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Sunday, 28 June 2020

चीन मामले मे प्रधानमंत्री के कथन का सच

कृपा शंकर चौधरी

चीन मामले मे प्रधानमंत्री के कथन का सच


कोविड19 कोरोना,आर्थिक मंंदी  और चीन से विवाद के  दरम्यान 20 सैनिकों के सहीद होने के बाद भारतीय राजनीति मे आरोप प्रत्यारोप की गरमाहट बढ गई है। एक तरह विपक्ष का धड़ा चीन मामले को पूरे देश का मामला कह कर सरकार के साथ है तो दूसरे तरफ राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस के द्वारा सरकार पर आरोप लगाया जा रहा है कि सरकार चीन मामले मे जनता को गुमराह कर रही है। इस आरोप प्रत्यारोप मे ऐसी बाते भी निकल कर आ रही है जिसे जनता नही जानती थी।
दरअसल आरोप प्रत्यारोप का मामला तबसे गर्म हो गया जब चीनी सीमा से 20 भारतीय जनता के सहादत की खबर आई। जवानो की सहादत की खबर देर से मिलने और रक्षामंत्री, विदेश मंत्री, प्रधानमंत्री के कथन मे विरोधाभास होने को मुद्दा बना कर राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को केंद्र में रखकर ट्वीट पर ट्वीट कर घेरने का प्रयास जारी है। दूसरे तरफ सत्ताधारी भाजपा के बडे बडे नेताओं और प्रवक्ताओं द्वारा काग्रेस द्वारा पूछे गए सवालों का जबाब न देकर काग्रेस को चीन का हितैषी होने का प्रमाण प्रस्तुत कर घेरने का प्रयास किया जा रहा है।
मामले मे गरमाहट तब से आ गई है जबसे प्रधानमंत्री मोदी द्वारा यह कहा गया कि भारतीय सीमा में किसी की घुसपैठ नहीं हुई और न कोई पोस्ट कब्जा किया गया है। जबकि पहले के बयान में रक्षा मंत्री द्वारा घुसपैठ की बात कही गई थी। इसी बात को पकड़ते हुए काग्रेस द्वारा इसे मुद्दा बनाया जा रहा है। 
सत्तारूढ़ सरकार द्वारा समय समय पर देश में कई ऐसे फैसले लिए गए हैं जो लोगों के समझ से परे रहे है और सरकार द्वारा हमेशा यह बताने का प्रयास किया जाता रहा है कि हम अन्य सरकारों से अलग किश्म के है। जैसा कि दुनिया जानती है कि चीन धुर्त और मक्कारी के मामले में अत्यंत चालाक देश है और जब सामना ऐसे देश से हो तो उसके इतिहास को समझते हुये ही चाल चलना बेहतर होता है। इसी को समझते हुए मौजूदा सरकार ने चाल चली है और राजनीतिक पाशा फेकते हुए मोदी द्वारा यह बयान दिया गया जिससे चीन तो चारों खाने चित्त हो गया है किंतु नासमझ विपक्ष इस बात को नहीं समझ पा रहा है। 
चीन का इतिहास उठा कर देखें तो ज्ञात होगा कि वह सदैब विस्तार बढाने वाला देश रहा है और इसी कदम पर चलते हुए इसके द्वारा कई देशों को अपने मे विलय किया गया है। यह तीन कदम चलता है और विरोध होने पर दो कदम पीछे हटते हुए एक कदम कब्जा कर लेता है । एक कदम कब्जा तब होता है जब कब्जा होने वाले देश के द्वारा विश्व स्तर पर तीन कदम की कब्जा की बात कही जाती है और विश्व के सामने अपने आप को सही देश साबित करते हुए चीन द्वारा तीनो कदम अपना कहते हुए दरियादिली मे दो कदम पीछे हट जाया जाता है यह है चीन की रणनीति । किंतु भारत के मौजूदा सरकार के सामने चीन की यह रणनीति फेल हो चुकी है और अब अपना ही गवाने की नौबत आ गई है। 
दरअसल मौजूदा सरकार द्वारा सेना को बेहतर बनाने के साथ सीधे तौर पर कश्मीर से धार 370 खत्म किया गया और भारत के नक्शे के हिसाब से सभी भागों को गंभीर लफ्जों मे अपना बताया गया। इसे देखते हुए चीन बौखलाहट मे पुरानी रणनीति पर आगे बढा किंतु नये भारत से करारा जवाब मिलने से चारो खाने चित्त हो गया है। उसे अपेक्षा था कि भारत सरकार द्वारा कहा जाएगा कि चीन ने फला क्षेत्र तक घुसपैठ कर लिया है जबकि भारत द्वारा सीमा पर सैन्य कार्रवाई भी की गई और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चीन का नाम तक नही लिया गया और घुसपैठ से सीघे इंकार कर दिया गया। 
इन सब बातों के पीछे की रणनीति पर गौर करें तो इसका सीधा मतलब है कि अब एल ए सी नही बात एल ओ सी पर होगी

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