कृपा शंकर चौधरी
गोरखपुर । कारगिल विजय दिवस के अवसर पर चौरीचौरा क्षेत्र के डुमरी खास गांव निवासी पूर्व सैनिक हरिवंश तिवारी की राष्ट्रसेवा और सैन्य जीवन की चर्चा हो रही है। भारतीय सेना में करीब 27 वर्षों तक सेवाएं देने वाले हरिवंश तिवारी ने कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन विजय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई थी। वह सेना में ओनरी नायब सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए।
स्वर्गीय चंदन तिवारी के पुत्र हरिवंश तिवारी ने 28 फरवरी 1976 को भारतीय सेना की 70 आर रेजीमेंट के टैंक विभाग में जीडी रैंक पर भर्ती होकर सैन्य सेवा शुरू की। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
वर्ष 2000 में उनकी सेवानिवृत्ति होनी थी, लेकिन इसी दौरान कारगिल युद्ध शुरू होने के कारण देश की जरूरत को देखते हुए उनकी सेवा अवधि तीन वर्ष के लिए बढ़ा दी गई। ऑपरेशन विजय के दौरान उन्होंने अग्रिम चौकियों और सैन्य ठिकानों तक आवश्यक हथियारों के लिए गोला-बारूद और अन्य सैन्य सामग्री पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई। चुनौतीपूर्ण और दुर्गम परिस्थितियों में भी उन्होंने पूरी निष्ठा और साहस के साथ अपने दायित्व का निर्वहन किया।
लगभग 27 वर्षों की सैन्य सेवा के बाद हरिवंश तिवारी 28 फरवरी 2003 को ओनरी नायब सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें ऑपरेशन विजय मेडल समेत छह अन्य सैन्य पदकों से सम्मानित किया गया।
कारगिल विजय दिवस पर क्षेत्र के लोगों ने पूर्व सैनिक हरिवंश तिवारी की देशसेवा को याद करते हुए उन्हें नमन किया। ग्रामीणों का कहना है कि देश की सुरक्षा में सैनिकों की भूमिका सर्वोपरि है। हरिवंश तिवारी का सैन्य जीवन युवाओं के लिए अनुशासन, कर्तव्य और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है।
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