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Tuesday, 5 January 2021

VARANSI माता गायत्री की त्रिकाल उपासना से जीवन अत्यंत शुचितापूर्वक व्यतीत होता है : चंद्रमौली उपाध्याय

कैलाश सिंह विकास वाराणसी

माता गायत्री की त्रिकाल उपासना से जीवन अत्यंत शुचितापूर्वक व्यतीत होता है : चंद्रमौली उपाध्याय

वाराणसी। वैदिक एजुकेशनल रिसर्च सोसाइटी द्वारा राष्ट्रकल्याण एवम विश्वशांति हेतु वेदमाता मंदिर छित्तूपुर, लंका में आयोजित गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ में जारी विद्वत् चर्चा एवम विद्वान सम्मान कार्यक्रम के 22 वें दिन मंगलवार को भी अनवरत जारी रहा। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष और भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषी प्रोफेसर चंद्रमौली उपाध्याय ने गायत्री माता को अखिल ब्रह्मांड का सर्वोत्तम जप मन्त्र बताया। प्रोफेसर उपाध्याय ने जपमंत्र प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए बताया की शास्त्र निर्दिष्ट तीन प्रकार की जप की प्रक्रियाओं में उपांशु जप अत्यन्त ही उत्कृष्ट और शीघ्र फलदायी होता है। उपांशु गायत्री जप में मन और बुद्धि एक साथ विश्वमाता की आराधना करते हैं। इस प्रक्रिया में माता गायत्री की त्रिकाल उपासना से जीवन अत्यंत शुचितापूर्वक व्यतीत होता है। कार्यक्रम के संयोजक पंडित शिवपूजन चतुर्वेदी के नेतृत्व में वैदिक वटुकों ने प्रोफेसर उपाध्याय एवं आमंत्रित अतिथियों का सामगान से स्वागत किया एवं उन्हें अंगवस्त्र, पुष्पमाला से सम्मानित किया। इस अवसर पर पं. चतुर्वेदी ने कहा की हमारे अध्ययनकाल के जीवन से ही वेदमाता गायत्री के कई ऐसे कृषक भी साधक हैं जो इस भारत मे गृहस्थ जीवन जीते हुए भी गायत्री का जप करते हुए कृषिकार्य से पवित्र अन्न उत्पन्न कर भारतवासी को गायत्री उपासित उपजाऊ अन्न का भक्षण कराते हैं। इस दिशा में इन कृषकों का प्रयास स्तुत्य है। इस अवसर पर रामसिंहासन उपाध्याय, वसिष्ठ, निर्मल, राजेन्द्र सहित कई कृषकों को सम्मानित किया गया। इसी क्रम में गायत्री माता के सम्बंध में अपने अनुभव साझा करनेवाले 9 वर्ष के विराट नामक बालक को यज्ञाचार्य सुनील तिवारी ने माता गायत्री का प्रसाद अर्पण कर उसके अग्रिम जीवन की सफलता हेतु प्रार्थना की। इस अवसर पर प्रो. रामकेश्वर तिवारी, रमाशंकर तिवारी, अमूल उपाध्याय, वाचस्पति पांडेय, राजीव रंजन तिवारी, जयप्रकाश चतुर्वेदी सहित विद्वान एवं श्रद्धालु उपस्थित थे।

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