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Tuesday, 11 May 2021

बलिया-सामाजिक कार्य करते हुए सरकार और सिस्टम से कुछ कहना चाहते है हम- सुशांत राज भारत

 


हमारी आवाज कौन सुने कौन ...?
 

माइकल भारद्वाज बलिया

आज आवाज ए हिन्द सामाजिक संगठन के संस्थापक सुशांत राज भारत समाज में कुछ करते हुए सरकार और सिस्टम से कुछ कहना चाहते हैं पर सुने कौन ? सुशांत राज भारत लगातार पिछले 8 दिनों से बांसडीह विधानसभा क्षेत्र के करीब 75 गांव में ऑक्सीमीटर बांट चुके हैं जिसमें बांसडीह नगर, सहतवार नगर, रेवती नगर, साहोडीह मैरीटार, हुसेनाबाद, अपायल,राजा गांव खरौनी, डुहीमुसी, मुड़ीयारी, देवरार, मनियर नगर, शकरपुरा जैसे गांव हैं ताकि बीमार मरीजों का ऑक्सीजन अस्तर चेक किया जा सके और उनको सीरियस होने से बचाया जा सके। इस दौरान अपने अनुभव को साझा करते हुए सुशांत राज भारत कहते हैं कि जिला अस्पताल में जो भी मरीज आ रहे हैं उनको एक ही लक्षण महसूस हो रहा है कि उनकी सांस फूल रही है सांस लेने में उनको दिक्कत हो रही है । अतःउन लोगों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है लेकिन अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी हो रही है और कभी-कभी तो बेड भी नसीब नहीं हो पा रहा है।

 इस विषय पर अपनी बात रखते हुए सुशांत राज भारत कहते हैं कि ज्यादातर मरीज वहीं आ रहे हैं जिनका ऑक्सीजन लेवल 50 या 60 के नीचे रह रहा है क्योंकि यह मरीज पहले चिन्हित ही नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि ना इनकी थर्मल स्कैनिंग हो रही है ना ही इनका ऑक्सीजन लेवल रेगुलर स्तर पर चेक किया जा रहा है । इसलिए सुशांत राज भारत का मानना है अपने अनुभव के आधार पर पिछले 8 दिनों की कि यदि सरकार हर गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा बहू, गांव के नए प्रधान, लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी, तथा गांव के वार्ड मेंबरों को साथ लेकर अगर हर घर को थर्मल स्क्रीनिंग किया जाए, गांव के हर व्यक्ति के ऑक्सीजन लेवल को जांच किया जाए तो हम लोग उन बीमार लोगों को चिन्हित कर पाएंगे जिन को सर्दी खांसी बुखार है और उनको प्राथमिक स्तर पर ही दवाई देकर सीरियस होने से बचाया जा सकता है । इसके बावजूद भी यदि कोई ऐसा मरीज मिलता है जिसका ऑक्सीजन स्तर 90 के नीचे है या कहे तो 80-85 पर है तो उसको अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है और वह मरीज बहुत कम ऑक्सीजन की खपत करते हुए कम समय बेड पर रहते हुए ठीक हो कर घर जा सकता है।  जिससे मृत्यु दर भी कम हो जाएगी क्योंकि जो मरीज 40- 45 के ऑक्सीजन लेवल के साथ अस्पताल में आ रहे हैं वह मरीज अस्पताल में 7 से 8 दिनों तक रह रहे हैं ऑक्सीजन भी ज्यादा ले रहे हैं बेड पर भी लंबे समय तक रह रहे हैं जिससे बेड की उपलब्धता कम हो जा रही है और ऑक्सीजन भी ज्यादा लग रहा है प्रति मरीज । यदि हम प्राथमिक स्तर पर ही गांव में लोगों को सीरियस होने से बचा लेंगे तो ऑक्सीजन की खपत भी कम होगी प्रति मरीज , और बेड भी खाली होंगे और इस फार्मूले के साथ पूरे जिले को और पूरे प्रदेश को तथा पूरे देश को बचाया जा सकता है ।  लेकिन अफसोस की बात है कि मेरे द्वारा पिछले 2 दिनों से डीएम कार्यालय से संपर्क किया जा रहा है एडीएम से बात करने की प्रयास हो रही है लेकिन कोई भी सुनने वाला नहीं है । सुशांत राज भारत कहते हैं कि अगर जिलाधिकारी महोदया को फंड की दिक्कत है तो वो भी बताएं हम लोग चंदे से भी यह कार्य कर सकते हैं बस विभागीय सहयोग मिल जाए।

 

 सुशांत राज भारत कहते हैं कि इस विषय पर हम ने मुख्यमंत्री को, मुख्यमंत्री कार्यालय को, प्रधानमंत्री को, प्रधानमंत्री कार्यालय को सूचना दिया हूं पर अभी तक कोई उत्तर नहीं आया है इसलिए अंत में मुझे भारतीय लोकतंत्र के चौथे स्तंभ भारतीय मीडिया का सहारा लेना पड़ रहा है ताकि मेरे द्वारा बताई गई योजना जिला अधिकारी, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री तक पहुंचे ताकि इस योजना पर काम हो और लोगों की जान बचाई जा सके। सुशांत राज भारत ने बताया कि आने वाले समय में हमारा संगठन आवाज ए हिंद अभी और 40 ऑक्सीमीटर विभिन्न गांव में बांटेगा और उसके बाद भी यह कार्य निरंतर चलता रहेगा ताकि हर गांव तक ऑक्सीमीटर पहुंचाया जा सके। सुशांत राज भारत कहते हैं कि जिले के विधायकों, सांसदो, राज्य सभा सांसदों से तो कोई उम्मीद ही नहीं है।  आवाज ए हिन्द के कार्यकर्ता प्रतिदिन गांव गांव जाकर लोगों का आक्सीजन लेवल जांचने का तथा थर्मल स्कैनिंग करने का काम कर रहे हैं और लगभग हर गांव में 4-5 मरीज मिल जा रहे हैं और हम लोग उन मरीजों को अस्पताल भेज रहे हैं जिससे मरीज साधारण दवाइयां खाकर ठीक हो जा रहे हैं और ना ही आक्सीजन की जरूरत पड़ रही है और ना ही बेड की। सभी जन प्रतिनिधि विलुप्त हो गये है और जनता परेशान होते हुए कह रही है कि आखिर हमारी आवाज सुने कौन?


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