कानपुर देहात-20 सालों से घटते-घटते अब 2 फीट रह गई लंबाई - तहकीकात न्यूज़

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Saturday, 3 November 2018

कानपुर देहात-20 सालों से घटते-घटते अब 2 फीट रह गई लंबाई

 
रिपोर्ट-अरविन्द शर्मा                                            
20 सालों से घटते-घटते अब 2 फीट रह गई लंबाई, इस खतरनात बीमारी का शिकार हुई यह महिला, डॉक्टरों ने भी हाथ किये खड़े


कानपुर देहात-कभी हंसती खुशहाल जिंदगी आज उसके लिए बेजान सी हो गयी है। उसे क्या पता था कि कल को उसकी जिंदगी सिमटकर रह जायेगी। हम बात कर रहे हैं कानपुर देहात के अकबरपुर क्षेत्र धरऊ गांव की 52 वर्षीय शांती देवी की, जो आज लाचार बेबस होकर बिस्तर पर पड़े अपनी जिंदगी गुजार रही है। दरअसल शांती को एक ऐसी अजीब बीमारी ने जकड़ रखा है, जिसकी जानकारी चिकित्सकों को भी नही है। बताया जाता है कि ये बीमारी करोड़ों में किसी एक इंसान को होती है। इस बीमारी से ग्रसित होकर करीब 4 फुट की शांती आज दो फुट से भी कम लंबाई की हो गयी है। कानपुर से लेकर लखनऊ तक के जाने माने चिकित्सको को दिखाया गया लेकिन ये बीमारी चिकित्सकों के आपे से बाहर रही। इधर तमाम पैसे खर्च होने के बाद आर्थिक तंगी से आजिज होकर आज वह घर के एक कोने में पड़ी चारपाई पर जिंदगी बसर कर रही है। हालात ये हैं कि किसी कार्य के लिए वह स्वयं उठकर चल भी नही सकती है। खुद को बेबस महसूस कर रही लाचार महिला ने अपनी दास्तान पत्रिका संवाददाता से बयां की।

20 वर्षों से बिस्तर पर सिमटकर रह गयी जिंदगी

बताते चले कि शांती की हांथो में मेहंदी रचने के बाद वह खुशी खुशी इस घर में आई और अपने परिवार के साथ जीवन व्यतीत कर रही थी। शादी के 5 वर्ष तक खुशहाल परिवार में किलकारी मारने वाली खुशियां भी गूंज उठी। सबकुछ ठीक चल रहा था। अचानक बीमारी ने दस्तक दे दी और फिर उसके शरीर मे दर्द होने लगा। कई चिकित्सकों को दिखाया लेकिन कोई लाभ नहीं फिर अचानक उसकी लंबाई घटने लगी। आज वह दो फुट से भी कम लंबाई की हो गयी है और उसके हाँथ पैरों ने जवाब दे दिया है। वह चल फिर भी नही सकती है। 20 वर्षों से सिर्फ दूसरों पर आश्रित होकर रह गयी है।

आज आर्थिक तंगी से बिस्तर पर गुजार रही दिन

शांती देवी कहती हैं कि कभी जीवन में ये सोचा नही था कि अपने हंसते खेलते परिवार के लिए मैं व्यवधान बनकर रह जाऊँगी। परिवार वालों ने अच्छे डॉक्टरों को दिखाया लेकिन हालातों में कोई सुधार नही हुआ और धीरे धीरे लंबाई घटती चली गयी। इधर दर्द ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। देखा जाए तो आज आर्थिक तंगी के चलते इलाज के नाम पर वह कानपुर से लखनऊ तक ही सीमित रह गयी है और ये रंगीन दुनिया उसके लिए बेरंग हो चुकी है। क्योंकि उसे यम्मीद के नाम पर सिर्फ अंधकार दिखाई देने लगा है।

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