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Monday, 8 October 2018

किसान का खेती से मन उचट रहा है, इसके गंभीर परिणाम होंगे- अखिलेश यादव

लखनऊ -महेंद्र मिश्रा ब्यूरो उत्तर प्रदेश

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि किसान बुरी तरह आंदोलित हैं। भाजपा के लिए अब उसके झूठे वादे ही गले की फांस बन रहे हैं। महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली और हरियाणा में किसान आंदोलन कर अपना आक्रोश व्यक्त कर चुके हैं किन्तु भाजपा सरकारें उनकी अनदेखी कर रही हैं। 50,000 किसान कर्ज के बोझ में अपनी जिंदगी गंवा चुके हैं। भाजपा की दोगली नीति और वोट बैंक की राजनीति कृषि प्रधान देश के लिए गंभीर संकट पैदा करने वाली है। 




भाजपा ने किसानों को कर्जमाफी के नाम पर धोखा दिया। आलू किसानों को कुछ नहीं मिला। गन्ना किसानों का पेराई सीजन शुरू होते ही बकाया भुगतान का वादा हवाई साबित हो रहा है। उत्तर प्रदेश के किसानों का अब भी 8220 करोड़ रूपए बकाया है। भाजपा सरकार ने किसानों के बजाय चीनी मिल मालिकों की मदद कर जाहिर कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता में अन्नदाता नहीं बड़े कारपोरेट घराने हैं। चीनी मिलों के लिए केन्द्र सरकार ने 4500 करोड़ रूपए के जिस रियायती ऋण देने की बात की है इसमें किसानों के हाथ कुछ नहीं लगना है।

 किसान हितैषी बनकर किसानों के साथ सबसे बड़ी धोखाधड़ी तो भाजपा ने रबी की फसलों के समर्थन मूल्य की घोषणा करके की है। किसानों की आंख में धूल झोंकने का यह कुत्सित प्रयास है। भाजपा ने मूल्य आयोगों की सिफारिशों को ठुकराकर पहले के तय मानकों से बहुत कम समर्थन मूल्य दिया है। इस समर्थन मूल्य पर किसानों के पूरे कृषि उत्पादों की खरीद भी सुनिश्चित नहीं की गई हैं। 

किसानों की आमदनी दुगनी करने के वादे का तो कुछ अता-पता ही नहीं है। उसकी कोई कार्य योजना भी अभी तक सामने नहीं आई है। भाजपा के उक्त दावे के विपरीत तथ्य यह है कि खाद, डीजल, बीज के दामों में भारी वृद्धि हो रही है। किसान की फसल लागत बढ़ती जा रही है और उसकी वास्तविक आमदनी घटती जा रही है। 




उत्तर प्रदेश में जब समाजवादी पार्टी का शासन था किसान को प्राथमिकता में रखकर 75 प्रतिशत धनराशि बजट में रखी गई थी। किसान को मुफ्त सिंचाई की सुविधा दी गई थी। उसको फसल बीमा योजना का लाभ मिला था। किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने का काम किया गया था। भाजपा की सरकारें अब तक अपनी एक भी योजना जमींनी स्तर पर नहीं उतार सकी है। किसान का खेती से मन उचट रहा है, इसके गंभीर परिणाम होंगे और अन्न का संकट पैदा हो सकता है। किसानों के मन में जो आक्रोश है उसका विस्फोट निश्चय ही चुनावों में होगा।

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