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Monday, 28 January 2019

भाजपा राज में शोर बहुत हुआ पर गंगा और यमुना निर्मल नहीं हुई - अखिलेश यादव

महेंद्र मिश्रा ब्यूरो उत्तर प्रदेश

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चौधरी ने बताया है कि संगम नगरी प्रयागराज में आस्था के सबसे बड़े मेले कुम्भ की सदियों पुरानी परम्परा है जो आज भी यथावत जारी है। प्रयागराज में अर्द्धकुम्भ की कई कहानियां हैं जिनमें सबसे ज्यादा चर्चित चीनी यात्री ह्वेसांग के संस्मरण हैं। ईसा के बाद की छठी शताब्दी में आए चीनी यात्री ने सम्राट हर्षवर्धन (590-647), कन्नौज जिनकी राजधानी थी उनके दान के बारे में लिखा है। वह 75 दिनों तक तब तक दान करते रहते थे जब तक कि उनके पास सब कुछ गरीबों, साधुओं और ब्राह्मणों में बंट न जाए। 
     
 
सदियां बीत गई। प्रयागराज में जमाने ने कई करवटें बदलीं। कन्नौज का एक और प्रतिनिधि  अखिलेश यादव कुम्भ की आस्था में डुबकी लगाने गत दिवस पहुंचे। पिछले कुम्भ की व्यवस्था भी तब अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्वकाल में समाजवादी सरकार ने की थी। वह कुम्भ भी इतना भव्य था कि विदेशी विद्वान उसकी पड़ताल करने आ गए थे। अखिलेश यादव ने कहा कि इसे सौभाग्य बोलें या भगवान की कृपा मानें। जो मेरा कार्य क्षेत्र है वह गंगा मइया के किनारे है और जहां जन्म लिया वह यमुना के किनारे है। 
     
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को जब आस्था-विश्वास और अध्यात्म के क्षेत्र में पहुंचे तो वे उसी भावभूमि में दिखाई दिए जिसमें हर रोज मानव समूह का रेला आता-जाता है और संगम में डुबकी लगाकर अपने तन-मन को स्वच्छ कर आत्मसंतुष्टि होकर दान-पुण्य कर घर लौटता है। कुछ ऐसी ही प्रेरणा गांधी को तब आजादी के आंदोलन की मिली थी जब वे प्रयागराज में ‘कुम्भ‘ के दौरान पहुंचे थे। वे आश्चर्य चकित थे कि इतना बड़ा समूह स्वतः स्फूर्त ढंग से कैसे एकत्र हो जाता है। अखिलेश यादव के साथ लखनऊ से पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र चौधरी और इन्द्रजीत सरोज भी संगम नगरी पहुंचे थे। संगमनगरी में पहुंचते ही यादव का स्वागत और उनके सम्मान में नारों की गूंज होने लगी। अखिलेश यादव पंचायती निरंजन अखाड़ा एवं अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महन्त नरेन्द्र गिरि जी महाराज तथा अन्य साधु संतो के साथ अखिलेश यादव सहजता से मिले। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच उन्होंने संतो का आशीर्वाद लिया। उन्होंने लेटे हुए श्री बड़े हनुमान जी के दर्शन किए। संगम नगरी में आकर बिना स्नान का पुण्यलाभ किए यादव कैसे जा सकते थे? अतः त्रिवेणी संगम के वीआईपी घाट पर उन्होंने दो बार गंगा यमुना में स्नान किया। सुरक्षा की दृष्टि से निरंजन निषाद एवं रंजीत निषाद गोताखोर मौजूद थे। 
     
 
अखिलेश यादव ने साथ वार्ता में अतीत और वर्तमान का अनोखा तालमेल बनाया। सम्राट हर्षवर्धन की दान महिमा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि इस मौके पर केन्द्र सरकार को अकबर के किले को उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग को दान कर देना चाहिए ताकि वहां स्थित अक्षयवट के सभी लोग दर्शन कर सके। जब दोनों सरकारें एक ही पार्टी भाजपा की है तो इसमें अड़चन कहां होगी? उन्होंने यह सलाह भी दी कि भाजपा को अर्द्ध कुम्भ के मौके पर कम से कम अपने अहंकार का त्याग तो अवश्य कर देना चाहिए। यादव ने नदियों की स्वच्छता पर बल देते हुए कहा कि उनकी सरकार में गोमती की सफाई हुई, रिवरफ्रंट का सौंदर्यीकरण किया गया। भाजपा राज में शोर बहुत हुआ पर गंगा और यमुना निर्मल नहीं हुई। भाजपा सरकार के मंत्रिमण्डल की बैठक प्रयागराज में होने का तभी कोई मतलब होगा जब झूठ बोलने का त्याग हो और सच बोलने का संकल्प लें। भाजपा सरकार ने क्या किया है इसे सच-सच बताये? 
 
भारत की सभ्यता की नींव नदियों के तटीय क्षेत्रों में पड़ी है। तीर्थ स्थलों का विकास भी वहां हुआ है। समाजवादी सरकार में काशी,अयोध्या,मथुरा और वाराणसी में घाटों का सौंदर्यीकरण हुआ। नई योजनाएं लागू हुई, जबकि भाजपा राज में घोषणाएं तो बहुत हुई पर जमींन पर एक भी साकार नहीं हो सकी। इसकी स्वीकारोक्ति स्वयं साधु-संतो ने प्रयागराज के अर्द्धकुम्भ के अवसर पर कही।

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