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आज का Tahkikat

Wednesday, 30 January 2019

हमीरपुर - बैल दौड़ प्रतियोगिता ..

रिपोर्ट - तुफ़ैल ताहा

तबाही जैसे हालत से जूझ रहे बुन्देलखण्ड के लोगों को मदद करने और किसानो को जागरूक करने के लिए तरह तरह के आयोजन किये जा रहे हैं, इस समय यहाँ के किसानो को अपना पेट भरने के लाले पडे हैं|ऐसे हालात में किसान अपने जानवरों को अन्ना छोड रहे हैं, जो बची कुची फसलों के लिए मुसीबत का सबब बन रहे हैं| यहाँ के किसानो को अपने जानवर अन्ना न छोड़ने के लिए कुछ समाज सेवियो ने बैल दौड प्रतियोगिता का आयोजन कर जानवरों के प्रति सहानभूति रखने का सन्देश दिया|बुंदेलखंड के ग्रामीण छेत्रो की इस अनोखी दौड़ में भाग लेने के लिए कई जिले के किसान अपने अपने बैलो और बैलगाड़ी के साथ सैकड़ो की संख्या में भाग लेते है .जो दौड़ रहे बैलगाडियों का हल्ला और ताली बजकर हौसला बढ़ते है इस समय किसान अपनी फसलो की बुआई कर चुके होते है और खाली समय का उपयोग इसी तरह के कर्यकर्मो को आयोजित करने में करते है. इस दौड़ में भाग लेने वाले किसान साल भर अपने बैलो को घी ,दूध ,किसमिस ,काजू खिला कर तैयार करते है कई चरणों में होने वाली इस प्रतियोगिता में विजेता को भरी भरकम इनाम दिया जाता है|
 
 
 
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में मौदहा कसबे में हर साल बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है ,जिसमे भाग लेने के लिए दूर - दूर से बैल गाड़ी वाले आते है बुन्देली संस्कृति में रची बसी यह बैल गाड़ी प्रतियोगिता देखने के लिए हजारों दर्शकों की भीड़ जुटती है ,जब बैल दौड़ते है तो दर्शक तालियाँ बजाते है और तमाम समर्थन में बैलों के आगे पीछे मोटर साईकिल दौड़ते रहते है|
बुंदेलखंड की संस्कृतिक विरासत संस्कृतिक आयोजन अपने आप ने बहूत अनोखे है चाहे वो यहाँ का प्रसिध दीवारी नृत्य हो या यहाँ का लोक गीत आहला देश में तरह तरह की दौड़ो और रेसो का आयोजन होता है.पर बुंदेलखंड की बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता अपने आप में अनोखी वा लाजबाब है|

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