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Thursday, 28 May 2020

अखिलेश यादव ने कसा तंज "जब रोम जल रहा था, सम्राट नीरो बंशी बजा रहा था"

लखनऊ ब्यूरो

अखिलेश यादव ने कसा तंज "जब रोम जल रहा था, सम्राट नीरो बंशी बजा रहा था"

लखनऊ । समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि कहते है जब रोम जल रहा था, सम्राट नीरो बंशी बजा रहा था। भाजपा नेतृत्व और उसकी सरकारें इसे ही दुहराने जा रही हैं। भाजपा 30 मई को केन्द्र सरकार का एक साल पूरा होने पर अपनी उपलब्धियों का प्रचार कर वाहवाही लूटने की तैयारी में जुट गई है। देश-प्रदेश में इसके लिए भव्य आयोजन होंगे। यह असमय जश्न तब मनेगा जब एक ओर कोरोना महामारी से मौतें हो रही हैं और भूखे प्यासे श्रमिक भटक रहे है। उत्तर प्रदेश में अपराधियों का जंगलराज चल रहा है। सत्ता की हनक में निर्दोषों का उत्पीड़न हो रहा है। रोटी-रोजगार के धंधे बंद हैं। किसान, नौजवान और व्यापारी सब हताशा में हैं। उनकी परेशानियों पर भाजपा को जश्न मनाते कोई लोकलाज नहीं है।
     30 मई को भाजपा द्वारा प्रत्तावित जश्न मनाने वालों के लिए यह शायद बड़ी उपलब्धि या गर्व का विषय है कि देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या डेढ़ लाख का आंकड़ा पार कर गई है। हम इस महामारी के शिकार शीर्ष के देशों में आ गए है। अस्पतालों में, क्वाॅरंटाइन सेन्टरों में बदइंतजामी और भूखे-प्यासे श्रमिकों का पलायन जारी है। कामगार बे-मौत मारे जा रहे हैं। रेलवे स्टेशन पर मृत पड़ी मां को जगाते हुए एक मासूम बच्चे की तस्वीर विचलित करती है।
     भाजपा सरकार अपने झूठ और थोथे वादों से जनता को कब तक भटकाएगी? खुद 10 पैकेट बांटते हुए फोटों छपवाने वाले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने बताया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने 24 करोड़ से ज्यादा लोगों को राशन दिया तो केन्द्रीय वित्तमंत्री ने 80 करोड़ परिवारों को मदद का दावा कर दिया। अब ये आंकड़े सच्चे हैं तो झूठा कौन? क्या भूख से बेहाल श्रमिक, नंगे पैर तपती धरती पर दौड़ती महिलाएं और बच्चे?
     पूरा देश बीमारी से त्रस्त है। हर तरफ मौत का मंजर दिख रहा है। सड़क पर, ट्रेन में, शहर में, गांव में हर जगह हालात एक जैसे हैं। समाज का हर तबका परेशान है, निराश है। गरीब भुखमरी का शिकार हो चुका है। मजदूर बेरोजगार हो गया है। देश पूरी तरह से ठप पड़ा है। अर्थव्यवस्था का तो पता ही नहीं है कहां है?
     प्रधानमंत्री  के कथनानुसार भाजपा आपदा में भी अवसर तलाशती है। और उसने सरकार के दूसरे शपथ ग्रहण के दिन को जश्न के अवसर के रूप में तलाश लिया है। पूरा देश बेहाल है। संकट के ऐसे समय में जब सत्ता के शीर्ष से देश को भरोसा दिलाने की जरूरत है तब जिम्मेदार लोग दिशाहीन हो चुके हैं।
      उन्हें जनता के सुख दुख से मतलब नहीं है भाजपा को तो बस सत्ता  के सिंहासन से ही वास्ता है। देश को आगे ले जाने वाले और विकास करने वाले तमाम संस्थान बर्बाद हो चुके हैं अब सवाल यह उठता है, क्या भाजपा देश की बर्बादी का जश्न मना रही हैं? देश की जनता ऐसे लोगों को कभी माफ नहीं करेगी और समय आने पर इनका हिसाब किताब लेगी।
                                       

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