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Thursday, 31 December 2020

KANPUR किसान रंजन कुशवाहा के लिए आज गुलाब की खेती बन गई जवजीवन

ब्यूरो कानपुर देहात:अरविन्द शर्मा

किसान रंजन कुशवाहा के लिए आज गुलाब की खेती बन गई जवजीवन

कानपुर देहात-आर्थिक स्थितियों से संघर्ष करते रहे किसान रंजन कुशवाहा के लिए आज गुलाब की खेती बन गई जवजीवन। हम बात कर रहे हैं कानपुर देहात के झींझक निवासी किसान रंजन कुशवाहा की। जिनके पास 3 बीघे खेत है। खेती कम होने के बावजूद वह दूसरों किसानों से अधिक आय कमा रहे हैं। कोरोना के संकटकाल में भी गुलाब ने उसके साथ साथ भी कई परिवारों को बड़ा सहारा दिया। 2016 में उन्होंने धान, गेहूं, चना आदि से हटकर कुछ बिस्वा में गुलाब के पौधे लगाए थे। तैयार होने पर गुलाब तोड़कर उन्होंने बाजार में बिक्री की तो लागत से अधिक कमाई होने से उन्होंने गुलाब की खेती ही करने का प्रण किया।

किसान रंजन कुशवाहा के मुताबिक सीजन में प्रतिदिन 20 से 26 किलो गुलाब का फूल निकलता है। वर्तमान में 70- 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक्री हो रही है। रोजाना करीब एक हजार से डेढ़ हजार की कमाई हो जाती है। पिछले एक साल से उन्होंने एक बीघे में गेंदा भी लगाना शुरू कर दिया। जिसकी आमदनी भी अच्छी खासी मिल रही है। अच्छी कमाई होने से परिवार का रहन सहन भी अच्छा हो गया है। आज रंजन कई किसानों के लिए प्रेरणाश्रोत बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि शुरुवाती दौर में 70 देशी गुलाब के पौधे तैयार किए थे। उनकी देखभाल व खेती कार्य में उनकी पत्नी मीना बराबर हांथ बंटाती हैं।

उन्होंने बताया कि फूलों को बेचने पर लागत से अच्छी आमदनी हुई तो उन्होंने और कलमें लगाईं। आज करीब 10 हजार पौधे हैं। आज सीजन में वह प्रति माह गुलाब से 40 से 45 हजार रूपए कमाते हैं। उनका मानना है कि आज शिक्षित किसान अगर समय को देखते हुए तकनीक से खेती करे तो खेती उसके लिए बहुत लाभदायक है। क्योंकि समय बारिश व दैवीय आपदाओं सहित सिंचाई की समस्याओं से किसान लागत से अधिक मुनाफा नहीं कमा पाता है। वहीं गुलाब की खेती की खासियत है कि इसे एक बार तैयार करने के बाद पूरी साल पैदावार मिलती है, जबकि अन्य फसलों को सीजन के मुताबिक बोना पड़ता है। उन्होंने बताया कि गुलाब के फूलों की बिक्री कानपुर देहात में मंगलपुर, संदलपुर, झींझक व रसूलाबाद सहित अन्य कस्बों में की जाती है। वहीं जनपद औरैया के विभिन्न कस्बों में भी गुलाब की अच्छी खपत होती है।


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