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Sunday, 3 May 2020

असमंजस : घर वापसी को मजदूर परेशान, जानिए सरकार की रणनीति

कृपा शंकर चौधरी

सरकार मजदूरों के साथ या मजदूर सरकार के साथ

कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के मद्देनजर सरकार द्वारा देश में संपूर्ण लाँकडाऊन लाया गया।सरकार के इस फैसले को विपक्षी दलों के अलावा देश के जनता ने स्वीकार किया। किंतु दूसरे लाँकडाऊन और तीसरे लाकडाऊन की घोषणा के बाद दूर देश में फसे मजदूरों की हिम्मत अब डोलने लगी हैं। देश के अलग अलग हिस्सों से लोगों द्वारा परेशानी बताते हुए घर वापसी की आवाज उठने लगी है। आवाज उठने की इस प्रक्रिया के पीछे सरकार पर लोगों का विश्वास कम होने को माना जा सकता है। 
दरअसल लाँकडाऊन के समय सरकार द्वारा जनता को भरोसा दिया गया कि सरकार उनका ख्याल रखेगी। आगे बढते हुए सरकार द्वारा पहल भी किया गया। सरकार के इस पहल के साथ जनता ने भी कदम से कदम मिला कर चलने का प्रयास किया।किन्तु लम्बा समय होने से अब जनता की हिम्मत जबाब देती नजर आ रही है। देश के अलग अलग हिस्सों से घर वापसी की आवाज उठने के पीछे सरकार की विफलता को भी माना जा सकता है। क्योंकि अभी तक सरकार द्वारा लोगों को रोककर रखने की प्रशंसा ली जा रही थी किंतु सच्चाई यह भी है कि अभी तक लोगों ने अपने बलबूते रूकते हुए सरकार का साथ दिया। इस बात को कहंने का आसय उन आवाज़ उठाने वाले मजदूरों से है जो किसी ठेकेदार के अंतर्गत काम करनेवाले मजदूर रहे हैं। देश के तमाम क्षेत्रों मे ठेकेदारों द्वारा अपने क्षेत्र के मजदूर ले जाकर काम कराया जाता हैं। सच्चाई यह भी है कि अबतक अधिकाशतः मजदूर अपने उन ठेकेदारों के रहमोकरम पर खा पी कर अपने देश का साथ दे रहे थे। किन्तु कब तक ,अब ठेकेदार की भी हिम्मत बोल गई और अब असहाय मजदूरों को अपना घर दिखाई दे रहा है।नतीजा यह है कि हजारों कीलोमीटर की दूरी भी इनके द्वारा पैदल नापने का विचार बना लिया गया। मजदूरों के बढते जनाक्रोश को देखते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा उनके लिए योजना की बात कही जा रही है किंतु वह योजनाएं भी समझ से परे हो गई है। मजदूरों के घर वापसी के लिए राज्य सरकार द्वारा तमाम फोन नंबर ,रजिस्ट्रेशन पोर्टल आदि की बातें समाचार पत्रों एवं समाचार चैनलों के माध्यम से बताया गया। किन्तु अधिकाशतः फोन नंबर से संपर्क न होने की शिकायत मिल रही हैं। कुलमिलाकर मजदूर परेशान हैं कि घर वापसी कैसे होगी। 
कई राज्य सरकारों द्वारा अपने प्रदेश के मजदूरों को घर वापसी के लिए बस ,ट्रेन चलवाने की भी खबर है किंतु किराया वसूलने को लेकर विपक्ष और मजदूर दोनों आवाज उठाने लगें है। आवाज उठाना भी जायज ठहराया जा सकता है क्योंकि महीनों से बिना किसी काम के बैठे मजदूर से किराया वसूलना खून चूसने जैसा कृत्य माना जा सकता है। जिन मजदूरों के पास पैसे नहीं है वे परेशान हैं कि उनका क्या होगा।
घर वापसी चाहने वाले मजदूरों मे भी  सरकार द्वारा स्पष्ट दिशानिर्देश न दे पाने से कैसे वापसी को लेकर संशय बना हुआ है। मजदूर परेशान हैं कि कैसे रजिस्ट्रेशन होगा और कैसे हम घर पहुचेंगे।
घर वापसी और रजिस्ट्रेशन के लिए सरकार की नीति
जानकारों द्वारा बताया गया कि सरकार प्रवासी मजदूरों के घर वापसी के लिए दो रणनीति के साथ काम कर रही है। पहले रणनीति के अंतर्गत मूल निवास क्षेत्र मे लेखपाल के माध्यम से अन्य प्रदेशों में रहने वाले लोगों की सूचना फोन नंबर के साथ मांगी गई है । दूसरे रणनीति के तहत सरकार द्वारा अन्य प्रदेशों मे नोडल अधिकारी न्यूक्त किए गए हैं जिनसे मजदूर संपर्क कर अपना नाम दे सकते है।
अंत में मजदूरों की दशा देख कहा जा सकता है कि सरकार द्वारा नीति तो बनाए गए किंतु उसके क्रियान्वयन में कमी के कारण लाखो मजदूर परेशानियों कि सामना करने पर मजबूर हैं। सरकार को मजदूरों की स्थिति देखते हुए उनके हितार्थ नीति बनाने की आवश्यकता है।

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