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Friday, 18 January 2019

लखनऊ - शिक्षा व्यवस्था सुधार या समाधान ...........

लखनऊ - आरती तिवारी


देश में आज शिक्षा व्यवस्था को लेकर तमाम असमजय व असमानताये फैली है, हाल ही में कक्षा 6 से 8 तक की शिक्षा में परीक्षाये ना करायी जाने की बात उठी थी जिसे कोर्ट द्वारा निरस्त कर दिया गया इस प्रकार की कई व्यवस्था व आलोकनाओ का सामना करती आयी है शिक्षा |



आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार का प्रारूप 1854 ई० चार्ल्स वुड के घोषणा पत्र में मिलता है जिसमे पुरातन शिक्षा के प्रारूप को छोड़ पाश्चात्य शिक्षा को अपनाना था जिसमे भारत में अंग्रेजो को सरलता पूवर्क क्लर्क इंजीरिनियर डॉ व वकील मिल सके इस घोषणा से भारत के शिक्षा व्यवस्था पर एक महत्वपूर्ण परिवर्तन आया और भारत व्यवस्था को लेकर कई आयोग आये जिन्होंने प्राथमिक माध्यमिक व उच्च शिक्षा में कई अहम बदलाव किये जिसमे हंटर शिक्षा आयोग भारतीय विशविद्यालय अधिनियम 1904 सैडलर विशविद्यालय आयोग इकचैप आयोग हाटोर्ग समिति लिंडसे आयोग व साजेर्ट आयोग आये जिन्होने  सुधार के साथ कई विशविद्यालयो का निर्माण भी करवाया

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद शिक्षा के सुधार को लेकर समस्याये बनी रही जिसके फलस्वरुप कई आयोगो का गठन हुआ जिसमे राधाकृष्नन आयोग ( 1948-49 ई ०) कोठारी शिक्षा आयोग ( 1964-66 ई०) राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1968 ई० ) तथा नवीन शिक्षा को बढ़ाने व अन्य प्रमुख बदलाव कर इसे समाज के उथान हेतु अग्रणी माना |

कुछ इसी तरह देश में आज शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव की रूपरेखा बनी लेखक कहता है कि कोर्ट द्वारा दिया गया निर्देश सही तो है पर समाधान नहीं है क्योकि कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थीयो को शिक्षा लेने से ज्यादा समझने की जरूरत है कि शिक्षा का अर्थ मात्र नौकरी व्यवस्था या शिक्षा ग्रहण करना नहीं है बल्कि उसका तत्थ समझना जिससे विद्यार्थीयो में शिक्षा को लेकर रूचि बनी रहे ना कि बोझ |

समाधान यह है कि परीक्षाओं को अंको की जगह पॉइंट पर लेना जिससे विद्यार्थी को वार्षिक परीक्षा में फेल होने का डर ना हो पॉइंट को साल के हर एक परीक्षा में देना तथा उसको योग करके पास होने वाले अंको से निर्धारण करना और जो विद्यार्थी खेल नाटक व अन्य चीज़ो में रूचि लेता है उसे कुछ बोनस पॉइंट के रूप में रखना जिससे यदि परीक्षाओ में विद्यार्थी कुछ पॉइंट से रुकता पर रूचि लेने वाले कार्यक्रमों में अच्छा पॉइंट पाया है तो यह पॉइंट बोनस के रूप में उसे अगली कक्षा में प्रवेश दे देगा

विद्यार्थी मात्र शिक्षा पर आधारित ना हो वह उनके लिये गये रूचि के कार्यो पर भी आधारित हो सकता है लेखक इन्ही शब्दो के साथ विराम देता है |








   

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