झंगहा के महुआरी टोला की घटना ने उठाए गंभीर सवाल, आखिर किसकी शह पर बिक रही कच्ची शराब?
कृपा शंकर चौधरी ब्यूरो गोरखपुर
झंगहा (गोरखपुर)। झंगहा थाना क्षेत्र के ग्राम सभा झंगहा स्थित महुआरी टोला में शनिवार को एक महिला द्वारा कथित रूप से जहरीला पदार्थ खाने के बाद इलाज के दौरान मेडिकल कॉलेज में मौत होने की घटना ने क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब की बिक्री और पुलिस-प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दूसरी तरफ नये थानाध्यक्ष से लोगों को उम्मीद है कि मामले को संज्ञान में लेते हुए त्वरित कार्रवाई की जाएगी ।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार महिला ने शनिवार सुबह जहरीला पदार्थ खा लिया था। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतका की उम्र 50 वर्ष से अधिक बताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, घटना से पहले महिला का पति कथित रूप से सुबह के समय कच्ची शराब के नशे में घर में विवाद कर रहा था और महिला के साथ मारपीट भी की गई। इसी से आहत होकर महिला द्वारा जहरीला पदार्थ खाने की बात सामने आ रही है। हालांकि घटना के वास्तविक कारणों और मारपीट के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सबसे बड़ा सवाल—सुबह-सुबह कहां से मिल रही कच्ची शराब?
घटना ने क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब की उपलब्धता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सरकार लगातार अवैध शराब के निर्माण और बिक्री के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश देती रही है। इसके बावजूद यदि ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह-सुबह कच्ची शराब आसानी से उपलब्ध हो रही है तो यह केवल शराब बेचने वालों का मामला नहीं, बल्कि स्थानीय निगरानी और जिम्मेदारी की व्यवस्था पर भी सवाल है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी देशी शराब की दुकानें निर्धारित समय के अनुसार खुलती हैं, लेकिन कथित अवैध कच्ची शराब उससे पहले ही कुछ स्थानों पर उपलब्ध हो जाती है। यदि यह बात सही है तो सवाल यह है कि आखिर अवैध शराब बेचने वालों तक शराब पहुंच कैसे रही है और जिम्मेदार विभागों की नजर उन पर क्यों नहीं पड़ रही?
एक परिवार उजड़ा, लेकिन जिम्मेदारी किसकी?
यह घटना केवल एक महिला की मौत का मामला नहीं है। इसके पीछे घरेलू कलह, नशे की लत और अवैध शराब की उपलब्धता जैसी कई सामाजिक समस्याएं एक साथ दिखाई देती हैं।
अगर कच्ची शराब के नशे में पति द्वारा विवाद और मारपीट किए जाने की बात जांच में सही पाई जाती है तो यह सवाल भी उठना स्वाभाविक है कि क्या अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाया जाता तो यह स्थिति टाली जा सकती थी?
पुलिस और आबकारी विभाग की जिम्मेदारी केवल घटना होने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। ऐसे स्थानों की पहचान कर लगातार निगरानी और अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई करना भी जरूरी है।
जिम्मेदारों से सवाल
- झंगहा क्षेत्र में यदि कच्ची शराब की बिक्री की शिकायतें हैं तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- सुबह-सुबह अवैध शराब उपलब्ध कराने वाले लोगों पर निगरानी कौन कर रहा है?
- क्या पुलिस और आबकारी विभाग को अवैध शराब के अड्डों की जानकारी नहीं है?
- यदि जानकारी है तो कार्रवाई में देरी क्यों?
- क्या घटना के बाद ही प्रशासन जागेगा या पहले से ही ऐसे परिवारों को नशे के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए अभियान चलाया जाएगा?
नये थानेदार से न्याय की उम्मीद
झंगहा थाना में इस समय नये थानेदार के आगमन और अपराध के क्षेत्र में उनके पिछले अच्छे रिकार्ड से लोगों को उम्मीद है कि इस मामले में कार्रवाई करते हुए उनके द्वारा कच्ची शराब की बिक्री पर रोक लगाई जाएगी। दूसरी तरफ
महिला की मौत ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब जरूरत केवल घटना की जांच की नहीं, बल्कि इस बात की भी जांच करने की है कि क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब का नेटवर्क कहां से संचालित हो रहा है और उस पर रोक लगाने की जिम्मेदारी निभाने वाले तंत्र की भूमिका क्या रही।
पुलिस द्वारा घटना के कारणों, कथित मारपीट और अवैध शराब की बिक्री के आरोपों की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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