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Sunday, 28 October 2018

कृषि कुंभ‘ में किसानों की हमदर्दी पाने को वे झूठे आंकड़ों पर उतर आए - राजेन्द्र चौधरी

लखनऊ - महेंद्र मिश्रा ब्यूरो उत्तर प्रदेश


समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चौधरी ने कहा है कि चुनाव नजदीक आते ही भाजपा ने अपना माया जाल फैलाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के कृषिमंत्री कृषि कुंभ की नौटंकी के साथ झूठ को सच बनाने की कला भी आजमाने लगे हैं लेकिन वे भूलते हैं कि लोग अब सच्चाई समझने लगे हैं। भाजपा ने अपने वादों से मुकरकर अपनी साख स्वयं गिरा दी है। प्रदेश के मतदाता अखिलेश यादव के कामों से भी परिचित है और यह भी देख रहे हैं कि भाजपा सरकार ने, वह चाहे केन्द्र की हो या राज्य की, अपना समय सिर्फ भाषणों, सम्मेलनों और प्रचार के लिए विज्ञापन, होर्डिंग में ही गंवाया है।



प्रदेश के कृषि मंत्री को अच्छी तरह मालूम है कि भाजपा को अखिलेश यादव ही कड़ी चुनौती देते हैं। पिछले लोकसभा के उपचुनावों में मिले दर्द को अभी तक वे भूले नहीं होंगे। इसलिए कथित ‘कृषि कुंभ‘ में किसानों की हमदर्दी पाने को वे झूठे आंकड़ों पर उतर आए। उनका यह दावा कि समाजवादी सरकार के समय से ज्यादा गेहूं की खरीद हुई हवाई दावे से ज्यादा कुछ नहीं क्योंकि जिस रिकार्ड खरीद का वे दावा कर रहे हैं वह खरीद बिचैलियों के माध्यम से की गई है। भोले-भाले किसान को तो न्यूनतम समर्थन मूल्य की जगह धोखा ही मिला है।
 
जब भाजपा को वोट लेना था तो 14 दिनों के भीतर गन्ना किसानों का बकाया भुगतान का वादा हुआ था, प्रति कुंतल 275 रूपए मुनाफा देने की बात थी, विधानसभा चुनाव जीतते ही प्रधानमंत्री  इसे भुला बैठे। तथ्य यह है कि 50 हजार से ज्यादा किसानों ने उनके कार्यकाल (04वर्ष) में आत्महत्या की। बिजली, तेल, ईंधन, कीटनाशक दवाइयां और खाद की कीमतोें पर जीएसटी की ऐसी मार पड़ी कि किसान उससे त्रस्त हैं। सैकड़ों किसानों को फसल बर्बादी के बाद भी कुछ नहीं मिला। 
 
कृषि कुंभ के आयोजन पर भाजपा सरकार ने सैकड़ों करोड़ रूपया उड़ा दिया, किसान बाहर धक्के खाते रहे, अन्दर जश्न चलता रहा। किसान यही नहीं समझ पाएं कि उनके फायदे की कौन सी घोषणा मंत्री  ने की है। यह भाजपा सरकार की संवेदनशून्यता की पराकाष्ठा नहीं है तो क्या है?
 
अनर्गल बयानबाजी करने से बेहतर होता कृषि मंत्री वास्तविकता से अवगत हो लेते। उत्तर प्रदेश में  अखिलेश यादव ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में गांव-खेती के मद में 75 प्रतिशत राशि बजट में रखी थी। 50 हजार रूपये तक किसानों का कर्ज माफ किया था। किसानों को मुफ्त सिंचाई सुविधा देने के साथ खाद, कीटनाशक दवा और बीज आदि की समय से उपलब्धता सुनिश्चित कराई थी। फसल बीमा का लाभ 07 लाख रूपये तक दिया गया था। बिजली की पर्याप्त आपूर्ति की गई थी। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सड़कों से मुख्यालय को जोड़ने के साथ फल-सब्जी, अनाज, दूध मंडियों की स्थापना की व्यवस्था की थी। 
 
भाजपा ऐसा माहौल बना रही है कि किसानों को जैसे बहुत मिल रहा है जबकि यह सिर्फ किसानों को गुमराह करने का हथकंडा है। किसान की आय दुगनी होने के कोई आसार दूर-दूर तक नहीं दिख रहे हैं। चुनावों में सामने खड़ी हार को देखकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के साथ उनके दूसरे मंत्री भोले भाले किसानों को बहकाने में लग गए हैं। किसान को तो कोई राहत नहीं मिली, उद्योगपतियों के लाखों करोड़ के कर्ज माफ हो गए हैं। वस्तुतः भाजपा के शीर्ष नेताओं ने वही किया है जो वह सबसे अच्छा करते हैं और वायदा खिलाफी भी भ्रष्टाचार ही है।

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