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Tuesday, 11 May 2021

बलिया के डॉक्टर अनिल कुमार मिश्र ने कोरोना की दवा खोज कर जनपद का बढा़या सम्मान

 



माइकल भारद्वाज बलिया

 हां तो आप समझ जाइएये की बहुत बड़ी खुशखबरी मिल चुकी है। जनपद बलिया के सिकंदरपुर तहसील के मिश्र चक गांव निवासी डॉ अनिल कुमार मिश्र के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने कोरोना की दवा खोजकर बलिया के नाम को रोशन किया है ।आज पूरी दुनिया कोरोना की वैक्सीन बनाने और बांटने में लगी है। इसी बीच भारत के डीआरडीओ( रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने कमाल करते हुए कोरोना की दवा बना दी  है। यही नहीं मोदी सरकार ने इसके आपात इस्तेमाल की मंजूरी भी दे दी है ।रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारत के औषधि महानियंत्रक ने डीआरडीओ द्वारा विकसित कोविड रोधी  दवा को आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी है।

कोविड-19 रोधी दवा 2-डी ऑक्सी ग्लूकोज- डी(drug2-deoxy-D-glucose  या 2-DG)  डीआरडीओ द्वारा हैदराबाद स्थित डॉ रेड्डीज लैबोरेट्रीज के साथ मिलकर विकसित की गई है। रक्षा मंत्रालय के डीआरडीओ द्वारा बनाई गई एन्टी कोविड ड्रग 2-DG पाउच में पाउडर के रूप में आती है ।पाउडर को पानी में खोल कर लिया जाता है ।दवा लेने के बाद जब यह शरीर में पहुंचता है तो कोरोना संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरस को बढ़ने से रोकती है ।डीआरडीओ की मानें तो यह दवा कोरोना संक्रमित कोशिकाओं की पहचान करती है। फिर अपना काम शुरू कर देती है ।दवा को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा कोरोना मरिजों के लिए रामबाण साबित हो सकती है ।खासकर ऐसे समय में जब मरीजों को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है।

 प्राथमिक शिक्षा जूनियर हाई स्कूल सिकंदरपुर से हाई स्कूल ,राष्ट्रीय इंटर कॉलेज सुन्दवापुर व  इंटरमीडिएट मिर्जापुर से पास किया है। उन्होंने साल 1984 में गोरखपुर विश्वविद्यालय से एमएससी और साल 1988 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय बीएचयू से रसायन विज्ञान विभाग से पीएचडी किया ।इसके बाद वह फ्रांस के बर्गोग्ने विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रोजर गिलार्ड के साथ तीन साल के लिए पोस्ट डॉक्टोरल फेलो रहे।  फिर वे प्रोफेसर सी एफ मेयर्स के साथ कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में भी पोस्ट डॉक्टोरल फेलो हो रहे हैं। डॉक्टर ए के मिश्रा 1994 से 1997 तक आई एन एस ई आर एम, नांतेस,  फ्रांस में प्रोफेसर चताल के साथ अनुसंधान वैज्ञानिक भी रहे।

दरौली मिश्र 1997 में वरिष्ठ वैज्ञानिकों के रूप में डीआरडीओ के इंस्टीट्यूट आफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज में शामिल हुए ।वह 2000-2003 तक जर्मनी के मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट में विजिटिंग प्रोफेसर और आई एन एम एस के प्रमुख रहे।

वर्तमान में फिर से डीआरडीओ में वरिष्ठ वैज्ञानिक के तौर पर कार्यरत डॉ अनिल मिश्र वर्तमान में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के साइक्लोट्रॉन और रेडियो फार्मास्यूटिकल साइंसेज डिवीजन में काम करते हैं। अनिल रेडियो मिस्ट्री न्यूक्लियर केमेस्ट्री, ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में रिसर्च करते हैं। उनकी वर्तमान परियोजना आणविक इमेजिंग जांच का विकास है। डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ एके मिश्र ने बताया कि किसी भी वायरस की ग्रोथ होने के लिए ग्लूकोज का होना बहुत जरूरी है जो वायरस को ग्लूकोज नहीं मिलेगा तब उसके मरने के चांसेस काफी बढ़ जाते हैं। इस वजह से वैज्ञानिकों ने लैब में ग्लूकोज का एनालॉग बनाया ।जिसे 2डीआरसी ग्लूकोज कहते हैं ।इसे वायरस ग्लूकोज खाने की कोशिश करेगा लेकिन यह ग्लूकोज होगा नहीं, इस वजह से उसकी तुरंत ही वही मौत हो जाती है। यही दवा का बेसिक प्रिंसिपल है।

इसके पहले भी सिकंदरपुर के लीलकर गांव निवासी एम्स में कार्यरत डॉक्टर संजय राय के नेतृत्व में कोविड-19 टीका का निर्माण कर देश में बलिया ने अपनी अलग पहचान कायम करने में सफलता पाई है।

मिश्र चक निवासी विजय शंकर मिश्रा के दूसरे नंबर के पुत्र डॉ अनिल कुमार मिश्र के दो भाई अशोक मिश्र, सुधीर मिश्र अध्यापक हैं। वही अरुण मिश्र घर पर रहते हैं।

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