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Tuesday, 4 June 2019

कानपुर - जानिए वट वृक्ष की पूजन का महत्व


 
ब्यूरो कानपुर रवि गुप्ता

कानपुर में सुहागन महिलाओ ने पति की लंबी आयु के लिए वट वृक्ष की पूजा कर व्रत रखा ।इस दौरान महिलाओ ने बरगद के पेड़ की पूजा कर भगवान से अपने पति की दीर्घायु की कामना करी। ज्येष्ठ माह की अमावस्या को वट सावित्री व्रत के पूजन का विधान है। इस दिन महिलाएँ अपने सुखद वैवाहिक जीवन की कामना से वटवृक्ष की पूजा-अर्चना कर व्रत करती हैं। वट सावित्री व्रत में 'वट' और 'सावित्री' दोनों का विशेष महत्व माना गया है। वट बरगद वृक्ष का महत्व इस संसार में अनेक प्रकार के वृक्ष है उनमे से बरगद के पेड़ का भी विशेष महत्व है।'वट मूले तोपवासा' ऐसा कहा गया है। वट वृक्ष तो दीर्घायु और अमरत्व का प्रतीक है। पुराण के अनुसार बरगद में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का निवास होता है। मान्यता है कि इस वृक्ष के नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा आदि सुनने से मनोवांक्षित फल की प्राप्ति होती है। वट वृक्ष अपनी विशालता तथा दीर्घायु के लिए लोक में प्रसिद्ध होने से सुहागन महिलाएं वटवृक्ष की पूजा अपने पति के दीर्घायु होने की कामना के लिए करती है जिससे वट की तरह ही उनका पति भी दीर्घायु और विशाल बनी रहे। कहते है कि जब यमराज ने सावित्री के पति सत्यवान के प्राण का हरण किये था ।तब सावित्री और यमराज तीन दिन तक शास्त्रार्थ किया था। जिसके बाद प्रसन्न होकर यमराज ने सावित्री के पति को पुनर्जीवित कर दिया था।मान्यता है कि वट वृक्ष केे नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा कहने और सुनने से मनोकामना पूरी होती है।

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