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Saturday, 16 February 2019

कन्नौज में शहीद के घर पहुंचे अखिलेश यादव ने कहा कि



रिपोर्ट मोबीन मन्सुरी

कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में यूपी के कन्नौज जिले का लाल इंदरगढ़ के सुखसेनपुर निवासी जवान प्रदीप सिंह यादव शहीद हो गया।  वह उस बटालियन में शामिल थे, जिसे आंतकियों ने निशाना बनाया। रात में यह खबर आई तो परिजनों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। जिले में शोक की लहर दौड़ गई।

थाना इंदरगढ़ के अजान-सुखसेनपुर निवासी प्रदीप सिंह यादव सीआरपीएफ में थे। गुरुवार को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में साथियों के साथ प्रदीप भी शहीद हो गए। शहादत की खबर से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। गांव में भी मातम का माहौल है। एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने प्रदीप की शहादत की पुष्टि की है।
प्रदीप सिंह यादव श्रीनगर में 115 बटालियन में सिपाही थे। चार दिन पहले छुट्टी गुजार कर लौटे थे। एक मकान कानपुर के बारा सिरोही में है। वहां पत्नी नीरज देवी और दो बेटियां 10 वर्षीय सुप्रिया यादव और ढाई साल की सोना यादव हैं। 10 फरवरी को परिवार से विदा होकर वह जम्मू रवाना हुए थे। 11 जनवरी को वह जम्मू पहुंचे।


तमाम लोगो से सवाल कर सकते हो और जब फिल्म देखी जा रही थी उरीमंत्री देख रहे थे और मुख्यमंत्री देख रहे थे। और सर्जिकल स्ट्राइक को एक जश्न के रूप में मनाया जा रहा था।  अगर सर्जिकल स्ट्राइक का आप लाभ लेना चाहते हैं।  तो आपको यह भी बताना पड़ेगा की इतने सरे जवानों की जान कैसे चली गई।  और वो चूक क्या हुई जिसके कारन वो गाडी इतने बड़े विस्फोटक को लेकर गाडी टकरा गई और फिर कैसी डिजिटल इंडिया है। जो आतंक वादी था उसने अपना वीडियो बनाया। वीडियो बनाकर वीडियो दाल दिया। आखिर कार हमारी इंटेलिजेंस क्या कर रही थी।  अगर वीडियो अपलोड हुआ है तो शायद सरकार को यह पता होगा। कि वह अपलोड किस समय पर हुआ है।  लेकिन यह समय राजनीती करने का नहीं है।    

ऐसी घटना जिसकी जितनी भी निन्दा की जाये वह कम है हमारे जो जवान अपनी छट्टी से जा रहे थे तो अचानक इतनी गम्भीर घटना हुई जिसमें बड़े पैमाने पर लोगों की जान चली गयी। ऐसे धरती माॅ के सपूत हमारे जिन्हे सीमा की सुरक्षा और हम सबकी सुरक्षा करने की जिम्मेदारी थी उन्हें अगर मौका मिल जाता अगर उन्हे थोड़ा भी मौका मिल जाता तो शायद यह घटना नही होती वह आतंकवादियों से मुकाबला कर लेते लेकिन कहीं न कहीं यह बड़ी चूक है। जहाॅ सड़क पर इतना बड़ा मूमेन्ट हो, जहाॅ मूमेन्ट इतना बड़ा जवानों का चल रहा हो। वहाॅं पर सुरक्षा के जो इन्तजाम जो उन्हें चाहिए थे वह पर्याप्त नही थे जिनको सुरक्षा की जिम्मेदारी है वही दुर्भाग्य से इस घटना में उन्हीं लोगांे की जान चली गयी। यह इधर वर्षाें में कभी ऐसी बड़ी घटना नही हुई जिसमें इतने जवानों की जान चली गयी हो जो हम लोगांे ने खोया है धरती माॅ का सपूत जरूर एक सेना का या सीआरपीएस का जवान हमने खोया है लेकिन एक परिवार का बेटा भी हमने खोया है। किसान ने अपना बेटा एक खोया है और बेटियां दो बेटियां है एक छोटी बेटी है। बड़ी बेटी तो समझदार है लेकिन छोटी बेटी नही समझ पा रही होगी कि क्या हुआ होगा। पूरा परिवार दुखी है इस दुख में हम भी सामिल है पूरा देश यह जनता सामिल है। 

हमारे वीर जवानों की जान न जायें। यह दुर्घटना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। मै भरोसा दिलाता हॅूं इस परिवार को कि जो मदद हो सकेगी हम करेंगे। इस परिवार के दुख के हम सभी इनके साथ है और देश के जितने भी जवान गये हैं पूरे के पूरे देश की जनता उन जवानों के साथ है। अभी तो वह इतने दुख में है कि वह मांग भी नही कर पा रहे है। लेकिन वहीं उनके परिवार के सदस्यों की चिन्ता तो है कि भविष्य मे क्या होगा। वह अपने बच्चों का भविष्य अच्छा बनाना चाहते होंगे और इसी कारण वह कानपुर में रहकर बच्चों की पढ़ाई कराना चाहते अब उनके सामने यह जरूर है कि जिम्मेदारी कौन निभायेगा। एक बेटी अच्छे स्कूल में पढ़ रही है। उसकी पढ़ाई पूरी हो उसका भविष्य बेहतर हो यही हम लोग कामना कर सकते है और उसकी पढ़ाई में उसके भविष्य में जो बनना चाहेंगे उसमे रूकावट न आये यह हमसबकी जिम्मेदारी है। 

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