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Saturday, 16 November 2019

प्राउटिष्ट सर्व समाज द्वारा आर्थिक लोकतंत्र हेतु व्यवस्था परिवर्तन का शंखनाद


कृपा शंकर चौधरी 

    प्राचीन-विस्तीर्ण भारतवर्ष की प्रथम राजधानी पटना के ऐतिहासिक गाँधी मैदान से भारत के सभी प्रांतों से आए कृषकों, युवकों, बुद्धिजीवियों, महिलाओं, विद्यार्थियों, श्रमिकों की एक बड़ी जनसभा के समक्ष संबोधन करते हुए आज दिनांक 15 नवंबर 2019 को प्राउटिष्ट सर्व समाज (पार्टी) ने व्यवस्था परिवर्तन हेतु आवाज बुलंद करने का उद्घोष किया। मुख्य  वक्ताओं में पी.एस.एस. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह एवं राष्ट्रीय महासचिव श्री सुशील रंजन ने कहा कि साम्यवाद का समय कब का जा चुका है, और पूँजीवाद पूरे विश्व में अपनी आखिरी साँसें गिन रहा है जिस पर आस लगाए बैठना देश के लिए बड़ा धोखा होगा; समय की बर्बादी भी होगी। उन्होंने आह्वान किया कि देश के विद्यार्थियों, युवाओं, बुद्धिजीवियों को बिना समय नष्ट किए प्रगतिशील उपयोग तत्व (प्रउत) के अर्थनैतिक सिद्धांतों पर विचार विमर्श आरंभ कर देना चाहिए। भारत वर्ष के मानवीय हितों का भविष्य मात्र प्रउत में ही संरक्षित है। प्रउत व्यवस्था में निहित है समृद्धि की एक नई दुनियाँ जिससे देश में राजनीति-मुक्त दल-विहीन अर्थनैतिक लोकतंत्र (Partyless Economic Democracy ) की स्थापना होगी। राजनीति का विभाजनकारी व शोषणकारी स्वरूप आज विश्व स्तर पर सर्वत्र विवादित हो चुका है।

 आजादी के समय राजनीतिक मनसूबों की तृप्ति हेतु समाजनीति का परित्याग करना बहुत ही बड़ी भूल हुई है, जिस कारण व्यवस्था परिवर्तन का समय आ चुका है। भारत की सभ्यता समाज की नींव पर खड़ी है; राजनीति दास बनाए, समाजनीति आस जगाए। प्रउत अर्थनैतिक लोकतंत्र की एक झलक;

 १. प्रत्येक नागरिक (परिवार के प्रत्येक सदस्य, नारी-पुरुष) को प्रखंड स्तर पर शत्-प्रतिशत रोजगार की गारंटी द्वारा यथेष्ट आय-अर्जन की व्यवस्था;

 २. प्रत्येक छात्र को उच्चतम स्तर तक की नि:शुल्क पढ़ाई की व्यवस्था;

 ३. युवकों/युवतियों के लिए पढ़ाई समाप्ति होते ही रोजगार की व्यवस्था;

४. प्रत्येक नागरिक के लिए हर प्रकार की चिकित्सा की नि:शुल्क व्यवस्था;
५. सभी वर्ग के नागरिकों की सभी आय पूर्णत: कर मुक्त (income tax free) रखने की व्यवस्था;
६. सहभागिता के द्वारा प्रत्येक नागरिक के लिए स्थानीय बैंक में खाता व्यवस्था;
 ७. कृषि को पूर्ण उद्योग का दर्जा; कृषि के सभी उत्पादों से उपभोक्ता सामग्री बनाने के सारे उत्पादन उद्योग व उत्पादों के बाजारीकरण का दायित्व ग्राम-पंचायतों का;
८. विभाजनकारी राजनीतिक दल-दल से समाज को मुक्ति;
 ९. अर्थव्यवस्था का संपूर्ण विकेंद्रीकरण, बैंकों का पुनर्गठन, निजी बैंक पूर्णत: समाप्त;
१०. श्रमिक वर्ग की पूर्ण मुक्ति, रोजगार के द्वारा सबों को मालिकाना हक की व्यवस्था;
११.मातृभाषा व संस्कृति के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन किया जाएगा;
१२. प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण स्थानीय दोहन से मेधा के पलायन की आवश्यकता नहीं;
१३. हर स्तर पर नैतिकवान व चरित्रवान नेतृत्व का उदय होगा;
१४. प्रखंड स्तर पर उच्च शिक्षा एवं पूर्ण नि:शुल्क चिकित्सा की सुविधा होगी;
 १५. पारिवारिक-सांस्कृतिक जीवन को समृद्ध करने हेतु दैनिक काम के घंटे को कम किया जाएगा;
१६. सांस्कृतिक विकास से ग्रामीण/शहरी जीवन आनंदमय होगा.......

        जनसभा को पी.एस.एस. की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों सहित राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री रणधीर देव, बिहार के राज्य प्रभारी श्री ध्रुवनारायण एवं महिला समाजों की नेताओं ने भी संबोधित किया। अध्यक्षता श्री प्रद्युम्न नारायण सिंह ने की तथा मंच संचालन पी.एस.एस. के राष्ट्रीय जन संपर्क सचिव श्री विजय प्रभात ने किया।
                              


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