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Friday, 26 June 2020

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने किया वर्चुअल संवाद का आयोजन किया

कैलाश सिंह विकाश

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने किया वर्चुअल संवाद  का आयोजन किया

वाराणसी।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अपने स्थापना काल से ही विद्यार्थी हितार्थ कार्य करता अा रहा है, इसी क्रम में आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद काशी प्रांत द्वारा "शैक्षणिक सत्र 2019 20 के परीक्षाओं के संदर्भ में"  वर्चुअल संवाद  का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य  वक्ता अा. राहुल वाल्मीकि जी (राष्ट्रीय मंत्री, अभाविप) रहें ।
राहुल जी ने कहा कि- "वैश्विक महामारी कोरोना मैं संपूर्ण विश्व को अपने गर्त में लिया है । इससे विश्व की अर्थव्यवस्था, सामान्य जन-जीवन के साथ-साथ समाज के सभी क्षेत्र को प्रभावित हुए हैं। इस महामारी ने शिक्षा को भी पूर्ण रूप से प्रभावित किया है साथ ही विद्यार्थियों का भविष्य विशेष रूप से प्रभावित हुआ है।भारत में जब कोरोना ने अपनी रफ्तार पकड़ी तो शिक्षा की दृष्टि से वह समय छात्रों के वर्षभर की गई मेहनत को परखने का समय था, लेकिन इस महामारी के कारण विद्यार्थियों की परीक्षा संभव नहीं हो सकी है एवं असमंजस की स्थिति बनी हुई है, इस कारण छात्र मानसिक दबाव व कई कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का मत है कि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण जब तक जन-जीवन सामान्य नहीं हो जाता अथवा इस महामारी का कोई हल नहीं निकलता है, तब तक परीक्षाएं नहीं करानी जानी चाहिए व अगले सत्र में टाइम मैनेजमेंट करके अनियमित सत्र को नियमित किया जाए ऐसा पूर्व में भी कई संस्थाओं के द्वारा किया जा चुका है। इन परिस्थितियों में सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए प्रति वर्ष की भांति परंपरागत परीक्षा प्रणाली के स्थान पर विद्यार्थियों की सुविधा अनुसार विभिन्न विकल्पों को चुनने की सुविधा प्रदान की जाए।
1. विद्यार्थियों को ऑनलाइन परीक्षा की सुविधा दी जाए जो पारंपरिक ऑनलाइन परीक्षा के बजाय किसी ऐप के द्वारा या विद्यार्थियों के मोबाइल पर बहुविकल्पीय परीक्षा के माध्यम से करवाई जा सकती है, इस परीक्षा को कम प्रश्नों और कम समय के आधार पर संपादित कराया जाएगा ।
2. छात्रों से असाइनमेंट बनवाकर उनको मेल या व्हाट्सएप, गूगल फॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन ही मूल्यांकन किया जाए।
3. उत्तर प्रदेश के जिन विश्वविद्यालयों में वार्षिक परीक्षा करवाई जाती है उनमें अभी तक 40-70% परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं, परीक्षा दे चुके छात्रों के पेपर का मूल्यांकन करने के बाद, उन्हीं के आधार पर औसत निकाल कर परीक्षाफल बनाया जाए।
4. प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्रों को स्पेशल कैरी ओवर की सुविधा प्रदान की जाए। इस सुविधा का उपयोग छात्रों को उनकी डिग्री पूरी होने तक करने दिया जाना चाहिए।
5. विद्यार्थियों से ऑनलाइन वाईवा भी लिया जा सकता है। जिन क्षेत्रों में नेटवर्क की सुविधा सुचारू रूप से है वहां वीडियो अन्यथा टेलिफोनिक इंटरव्यू भी कराया जा सकता है।
6. परीक्षाफल में सेशनल और इंटरनल परीक्षा के अंकों को आधार माना जा सकता है।
7. परंपरागत परीक्षा प्रणाली में एक विषय के कई पेपर विश्वविद्यालयों के द्वारा कराए जाते हैं लेकिन इस विशेष परिस्थिति को देखते हुए "एक विषय- एक पेपर" की प्रणाली को अपनाया जा सकता है।
8. इस महामारी से लोगों के व्यवसाय, रोजगार प्रभावित हुए हैं। जिससे अगले सत्र में विद्यार्थियों को शुल्क जमा करने में कठिनाई आएगी इसलिए अभाविप उत्तर प्रदेश सरकार से आग्रह करती है कि अगले सत्र में विद्यार्थियों से अन्य मदों पर किसी भी तरह की फीस को ना लिया जाए और ट्यूशन फीस को लेकर आर्थिक बोझ ना पड़े इसका उपाय सरकार को करना चाहिए ।
9. जिन परीक्षाओं में ग्रेड मिलता है ऐसे विषयों के विद्यार्थियों को भी स्पेशल कैरी ओवर दिया जाए वह बाद में इन की परीक्षाएं संपन्न कराई जाए।
10. जो छात्र अभी हॉटस्पॉट में है, उनके लिए सप्लीमेंट्री पेपर की व्यवस्था कर सकते हैं।
11. ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों मध्यमा का परीक्षा विकल्प छात्रों के समक्ष रखा जाए ।
12. जहां ऑनलाइन व अन्य विकल्प उपलब्ध ना हो, वहां पर मजबूरीवश पारंपरिक परिक्षा प्रणाली को अपनाना पड़ेगा, ऐसी स्थिति में परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा सकती है, इसके लिए इंटर कॉलेजों का उपयोग किया जा सकता है, जिससे दैहिक दूरी बनाकर परीक्षाएं करा सकते हैं ।
13. जिन विश्वविद्यालयों में लॉकडाउन के समय शिक्षण कार्य चल रहा था, उन विश्वविद्यालयों में परीक्षा के पूर्व स्पेशल ऑनलाइन क्लास के द्वारा पढ़ाई पूरी करवाई जाए ताकि विद्यार्थी अपने पूरे कोर्स को पढ़ सकें।
14. यूजीसी एमएचआरडी और अन्य शैक्षिक संस्थाओं की गाइडलाइन के अनुसार अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा विभिन्न विकल्पों के आधार पर संपन्न करवाई जाए। अभाविप इसका समर्थन करती है।
15. वर्तमान स्थिति को देखते हुए डेलीगेसी में रहने वाले विद्यार्थियों के सामने रहने का संकट खड़ा है, कि शायद जब वह अपने घरों से वापस लौटे तो उनको रहने का स्थान उपलब्ध ना हो।

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