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Friday, 28 August 2020

सत्य धर्म आत्मा का धर्म है- पंडित सिद्धांत शास्त्री

कैलाश सिंह विकास वाराणसी

सत्य धर्म आत्मा का धर्म है-   पंडित सिद्धांत शास्त्री

 जैन महापर्व का पांचवा दिन

 वाराणसी। पर्यूषण पर्व पर जैन धर्म के लोग तीर्थंकरों की विशेष पूजा अर्चना कर अपने दुर्गुणों को दूर करने तथा  सद्गुणों को अपनाने का संकल्प लेते हैं। 10 लक्षण पर्व पर दसों वृत्तियों  को अपनाकर हम अपनी सारी बुराइयों को दूर करते हैं । श्री दिगंबर जैन समाज काशी द्वारा चल रहे महापर्व पर जैन मंदिरों में कई धार्मिक  आयोजनों के साथ  प्रातः तीर्थंकर पार्श्वनाथ जी,   सुपार्श्वनाथ जी, चंदा प्रभु जी एवं श्रेयांसनाथ जी का अभिषेक पूजन किया गया।  सायं काल णमोकार महामंत्र का जाप, जिनवाणी एवं शास्त्र पूजन व भगवंतो की आरती की गई। सभी आयोजनों को भक्त गणों ने  सीधे प्रसारण द्वारा अपने अपने घरों पर देखा। गुरुवार को सायं काल पर्व के पांचवें दिन फेसबुक पर लाइव व्याख्यान करते हुए पंडित सिद्धांत शास्त्री सांगानेर ने उत्तम सत्य धर्म पर कहा   हमें वाणी मिली है, सत्य और मधुर बोलने के लिए, जिनवाणी की आराधना करने के लिए, अतः हमें इसका दुरुपयोग कठोर अपशब्द बोलकर नहीं करना चाहिए। सत्यधर्म आत्मा का धर्म है। पंडित जी ने कहा सत्य ही ईश्वर है,  जो सत्य का पालन करता है वह निर्भीक होता है, जगत में उसका नाम होता है, सत्य का साथ देने वाला हमेशा विजई होता है और उसकी गाथा युगों युगों तक गाई जाती है। सच्चाई छुप नहीं सकती कभी झूठे उसूलों से खुशबू आ नहीं सकती, कभी कागज के फूलों से । सत्य तो सिर्फ एक है आत्मा, और सभी धोखा है। धन, दौलत, जमीन, जायदाद , परिवार, समाज , पद एवं अपना खुद का शरीर सब धरा रह जाएगा। यह आत्मा ही निकल कर तेरे कर्मों के साथ जाएगी। जो स्वयं को तपा-तपा कर मिले वह सत्य है । इस दृष्टि से सत्य वह चिंतन व शाश्वत वस्तु है जिसको प्राप्त कर लेने पर  जीव कृत कृत हो जाता है।
 अतः सत्य धर्म अपनाकर अनुसरण कर जीवन को परिवर्तन करना चाहिए

                    

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