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Monday, 28 December 2020

भगवान् श्री नृसिंह की महापूजा से सम्पन्न हुआ 'स्वर्ण ज्योति महामहोत्सव' का प्रथमोत्सव

कैलाश सिंह विकास वाराणसी
 

भगवान् श्री नृसिंह की महापूजा से सम्पन्न हुआ 'स्वर्ण ज्योति महामहोत्सव' का प्रथमोत्सव

 

वाराणसी। शीतकालीन श्री बदरीनाथ पूजा स्थल, ज्योतिर्मठ मठाङ्गण जोशीमठ में भगवान् श्रीनृसिंह जी की महापूजा और महा आरती के साथ 'स्वर्ण ज्योति महामहोत्सव' का प्रथमोत्सव आज हर्षोल्लास से सम्पन्न हुआ।

प्रातः भगवान् श्री नृसिंह जी का सविधि अभिषेक  मध्याह्न में भोग और अपराह्ण में मालपुआ से सहस्रार्चन और सायंकाल महा आरती तथा प्रसाद वितरण भी सम्पन्न हुआ। श्रीनृसिंहाभिषेक के आचार्य श्री सुशील डिमरी तथा सहस्रार्चन के आचार्य धर्माधिकारी श्री भुवनचन्द्र उनियाल थे। वेदपाठी श्री कुशलानन्द बहुगुणा जी ने पूजा में सहयोग दिया।

महा आरती काशी से पधारे विद्वानों द्वारा की गई जिसमें बडी संख्या में क्षेत्रीय लोगों ने भाग लिया।

ज्ञातव्य है कि पूज्यपाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के ज्योतिष्पीठ पर अधिरोहण के पूरे होने वाले पचास वर्ष के उपलक्ष्य में पीठ के शिष्यो,भक्तों द्वारा देशव्यापी द्विवर्षीय कार्यक्रम 'स्वर्ण ज्योति महामहोत्सव' मनाया जा रहा है जिसके अन्तर्गत देश भर में पचास विशिष्ट आयोजन किये जायेंगे।  जिसका  प्रथमोत्सव तीन दिनों तक जोशीमठ में मनाया गया ।

इस अवसर पर महामहोत्सव के आयोजक पूज्यपाद शंकराचार्य जी के शिष्य प्रतिनिधि 'स्वामिश्रीः 1008' अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने बताया कि महामहोत्सव के अन्तर्गत जोशीमठ में लोककल्याण के अन्य उपक्रम भी आरम्भ किये जाने का संकल्प लिया गया है जिसके बारे में समयानुसार जानकारी दी जायेगी।

धर्माधिकारी जी ने अपने उद्बोधन में ज्योतिष्पीठ की शंकराचार्य परम्परा की चर्चा करते हुये कहा कि पूर्व में यह पीठ अनेक वर्षों तक शंकराचार्य विहीन रहा था तब शंकराचार्य जी के नैष्ठिक ब्रह्मचारी ने आगे आकर बदरीनाथ जी की पूजा आदि संभाली थी जो रावल के रूप में टिहरी नरेश के सौजन्य से आज भी संभाल रहे हैं। हम सब आस्तिक सनातनी जन आशा करते हैं कि पीठ की परम्परा आगे अक्षुण्ण चलती रहेगी और सभी परम्परायें पुनरुज्जीवित होंगी। 

धन्यवाद ज्ञापन ब्रह्मचारी श्रवणानन्द तथा प्रसाद वितरण ब्रह्मचारी कृष्णप्रियानन्द जी ने किया। स्वामी सदाशिव ब्रह्मेन्द्रानन्द सरस्वती सहित अनेक दण्डी सन्यासी तथा ब्रह्मचारी एवं सद्गृहस्थ स्त्री पुरुष उपस्थित रहे।

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