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Wednesday, 2 September 2020

अनंत चतुर्दशी पर्व पर अनंत नाथ एवं पार्श्वनाथ भगवान का हुआ 108 रजत कलशों से अभिषेक

कैलाश सिंह विकास वाराणसी

 अनंत चतुर्दशी पर्व पर अनंत नाथ एवं पार्श्वनाथ  भगवान का हुआ  108  रजत कलशों से अभिषेक

 निर्जला व्रत कर किया नमन पाठ - अनंत सूत्र को बांधा हाथों में - उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर हुआ व्याख्यान

 वाराणसी । अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व पर मंगलवार को अनंत नाथ एवं देवाधिदेव पार्श्वनाथ जी का 108  रजत कलशों से मस्तकाभिषेक किया गया। मुख्य आयोजन  ग्वाल दाससाहू लेन स्थित श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में सांय काल 4:00 बजे व्रत धारी शुद्ध  केसरिया वस्त्रों में इंद्र के रूप में 5 भक्तों ने मंत्रोच्चारण के साथ रजत पांडुक शिला कमल सिंहासन पर विराजमान कर तीर्थंकर  द्वय का बारी-बारी से पंचाभिषेक से महामस्तकाभिषेक किया। इच्छुक रसधारा , दुग्ध धारा, घृत धारा, केशर एवं गंगाजल के 108 रजत कलशों से तीर्थंकरों का  प्रक्षाल किया गया।
 भाद्र शुक्ल पंचमी से अनंत चतुर्दशी तक 10 दिनों तक चलने वाले पर्यूषण 10 लक्षण पर्व पर जैन धर्म के प्राचीन परंपरा के अनुसार अनंत चतुर्दशी पर्व पर विभिन्न जैन मंदिरों में भगवान पार्श्वनाथ जी की जन्मस्थली भेलूपुर , भगवान श्रेयांसनाथ जी की जन्म स्थली सारनाथ, भगवान सुपार्श्वनाथ जी की जन्म स्थली भदैनी, चंदा प्रभु भगवान की जन्म स्थली चंद्रपुरी, चौबेपुर के अलावा नरिया ,खोजवा, मैदागिन , हाथी बाजार , मझवा , भाट की गली में पूजन - अभिषेक किया गया।
 *मुख्य आयोजन* : ग्वाल दास साहू लेन स्थित श्री दिगंबर जैन पंचायती  शीशे वाली मंदिर में चौबीसी पूजन, देव शास्त्र पूजा , गुरु पूजा, विनय पाठ, अनंतनाथ पूजा, जिनेंद्र भगवान पूजा , शांति पाठ  एवं   महाअर्घ्य चढ़ाए गए। जैन धर्मावलंबी भादो मास में पड़ने वाले पर्व पर 10 वृतियों का व्रत लेकर  मन, वाणी एवं शरीर आत्मा को शुद्ध करते हुए कठिन तपस्या एवं साधना से  मन शुद्धि ,आत्म  शुद्धि, उपवास, जपमाला, ध्यान, स्तुति, वंदना इत्यादि अपने  आत्मबल को जगाने के लिए करते हैं । भक्तों ने इस वर्ष  सभी मंदिरों में हो रहे पूजन- अभिषेक को लाइव प्रसारण द्वारा देखा एवं सारी क्रियाएं अपने - अपने घरों पर करके अनंत सूत्र को अपनी बाहों में बांधा। सायं काल तीर्थंकर  द्वय की आरती की गई । आयोजनों की व्यवस्था में प्रमुख रूप से अध्यक्ष दीपक जैन, उपाध्यक्ष राजेश जैन, विनोद जैन , प्रधानमंत्री अरुण जैन , समाज मंत्री तरुण जैन एवं सभी विभागों के मंत्रियों का सराहनीय योगदान रहा।

 सांय काल पंडित सिद्धांत शास्त्री सांगानेर ने पर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर फेसबुक पर लाइव व्याख्यान देते हुए कहा - नश्वर के पीछे छुपे हुए   अविनश्वर को जो देख लेता है , जान लेता है वह परम ब्रह्म में रम जाता है। वह ब्रम्हचर्य से युक्त होकर ब्रह्म बन जाता है । ब्रम्हचर्य से पुरुष में  प्रमाणिकता, परिपूर्णता ,व परमार्थता   प्रकट होती है । पंडित जी ने कहा ब्रह्म का अर्थ आत्मा  है और चर्य का अर्थ है आत्मा में लीन होना। ब्रह्मचर्य को धारण करने वाला व्यक्ति नारी मात्र को माता , बहन और बेटी के समान देखता है। विषय भोगों की तृष्णा को छोड़कर आत्मा के अपूर्व आनंद का अनुभव करना चाहिए। आत्म चिंतन, आत्ममंथन, आध्यात्मिक चिंतन , परिधि के केंद्र की ओर लौटना ही पर्यूषण पर्व है।
                 

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