फर्रुखाबाद में दरोगा की हत्या सवालों के घेरे में - तहकीकात न्यूज़ | Tahkikat News |National

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Friday, 5 October 2018

फर्रुखाबाद में दरोगा की हत्या सवालों के घेरे में



रिपोर्ट:-- पुनीत मिश्रा 

फर्रुखाबाद में दारोगा तारबाबू तरुण के खुदकशी करने में न्य मोड़ आ गया है उनका भाई ने भाई के खुदकशी पर संदेह जताते हुए उनकी हत्या किए जाने का आरोप लगाया। दारोगा तार बाबू तरुण गोलियां लगने के बाद शाहजहांपुर व फर्रुखाबाद जनपद की पुलिस के बीच घटनास्थल को लेकर हुए मतभेद में आधा घंटे तक मौके पर ही पड़े रहे। विवाद के समय वहां मौजूद लोगों का मानना है कि यदि समय से दारोगा को इलाज मिल जाता तो उनकी जान भी बच सकती थी। 

 फिरोजाबाद के थाना टूंडला के गांव नगला सोना निवासी दारोगा तारबाबू तरुण के खुदकशी करने में एसपी संतोष कुमार मिश्रा प्रथम दृष्टया जांच में पारिवारिक कलह मान रहे हैं। दारोगा तारबाबू तरुण के मोबाइल को पुलिस ने कब्जे में लेकर छानबीन शुरू कर दी है। जांच में घटना से पहले तीन नंबरों पर बात होने का पता चला है। पुलिस उन नंबरों की काल डिटेल खंगाल रही है। एसपी ने बताया कि जिन तीन नंबरों पर दारोगा की बात हुई, इनमें एक नंबर पर भूमि विवाद संबंधी बातचीत हुई थी। हालांकि इशारे में कहा कि तीन नंबरों पर हुई बातचीत में पारिवारिक कलह की बात भी सामने आई है। 


  देर रात दारोगा तारबाबू के तीन भाइयों ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर भाई की हत्या करने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की। आरोप है कि जब तारबाबू कानपुर में तैनात थे तो उन्होंने एक व्यक्ति का चालान किया था। इस पर उसने तारबाबू (भाई) से खुन्नस रखते उनका ट्रांसफर करने और जान से मारने की धमकी दी थी। उक्त बातें में मौत से पूर्व तारबाबू ने उनके साथ साझा की थीं, लेकिन कानपुर में तैनात पुलिस अफसरों ने मामले में कोई जांच नहीं की।

 
दारोगा तारबाबू के गोलियां मार लेने की सूचना साथी पुलिस कर्मियों ने सबसे पहले पुलिस लाइन में दी थी। वहां से अधिकारियों को अवगत कराया गया। मंत्री को रिसीब करने के लिए राजेपुर थानाध्यक्ष अंगद सिंह  भी निबिया मोड़ पर मौजूद थे। वह कुछ देर में ही मौके पर पहुंच गए। जनपद शाहजहांपुर के थाना अल्लाहगंज प्रभारी भी वहां आ गए थे, लेकिन दोनों थानों की पुलिस में घटनास्थल को लेकर मतभेद उभर आए। इस कारण आधा घंटे तक दारोगा तारबाबू मौके पर पड़े रहे। इसके बाद उन्हें पुलिस की जिप्सी में लिटाकर लोहिया अस्पताल लाया गया। वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। लोगों का मानना था कि यदि समय से इलाज मिल जाता तो उनकी जान भी बच सकती थी।


मृतक तारबाबू के जनपद जालौन में तैनात भाई दारोगा सोबरन सिंह  ने भाई के खुदकशी पर संदेह जताते हुए उनकी हत्या किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप है कि तारबाबू के सर्विस रिवाल्वर से तीन फायर हुए हैं। सभी के खोखे रिवाल्वर में फंसे मिले हैं। जबकि शव में सिर्फ हो ही गोलियों के ही निशान नजर आ रहे हैं। तीसरी गोली कहां आखिर कहां गई, यह संदेह पैदा कर रही है। उनका यह भी आरोप है कि जनपद कानपुर में तैनाती के दौरान भी भाई को विभागीय अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किया जाता रहा है।

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