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Monday, 24 December 2018

गोरखपुर - कूड़े के ढेर में तब्दील होता मां तरकुलहा देवी मंदिर

ब्यूरो गोरखपुर - कृपा शंकर चौधरी


मां तरकुलहा देवी के नाम से विख्यात गोरखपुर शहर से 20 किलोमीटर दूर देवरिया जिले को जाने वाले मार्ग पर स्थित यह तीर्थ स्थल सरकार एवं स्थानीय मेला मालिक के उपेक्षा का शिकार हो गया है।
देश को अंग्रेजों से छुटकारा दिलाने वाले क्रांतिकारियों से जुड़ा यह मंदिर पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र है। यहां प्रतिमाह लगभग लाखों श्रद्धालु आते हैं एवं मेले में करोड़ों रूपए का विक्रय होता है इसके अलावा मंदिर के नाम पर लाखों रुपए का चढ़ावा भी चढ़ाया जाता है किन्तु सरकार एवं स्थानीय मेला मालिक के द्वारा उपेक्षित यह मंदिर कूड़े के ढेर में तब्दील हो गया है।
आजादी के पहले गोरखपुर के डुमरी रियासत के क्रांतिकारी बाबू बंधू सिंह की पूज्य स्थली तरकुलहा देवी मंदिर अब सरकार एवं स्थानीय मेला मालिक के उपेक्षा के कारण कूड़े के ढेर में तब्दील हो गई है । मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को काफी गंदगी का सामना करना पड़ता है किन्तु श्रद्धा के कारण उनका आना अनवरत जारी है । विचारणीय विषय यह है कि इस मंदिर के कारण हजारों लोगों को रोजगार मिला हुआ है और मेले से लगभग करोड़ों रुपए प्रति माह का विक्रय होता है किन्तु फिर भी मंदिर उपेक्षा का शिकार क्यो है ?
मां तरकुलहा देवी व्यापार मण्डल वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष पवन कुमार चौहान ने बताया कि मंदिर एवं अगल बगल की जमीन पर अबैध कब्ज़ा एवं केवल शोषण का ध्येय के कारण मेलें की यह स्थिति हो गई है। उन्होंने मेलें मालिक पर आरोप लगाया कि उनके कारण यह स्थिति बन गई है क्योंकि आय का 10 प्रतिशत भी यदि खर्च किया जाता तो मेला स्थल सुंदर हो जाता ।पवन कुमार चौहान ने बताया कि मेला मालिक का केवल पैसा कमाने का ध्येय बन गया है साथ ही साथ वह मंदिर के अगल बगल के जमीन को भी हड़पना चाहते हैं ।
इस संबंध में जब मेला मालिक ओमप्रकाश जायसवाल से बात की गई तो उन्होंने आरोप को बेबुनियाद बताया और कहा कि उक्त मामला अदालत के संज्ञान में है।

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