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Thursday, 24 September 2020

स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट की फोटो की प्रति जला कर शाम -6 बजे से प्रबंध निदेशक कार्यालय का परिक्रमण करते हुए कैंडल जला कर बिजलीकर्मियों ने मातम दिवस मनाया।

कैलाश सिंह विकास वाराणसी


 स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट की फोटो की प्रति जला कर शाम -6 बजे से प्रबंध निदेशक कार्यालय का परिक्रमण करते हुए कैंडल जला कर बिजलीकर्मियों ने मातम दिवस मनाया।
 

 वाराणसी - 23सितम्बर । विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रबन्ध निदेशक कार्यालय भिखारीपुर पर निजीकरण के खिलाफ आज बाइसवें दिन भी वाराणसी के समस्त बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं ने प्रबन्ध निदेशक कार्यालय भिखारीपुर पर एकजुट होकर निजीकरण के खिलाफ किया  विरोध प्रदर्शन ।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार द्वारा कल रात में  *स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट* का मसौदा तैयार करके पूर्वांचल डिस्कॉम सहित कई अन्य केंद्रशासित प्रदेशों/राज्यों के डिस्कॉम को निजी हाथो में देने की तैयारी कर लिया गया है। आज के दिन को वाराणसी सहित पूर्वांचल के समस्त जनपदों में *स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट* के मातम दिवस के रूप में मनाया गया, जिसमें सभी बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं ने शाम 4:00 बजे से 5:00 बजे के विरोध सभा के कार्यक्रम के पश्चात शाम 6:00 बजे से 7:00 बजे तक  सभी बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं ने हाथ में मोमबत्ती लेकर प्रबंध निदेशक कार्यालय, भिखारीपुर का परिक्रमण करते हुए  *स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट* की प्रति जला कर विरोध किया गया ।
 
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण का प्रयोग पूरे देश में अभी तक कहीं भी सफल नहीं हो सका है। निजी क्षेत्र का एक मात्र उद्देश्य सिर्फ लाभ कमाना है जबकि पूर्वांचल विद्युत निगम बिना भेदभाव के किसानों और गरीब उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति कर रहा है। निजी कंपनी अधिक राजस्व वाले वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्राथमिकता पर बिजली देगी। 
वक्ताओं ने यह भी बताया  कि अभी किसानों, गरीब रेखा से नीचे और 500 यूनिट प्रति माह बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी मिल रही है, जो निजीकरण के बाद खत्म होगी। वर्तमान में किसानों को लगभग हर महीने 1000 रुपए प्रति 5 हॉर्स पावर का बिल मिलता है पर निजीकरण के बाद किसानों को लगभग 6000 से 8000 रुपए का बिल प्रति माह मिलेगा | निजी हाथों में जाने के बाद ब्याज माफी योजना का भी लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाएगा | बिजली जैसी मूलभूत सुविधा का निजीकरण कभी भी सरकारी क्षेत्र का विकल्प नहीं हो सकता है।  बिजली को निजी हाथों में सौंपने से प्रदेश के आम विद्युत उपभोक्ताओं के ऊपर विद्युत मूल्य का अतिरिक्त भार बढ़ेगा जो उन्हें वहन करना पडेगा । इसके साथ ही कारपोरेशन एवं सरकार पर वित्तीय नुकसान का कारण भी बने हुए है ।

   सभा को सर्वश्री ई0 चंद्रेशखर चौरसिया, आर0के0 वाही, डॉ0 आर0बी0 सिंह,मायाशंकर तिवारी, ए0के0 श्रीवास्तव,ई0 संजय भारती, गुलाब प्रजापति,राजेन्द्र सिंह,ई0 जगदीश पटेल , जिउतलाल, हेमंत श्रीवास्तव,अंकुर पाण्डेय, रमन श्रीवास्तव,वीरेंद्र सिंह, रमाशंकर पाल,अमितानंद त्रिपाठी, संतोष कुमार,आदि पदाधिकारियो ने संबोधित किया।

   

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