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Friday, 12 October 2018

बस्ती-रुधौली ग्रामीण क्षेत्र के सरयू नहर में पहली बार दिखी डॉल्फिन मछली जिसे देखने के लिए लगी कतार।

रिपोर्ट -राज आर्या


बस्ती- रुधौली तहसील क्षेत्र के हनुमानगंज के मुड़ाडीहा गाव के करीब सरयू नहर खण्ड छः में डॉल्फिन मछली देखने की आशंका जताई गई।जिसे दिखने के लिए काफी लोगो की भीड़ उमड़ पड़ी । लेकिन स्पष्ट रूप दिखाई नही दे पाई जिसके चलते लोगो तक यह बात आग की तरह फैलता चल जा रहा था जैसा कि लोगो तक यह बात कानो तक पहुचती लोग जगह जगह पर सरयू नहर पर पहुचते रहे। लेकिन आखिर कार रुधौली तहसील क्षेत्र के चंद्रभानपुर गाँव के पास लोगो ने डॉल्फिन मछली को स्पष्ट रूप देखा जिसकी सूचना लोगों वन विभाग को दी लेकिन अभी डॉल्फिन को पकड़ने कोई स्पष्टीकरण नही हो पाया है।




ये भारत, बांग्लादेश, नेपाल, तथा पाकिस्तान में पायी जाती है गंगा नदी डॉल्फिन सभी देशों के नदियों के जल मुख्यतः गंगा नदी तथा सिन्धु नदी डॉल्फिन, पाकिस्तान के सिन्धु नदी के जल में पायी जाती है। केन्द्र सरकार ने 04 अक्टूबर 2009 को गंगा डॉल्फिन को भारत  का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया है। गंगा नदी में पायीं जाने वाली डॉल्फिन एक नेत्रीय जलीय जीव है जिसकी घ्राण शक्ति अत्यन्त तीव्र होती है विलुप्त प्राय इस जीव की वर्त्तमान में भारत में 2000
से कम संख्या कम रह गयी है जिसका मुख्य कारण गंगा में बढ़ता प्रदूषण ,बांधो का निर्माण एवं शिकार है।





इनका शिकार मुख्यता तेल लिए किया जाता है जिसे अन्य मछलियों को पकड़ने के लिए चारे के रूप में प्रयोग किया जाता है इस समय उत्तर प्रदेश के नरोरा और बिहार के पटना साहिब के बहुत थोड़े से क्षेत्र में गंगा डॉल्फिन बची है। बिहार और उत्तर प्रदेश में इसे 'सोंस' जबकि आसामी भाषा में इसे 'शिहू' के नाम से जाना जाता है। यह इकोलोकेशन( प्रतिध्वनि निर्धारण) सूघने की अपार क्षमताओं से अपना शिकार और भोजन तलाशती है। यह मांसाहारी जलीय जीव है यह प्राचीन जीव करीब 10 करोड़ साल से भारत में  मौजूद है। यह मछली नही दरसअल एक स्तनधारी जीव है मादा के औसत लंबाई नर डॉल्फिन से से अधिक होती है इसकी औसत आयु 28 वर्ष रिकॉर्ड की गयी है 'सन ऑफ़ रिवर कहने वाले डॉल्फिन के संरक्षण के लिए सम्राट अशोक ने कई सदी पूर्व कदम उठाये थे।

केंद्र सरकार ने 1972 में भारतीय वन्य जीव संरक्षण कानून के दायरे में गंगा डॉल्फिन को शामिल कर लिया था। लेकिन अंततः राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित वन्य जीव संरक्षण के कानून के दायरे में स्वतः आ गया।

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