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Monday, 7 January 2019

घटती आबादी से चीन परेशान

साल 2017 के मुकाबले साल 2018 में  25 लाख बच्चे कम पैदा होने के वजह से परेशान चीन ने अपने देश में एक बच्चा पैदा करने वाली महिला के पद और तनख्वाह को कम कर रहा है. चीन के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आबादी कम होने से श्रम बल में गिरावट आती है और इसका असर देश कि अर्थ व्यवस्था पर पड़ता है. बता दें कि चीन विश्व का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है. और अब यहाँ लोग बच्चे पैदा करने से आर्थिक समस्या के शिकार हो रहे हैं.
चीन दुनिया के उन देशों में शामिल होने जा रहा है जहां की जनसंख्या तेजी से घट रही है। विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाले इस देश में पिछले 70 वर्षों में पहली बार बच्चों के जन्म दर में गिरावट देखी जा रही है। 2018 में यहां 2017 के मुकाबले 25 लाख बच्चे कम पैदा हुए जबकि 7.90 लाख वृद्धि की उम्मीद की जा रही थी। तो किसी देश की आर्थिक समृद्धि के लिए बच्चे क्यों जरूरी हैं? लेबर पेन से लेबर गेन इसका मतलब है प्रसव पीड़ा से श्रमबल की प्राप्ति। मतलब यह कि आबादी ज्यादा तो श्रमबल भी ज्यादा और श्रमबल ज्यादा तो उत्पादकता भी ज्यादा। चीन को ही ले लीजिए। वहां जनसंख्या वृद्धि पर लगाम लगी तो आज स्थिति यह है कि 1999 के बाद वहां प्रति घंटे उत्पादकता रेकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुकी है और इसमें लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। दरअसल, जीवन जीने की लागत (लिविंग कॉस्ट्स) बढ़ जाने के कारण चीन में वैसे दंपतियों की संख्या बढ़ रही है जो बच्चे पैदा कर उनका लालन-पालन करने में खुद को आर्थिक रूप से असक्षम महसूस कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा के खर्चे इतने बढ़ गए हैं कि बच्चे पैदा करने से आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। वहां ज्यादा बच्चा पैदा करने के लिए सिर्फ एक बच्चे वाली महिलाओं का वेतन या पद घटाने जैसी तरकीब भी काम नहीं आ रही। किलकारी के अभाव का वृद्धा पेंशन पर असर आबादी घटने और श्रमबल में कमी के कारण कल्याणकारी और स्वास्थ्य योजनाओं पर भी असर पड़ता है। चीन का ही उदाहरण ले लीजिए। वहां एक वृद्धा पेंशन के लिए 7 लोगों के काम करने और टैक्स के जरिए सरकारी खजाने में योगदान करने की जरूरत है। लेकिन वहां की जनसंख्या में जिस तेजी से गिरावट आ रही है, उसे देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि 2030 तक 7 की जगह 4 कामगार ही रह जाएंगे। इससे कामगार आबादी पर दबाव बढ़ेगा। फिनलैंड में निर्भरता अनुपात 2017 में 60 था जिसके 2030 तक बढ़कर 66, 2050 तक 71 और 2070 तक 81 हो जाएगा। निर्भरता अनुपात का मतलब ऐसी उम्र के लोग जो काम नहीं कर सकते (0 से लेकर 15 वर्ष तक और फिर 65 वर्ष से ज्यादा की उम्र) और ऐसी उम्र के लोग जो काम कर सकते हैं (15 से 65 वर्ष के लोग), उनका अनुपात है। जापान में भी 2017 में बच्चों की जन्म दर में रेकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई। वहां लगातार दो सालों से 5 लाख से भी कम बच्चे पैदा हुए हैं। 

 कितने बच्चे अच्छे? अर्थशास्त्रियों ने प्रति महिला 2.1 बच्चे की जन्मदर को आदर्श माना है। इससे ज्यादा की जन्मदर से जनसंख्या बढ़ेगी और घटने से जनसंख्या घटेगी। बढ़ती आबादी से संसाधनों पर दबाव बढ़ता है जबकि आबादी घटने से व्यक्तिगत समृद्धि तो बढ़ती है, लेकिन आगे जाकर श्रमबल की कमी हो जाती है जिसका सीधा असर दिखता है जैसा कि ऊपर बताया गया है। कम आबादी के कारण महंगाई बढ़ती है क्योंकि वस्तुओं एवं सेवाओं की कम मांग के कारण लागत बढ़ जाती है।

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