्य, भजन और पारितोषिक वितरण समारोह का समापन समारोह का आयोजन किया गया इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री सतीश महाना और अतिथि वक्ता के रूप में पूर्व विभागाध्यक्ष राजनीतिक विज्ञान विभाग के डॉक्टर ए के वर्मा ने शिरकत की। इस स्वच्छता पखवाड़े की शुरआत पिछले 15 दिनों से किया जा रहा था जिसको लेकर कई अभियान चलाए गए साथ ही कई प्रतियोगिता रखी गयी थी जहां छात्राओं को सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया।




इस शख्श ने दी राष्ट्रपिता की संज्ञा
 
गहरा राजनीतिक अध्ययन और राजनीति पर कई किताबें लिख चुके जिनके कई रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जर्नल में पब्लिश हो चुके हैं मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान विभाग डॉक्टर ए.के वर्मा ने गांधी जी के ऊपर कुछ खास बातों पर सम्बोधन व्यक्त किया जिसमें आज तक इतिहास में ही जाना गया हो लेकिन शायद ही उस पर विचार किया गया हो। उन्होंने कहा कि गांधी जी को राष्ट्रपिता किसने कहा था जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें राष्ट्रपिता उस शख्श ने कहा जिसकी खिलाफत गांधी जी ने की थी गांधी जी को 1939 में कांग्रेस के त्रिपुरी अधिवेशन में गांधी जी ने अपना कंडीडेट घोषित किया और गांधी जी ने कहा कि इनकी जीत हमारी जीत और इनकी हार हमारी हार है वहीं इनको चुनौती देते हुए सुभाष चन्द्र बोस ने कांग्रेस के अध्यक्ष का चुनाव लड़ा और गांधी जी के खिलाफ जीते भी लेकिन बोस जीते जरूर लेकिन उन्होंने अपना पद त्याग दिया उनका कहना था कि पद जरूर जीते लेकिन दिल नही जीत पाए तो उस वक्त ऐसी संस्क्रति थी। और जब द्वितीय महा विश्व युद्ध चल रहा था तब सिंगापुर की ज़मीन से एक रेडियो के प्रसारण में उन्होंने गांधी जी को राष्ट्रपिता की संज्ञा दी तबसे पूरा देश उन्हें राष्ट्रपिता के रूप में जानने लगा।







क्या गांधी जी की हत्या में और भी कोई शामिल था


उन्होंने गांधी जी के कुछ खास पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा गांधी जी पर एकाधिकार करने का दृष्टिकोण रखता था जो कि बिल्कुल गलत था जो कांग्रेस उन पर एकाधिकार करना चाहती है और भाजपा पर आरोप लगाती है कि भाजपा से ही सम्बंधित आरएसएस के एक सदस्य ने गांधी जी की हत्या की है।  जिस कांग्रेस की अगुआई गांधी जी ने की थी वह कांग्रेस एक स्वतंत्रता आंदोलन था उसमें देश के हर तबके की सहभागिता थी दरअसल गांधी जी कांग्रेस को पॉलिटिकल पार्टी बनाये जाने के पक्ष में नही थे जिसके चलते उन्होंने आजादी की रात हुए जश्न में भी हिस्सा नही लिया क्योंकि कांग्रेस यह कार्यक्रम पार्टी के रूप में मना रहे थे न कि आंदोलन के रूप में वह कांग्रेस का नाम लोक सेवक दल रखना चाहते थे

30 जनवरी 1948 को जब गांधी जी की हत्या हुई अगले दिन अखबारों की हेडलाइन्स थी कि गांधी जी को 2 से 4 गोली लगी है डॉक्यूमेंट्री एविडेन्स है कि गांधी जी की शाम 5 बजे प्रार्थना सभा शुरू होती थी यह रिकॉर्ड में है उनकी प्रार्थना सभा मे कभी भी वह लेट नही हुए उस दिन हाउस में पटेल और गांधी जी की मीटिंग चलती रही उस दिन महत्वपूर्ण मीटिंग 15 मिनट लेट हुए जिसमें संचालिका ने बताया कि टाइम ओवर हो गया है गांधी जी काफी नाराज भी हुए थे अपनी सभा मे पहुंचने में पहली बार वह लेट हुए आखिर पटेल और गांधी की वह मीटिंग में क्या था जिसमें इतिहास आज तक मौन है इतिहास ने हमें नही बताया कि क्योंकि न तो नेहरू न ही पटेल इस पक्ष में थे कि कांग्रेस को पुरी तरह से भंग और समाप्त कर दिया जाए और गांधी जी हत्या किसने की इसमें भी बड़ा रहस्य है वह तथ्य यह है कि जिस दिन हत्या हुई उसके अगले दिन अखबारों की हेडलाइन्स थी कि उन्हें 3 से 4 गोली लगी है सबसे बडी बात कि गांधी जी की कोई एफआईआर नही हुई और हुई भी तो फारसी में उनका पोस्टमॉर्टम भी नही हुआ जो असलहे पुलिस ने बरामद किए वह इटली की पॉइंट 9 बोर की 4 रिवाल्वर है और मारने वाला एक है और बरामद हुए 4 असलहे कैसे आज तक यह बात किसी को समझ नही आई कि उस दिन पटेल और गांन्धी जी के बीच क्या बात हुई वही स्थिति आज तक कोई नही जानता कि गोडसे के अलावा वहां क्या और कोई भी था गोडसे ने कन्फेस किया मेने प्रयोजन से मारा पहली दूसरी तीसरी गोली तो मालूम चलता है लेकिन चौथी गोली किसकी थी क्या पटेल और नेहरू की मीटिंग में क्या हो रहा था यह सब इतिहास बन कर रह गया यह सवाल कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करते है मुझे लगता है कि उनकी हत्या के मामले पर फिर से रिसर्च और जांच होना चाहिए।

इस मामले में जब केबिनेट मंत्री सतीश महाना से बात की गई तो उन्होंने इतने बड़े राष्ट्रीय मुद्दे पर ज्यादा कुछ न कहते हुए कहा कि प्रो वर्मा राजनीतिक शास्त्र के बड़े जानकार हैं इतिहासकार अपने अपने तथ्यों के आधार पर बातों को कहते है लेकिन इतने बड़े मुद्दे पर वह अपनी राय नही रख सकते बीजेपी का रुख बताने के लिए वह छोटे हैं।

ऐसे में प्रोफेसर वर्मा ने जो गम्भीर तथ्य गांधी जी से सम्बंधित उठाए है उन्हें नकारा तो नही जा सकता इस मुद्दे पर क्या कुछ बहस छिड़ती है कि आखिर गांधी जी को एक ने मारा है या और अन्य भी कोई है क्या इस पर दोबारा जाँच होगी ये तो पता नही।

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