बस्ती -वृक्षों के सुरक्षा हेतु कडे कानून के अभाव में विश्व पर्यावरण दिवस महज दिखावा - तहकीकात न्यूज़ | Tahkikat News |National

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Wednesday, 5 June 2019

बस्ती -वृक्षों के सुरक्षा हेतु कडे कानून के अभाव में विश्व पर्यावरण दिवस महज दिखावा



तहकीकात न्यूज़ डेस्क लखनऊ

वृक्षों की सुरक्षा हेतु कडे कदम उठाने व बागवानी विशेष प्रोत्साहन देकर ही हम विश्व पर्यावरण को सार्थक बना सकते हैं ये बातें आज हर्रैया स्थिति मार्डन इरादा कम्पयुटर सेंटर में संस्था के बच्चों को मानव जीवन में वृक्षों का महत्व विषय पर आयोजित संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए सांसद प्रत्यासी रहे चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामाजी ने कहीं उन्होंने कहा कि बढते शहरीकरण व आधुनिकीकरण के चलते हम भूल रहे हैं की मानव जीवन की आवश्यक आवश्यकता वायु जल व अन्न है जिसमें वायु सबसे महत्वपूर्ण है जो कि हमें वृक्षों से मिलता है आये दिन शहरीकरण, विद्युतीकरण, सडकमार्ग,रेलमार्ग, नहरों के निर्माण हेतु जहां वृक्षों का कटान जारी है तो वहीं चंद पैसों हेतु लकडी माफिया नियमों के सरलीकरण का लाभ उठाकर धडल्ले से पेड काट रहे हैं फलतः पर्यावरण असंतुलन बढता जा रहा है और हम 70%से अधिक दिखावटी वृक्षारोपण कर विश्व पर्यावरण दिवस मना रहे हैं नदियां सूख रही हैं पोखरे तालाब विलुप्त हो रहे हैं वृक्ष बागों बागों व जंगलों से समाप्त होकर गमलों में सिमट रहे हैं पर्यावरण असंतुलन से बचने हेतु वैश्विक सम्मेलन में वृक्षारोपण को बढावा देने हेतु बागवानी को प्रोत्साहन देना होगा जब तक महारी बागवानी व कृषि लाभकारी नहीं होगी औद्योगिकीकरण बढता जायेगा भारत सरकार को भी चाहिए कि बागवानी हेतु सामाजिक संस्थाओं व इच्छुक व्यक्ति को धन व जमीन उपलब्ध कराये तथा नियम बना दे कि जिस परिवार में परिवार की संख्या के सापेक्ष पांच गुना अधिक वृक्ष नहीं होगा उन्हे न सरकारी नौकरी मिलेगी न सरकारी सुविधाएं और न ही चुनाव लडने का अवसर प्रत्येक कर्मचारी को पांच वृक्ष तैयार करने के बाद ही प्रोन्नति मिलेगी साथ ही जागरूकता कार्यक्रम के जरिये बताया जाय कि जिन वृक्षों को हम घाव पहुंचाते हैं वो हमें छांव देते हैं जबकि हमारे अपने हमें घाव देते हैं हम परिवार की संख्या से अधिक वृक्षों की संख्या बढायें इस मौके पर संस्था प्रमुख अवधेष पाठक के अलावं बृजेश यादव,शिवप्रसाद चौधरी, विवेक पाण्डेय,सुनील शुक्ला व सैकड़ो की संख्या में कम्प्यूटर प्रशिक्षणार्थी छात्र छात्राएं मौजूद रहीं

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