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Saturday, 26 September 2020

प्रदेश के बिजली कर्मचारी 29 सितंबर से दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक कार्य बहिष्कार और विरोध सभा करेंगे

कैलाश सिंह विकास वाराणसी

प्रदेश के बिजली कर्मचारी 29  सितंबर से दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक कार्य बहिष्कार और विरोध सभा करेंगे 


 वाराणसी-25सितम्बर ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आहवाहन पर वाराणसी के तमाम बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर व अभियंता ने प्रबंध निदेशक कार्यालय भिखारीपुर पर  आज पच्चीसवें दिन भी शाम 4:00 बजे से 5:00 बजे तक विरोध सभा कर निजीकरण के विरोध में अपना गुस्सा प्रकट किया | 

 आज शाम हुई विरोध सभा में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्वांचल डिस्कॉम के निजीकरण के खिलाफ जारी आंदोलन को और तीव्र करने के लिए 29 सितंबर से प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली कर्मी कार्य बहिष्कार एवं विरोध सभा करेंगे और यदि निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त न किया गया तो 5 अक्टूबर से बिजली कर्मी पूरे दिन का कार्य बहिष्कार करेंगे | 

संघर्ष समिति द्वारा पूर्व घोषित निर्णय के अनुसार आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म जयंती पर निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर में सांसदों व विधायकों को बड़े पैमाने पर ज्ञापन दिए | इसी क्रम में माननीय प्रधानमंत्री एवं वाराणसी के सांसद नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमंत्री कार्यालय के माध्यम से ज्ञापन देने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा बलपूर्वक रोका गया एवं किसी भी पीएमओ के प्रतिनिधि द्वारा ज्ञापन न लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा ही ज्ञापन लिया गया|  ज्ञापन दो अभियान महात्मा गांधी की जयन्ती 02 अक्टूबर तक चलेगा |

संघर्ष समिति द्वारा माननीय प्रधानमंत्री/सांसद वाराणसी को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है  कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किसी भी प्रकार से प्रदेश व आम जनता के हित में नहीं है। निजी कंपनी मुनाफे के लिए काम करती है जबकि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम बिना भेदभाव के किसानों और गरीब उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति कर रहा है। निजी कंपनी  अधिक राजस्व वाले वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्राथमिकता पर बिजली देगी जो ग्रेटर नोएडा और आगरा में हो रहा है। निजी कंपनी लागत से कम मूल्य पर किसी उपभोक्ता को बिजली नहीं देगी। अभी किसानों, गरीबी रेखा के नीचे और 500 यूनिट प्रति माह बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को पॉवर कारपोरेशन घाटा उठाकर बिजली देता है जिसके चलते इन उपभोक्ताओं को लागत से कम मूल्य पर बिजली मिल रही है। अब निजीकरण के बाद  स्वाभाविक तौर पर इन उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी होगी। इस प्रकार एक किसान को लगभग 8000 रु प्रति माह और घरेलू उपभोक्ताओं को 8000 से 10000 रु प्रति माह तक बिजली बिल देना होगा।  निजीकरण के प्रस्ताव के अनुसार सरकार निजी कंपनियों को 05 साल से 07 साल तक परिचालन व अनुरक्षण हेतु आवश्यक धनराशि भी देगी। साथ ही निजी कंपनियों को विद्युत वितरण सौंपने के समय तक के सभी घाटे का उत्तरदायित्व पॉवर कारपोरेशन अपने ऊपर ले लेगा जिससे निजी कंपनियों को क्लीन स्लेट मिले। 

    निजीकरण और फ्रेन्चाइजी के जरिये निजी क्षेत्र को विद्युत् वितरण सौंपने का प्रयोग उत्तर प्रदेश के लिए नया नही है, यह ग्रेटर नोएडा और आगरा में पूरी तरह विफल रहा है।पूरे देश में भी ऐसे प्रयोग विफल हो चुके है और वांछित परिणाम न दे पाने के कारण अन्य प्रदेशों में लगभग सभी फ्रेंचाइजी करार रद्द कर दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश में भी आगरा में टोरेंट पावर कंपनी की लूट चल रही है और कंपनी करार की कई शर्तों का उल्लंघन कर रही है। सी ए जी ने भी टोरेंट कंपनी के घोटाले का पर्दाफाश किया किन्तु टोरेंट की ऊंची पहुंच होने के कारण कोई कार्यवाही नही हुई।वर्तमान में पॉवर कारपोरेशन घाटा उठाकर आगरा में टोरेन्ट कम्पनी को रु 04.45 प्रति यूनिट पर बिजली दे रहा है जबकि आगरा में बिजली का औसत टैरिफ रु 07.65 प्रति यूनिट है। इस प्रकार निजीकरण से पॉवर कारपोरेशन को अरबों खरबों रु का घाटा हो रहा है जबकि टोरेन्ट कम्पनी भारी मुनाफा कमा रही है। टोरेन्ट कम्पनी ने पॉवर कारपोरेशन का 2500 करोड़ रु से अधिक का राजस्व का बकाया दबा रखा है और 10 साल बाद भी नही दिया है। निजीकरण का यही प्रयोग अब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में दोहराया जा रहा है जिससे बिजली कर्मियों में भारी रोष है।

सभा को सर्वश्री इं चंद्रशेखर चौरसिया, आर के वाही, मायाशंकर तिवारी, सुनील यादव, संजय भारती, राजेन्द्र सिंह, ए के श्रीवास्तव, वीरेंद्र सिंह, रमाशंकर पाल, रमन श्रीवास्तव, आर बी सिंह, हेमंत श्रीवास्तव, एस के सिंह, नीरज बिंद, जीउत लाल, अंकुर पांडेय, संतोष वर्मा, राजेश कुमार, अनिल कुमार, ए के सिंह,गुलाब, कृष्णा भारद्वाज, विजय, तपन, ओ पी भारद्वाज, अभय,आदि पदाधिकारियो ने संबोधित किया |


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