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Tuesday, 14 April 2020

शराब की दुकानें खुली तो बढे़गा अपराध का ग्राफ

कृृृपा शंकर चौधरी गोरखपुर ब्यूरो


कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के मद्देनजर पूरा देश लाँकडाऊन है । आमजन के आवश्यकता की वस्तुओं की दुकानें नहीं खुल पा रही है। किसानों को खेती संवंधित औजार मिलने मे असुविधा हो रही है। बच्चे शिक्षा संवंधित सामग्री से बंचित है। किन्तु इन सब से भी आवश्यक शराब की दुकान खोलने की कुछ मंत्री लोगों द्वारा पैरवी करने की खबर है। उनके द्वारा सफाई मे देश का नुकसान होना बताया जा रहा है किंतु इन्हें कौन समझाए कि बिना पीए व्यक्ति को समझाने में पुलिस को मसक्कत करनी पड रही है तो पीकर लोग कितना शोसल डिस्टेंस का पालन करेंगे। 

शुत्रो का मानना है कि लखनऊ मंत्रीपरिषद की बैठक मे शराब की दुकानों को खोलने पर चर्चा हुई है और दुकानें खोलने के पक्ष मे अधिकाशतः मंत्रियों ने समर्थन किया है। मंत्रियों का मानना है कि राजस्व बढोत्तरी के लिए यह कदम आवश्यक है  और इतना ही नहीं कुछ मंत्री तो लाँकडाऊन के दौरान डोर स्टेप डिलीवरी के पक्ष मे भी है। बताया गया यह कदम रोजाना 100 करोड़ के नुकसान को देखते हुए लिया गया और शोसल डिस्टेंस का पालन करते हुए प्रारंभ किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के द्वारा लगाया जाएगा। माना जा रहा है की इस सिफारिश को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के द्वारा आज योगी आदित्यनाथ को शौपा जाएगा।
प्रदेश के मुखिया को आखरी फैसला लेने से पहले विचार करना होगा कि वास्तव मे क्या शराब की दुकान आवश्यक श्रेणी मे है । क्या इसके खुलने से लाँकडाऊन का पालन सही ढंग से चल सकेगा ? कही ऐसा न हो कि दुकानें खुलने से अपराध का ग्राफ बढऩे लगे और पहले से परेशान पुलिस प्रशासन को अतिरिक्त और अनावश्यक बोझ से गुजरना पड़े।

बढ़ सकता है अपराध का ग्राफ

आम दिनों मे अपराध और दुर्घटना के लिए अधिकाशतः शराब की भी भूमिका मानी गई है विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका सेवन एक मात्रा तक ठीक है किन्तु लत लगे व्यक्ति के लिए इसकी जरूरत कुछ भी करा सकती है। चुकी लाँकडाऊन के स्थिति में सबकुछ बन्द के कारण रोजगार पर भी असर पडा है। मजदूर काम के अभाव मे पैसारहित हो गया है। जानकारो के अपने बिचार है कि रोजगार के साधन न खुलने और शराब की दुकानें खुलने से अपराध बढ सकते है।

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